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कर्नाटक: लिंगायत के हेड शिवकुमार स्वामी का 111 साल में निधन, तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान

स्वामी का अंतिम संस्कार 22 जनवरी को शाम 4.30 बजे होगा

Updated On: Jan 21, 2019 03:52 PM IST

FP Staff

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कर्नाटक: लिंगायत के हेड शिवकुमार स्वामी का 111 साल में निधन, तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान

लिंगायत-वीरशैव्य के महंत शिवकुमार स्वामी का निधन सोमवार को कर्नाटक के तुमाकुरु में देहांत हो गया. उनका निधन सोमवार सुबह 11.44 बजे हुआ. कर्नाटक के सीएम  एचडी कुमारस्वामी ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि स्वामी का अंतिम संस्कार 22 जनवरी को शाम 4.30 बजे होगा.

कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार ने सिद्धगंगा मठ के महंत श्री शिवकुमार स्वामीजी के निधन पर सभी स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों के लिए तीन दिवसीय राजकीय शोक और एक दिन की छुट्टी की घोषणा की है.

मठ के महंत काफी समय से बीमार चल रहे थे और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. उनके निधन की खबर सुनते ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है.

महंत को कई बड़े राजनेता अपना गुरू मानते थे. कांग्रेस और बीजेपी के कई बड़े नेता उन्हें बहुत सम्मान देते थे. खुद पीएम मोदी, अमित शाह और येदियुरप्पा उनके पास जाया करते थे.

कांग्रेस नेताओं में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे दिग्गज भी महंत को अपना आदर्श मानते थे और उनसे मिलने पहुंचते थे. महंत के इर्दगिर्द नेताओं का जमावड़ा लगा रहता था क्योंकि सियासी दृष्टि से भी वह काफी महत्वपूर्ण थे.

गौरतलब है कि कर्नाटक चुनाव आते ही बंगलूरू से 70 किलोमीटर दूर तुमकुर स्थित सिद्धगंगा मठ सुर्खियों में आ जाता है. स्थानीय नेताओं से लेकर राष्ट्रीय नेताओं तक सभी यहां हाजिरी लगाने आते हैं. पीएम मोदी, अमित शाह, येदियुरप्पा, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, देवगौड़ा, सिद्धारमैया, कुमारस्वामी समेत कई नेता मठ के स्वामी का आशीर्वाद लेने जरूर जाते हैं.

मठ के महंत शिवकुमार स्वामी कर्नाटक में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले संत थे. यह मठ 600 साल पुराना है और यहां आशीर्वाद लिए बिना कर्नाटक में राजनीति कर पाना संभव नहीं है. क्योंकि मैसूर इलाके में इस मठ का बहुत प्रभाव है. हालांकि मठ के स्वामी ने खुद को हमेशा राजनीति से दूर रखा, उन्होंने कभी किसी का पक्ष नहीं लिया लेकिन आशीर्वाद सबको दिया.

स्वामी लिंगायत धर्म से संबंध रखते थे. कर्नाटक सरकार उन्हें कर्नाटक रत्न से सम्मानित कर चुकी है. इससे पहले सिद्धारमैया सरकार उन्हें भारत रत्न देने के लिए केंद्र से आग्रह कर चुकी है.

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