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राजीव दीक्षित (पार्ट-2): जिसने भारत में शुरू किया फेक न्यूज और पोस्ट ट्रुथ का दौर

जब नेहरू-गांधी परिवार के बारे में कोरा के प्रश्न या प्रोपेगेंडा वेबसाइट्स के लिंक झांकते दिखते हैं. तब समझ में आता है कि राजीव दीक्षित जैसे लोग कितना बड़ा खतरा बन चुके हैं

Avinash Dwivedi Updated On: Dec 01, 2017 04:49 PM IST

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राजीव दीक्षित (पार्ट-2): जिसने भारत में शुरू किया फेक न्यूज और पोस्ट ट्रुथ का दौर

जैसा कि लेख के पहले भाग में कहा जा चुका है, राजीव दीक्षित जैसे लोगों को एक वक्त तक मीडिया का भाव न देना बिल्कुल सही कदम था. पर आज के दौर में जब आप गूगल पर 'जवाहर लाल नेहरू डेथ' कीवर्ड डालकर सर्च करते हैं तो 'क्या जवाहर लाल नेहरू की मौत यौन संक्रामक रोग से हुई थी?' और 'जवाहर लाल नेहरू बर्थ' कीवर्ड डालकर सर्च करते हैं तो 'क्या जवाहर लाल नेहरू मुसलमान थे?' जैसे कोरा के प्रश्न या फर्जी (प्रोपेगेंडा) वेबसाइट्स के लिंक झांकते दिखते हैं. तब समझ में आता है कि राजीव दीक्षित जैसे लोग कितना बड़ा खतरा बन चुके हैं.

दरअसल हम यह भी कह सकते हैं कि आज से बहुत पहले ही फेक न्यूज और पोस्टट्रुथ जैसे विचारों की नींव रखी जा चुकी थी, जब राजीव दीक्षित के इन भाषणों की ऑडियो कैसेट प्रचार के लिए तैयार की जाती थी. पर इन सभी तथ्यों के बीच राजीव दीक्षित का पर्दाफाश करने की जिम्मेदारी भी बंधती है. यह जिम्मेदारी तब और ज्यादा हो जाती है, जब एक साल पहले एक हिंदी की समाचार वेबसाइट राजीव दीक्षित की तारीफ में फीचर लगा चुकी हो.

यूं तो राजीव दीक्षित ने अपने जीवनकाल में बहुत से दावे किए हैं. जिनमें से सारे दावों को जांचना लंबा काम है. इसलिए आपको यह विश्वास देने के लिए कि उनके ज्यादातर दावे झूठे हैं उनके नेहरू के प्रेम संबंधों से जुड़े एक ऐसे दावे का पर्दाफाश किया जा रहा है, जो बहुप्रचलित और सनसनीखेज होने के साथ वाट्सऐप यूनिवर्सिटी का ऑलटाइम फेवरेट भी है.

आगे के तर्कों से पहले इस वीडियो को 4 मिनट 50 सेकेंड पर सुनें. राजीव दीक्षित का दावा है कि एडविना (वायसराय माउंटबेटन की पत्नी), जिन्ना और नेहरू हैरिस कॉलेज, लंदन में क्लासमेट थे.

अब जरा तथ्यों के बारे में सुनें-

जवाहर लाल नेहरू की शिक्षा

जिन्ना विकिपीडिया

नेहरू पढ़ाई के लिए 1907 में कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए. जहां से उन्होंने 1910 में नेचुरल साइंस में ऑनर्स के साथ अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. नेहरू ने यहां राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास और विविध साहित्य की पढ़ाई भी की. बर्नांड शॉ, एच.जी. वेल्स, जे.एम. केन्स, बर्ट्रेड रसेल, डिकिंसन और मेरेडिथ टॉन्सेंड की रचनाओं ने उनकी राजनीतिक और अर्थशास्त्रीय समझ को प्रभावित किया.

1910 में अपना ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद नेहरू लंदन गए और वहां कानून की पढ़ाई के लिए दो साल इन्स ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ में पढ़ाई की. इसी वक्त, उन्होंने फेबियन सोसाइटी के विचारकों जिसमें बिएट्रिस वेब भी शामिल थे को पढ़ा. नेहरू ने अपनी बार की परीक्षा 1912 में पूरी की और इंग्लैण्ड के बार के सदस्य हो गए.

मोहम्मद अली जिन्ना की पढ़ाई-लिखाई

नेहरू विकिपीडिया

1892 में जिन्नाभाई पोंजा (मोहम्मद अली जिन्ना के पिता) के एक बिजनेस के साथी सर फ्रेडरिक ने जवान जिन्ना को अपनी कंपनी में अप्रैंटिसशिप पर काम करने का निमंत्रण दिया. पर जिन्ना ने लंदन जाने के कुछ ही वक्त बाद अप्रैंटिसशिप छोड़ दी क्योंकि उन्हें लॉ पढ़ना था. यह भावी बैरिस्टर लिंकन इन के साथ जुड़ा. बाद में जिन्ना की कानूनी पढ़ाई इन्स ऑफ कोर्ट में हुई. जिसके बाद उन्होंने अप्रैंटिसशिप की और एक स्थापित बैरिस्टर हो गये.

एडविना का हाल जानें

एडविना माउंटबेटन, काउन्टेस माउंटबेटन ऑफ बर्मा का जन्म 1901 में हुआ था. आगे कोई जानकारी है कि एडविना कभी कॉलेज भी गईं.

ऐसे में आप खुद जरा अंदाजा लगाएं कि वे तीनों लोग जिनकी पैदाइश में दशक भर से ज्यादा का फर्क है. एक ही कॉलेज के स्टूडेंट कैसे हो सकते हैं? और नेहरू जैसे एक ग्रेजुएट स्टूडेंट के क्या 8-10 साल की एडविना से संबंध हो सकते हैं?

ऊपर के वीडियो को 16 मिनट 15 सेकेंड पर फिर सुनें. राजीव दीक्षित का आरोप है कि नेहरू और जिन्ना के बीच मतभेद की मुख्य वजह एडविना थीं. यहां मेरी बात से आप सभी सहमत होंगे कि कमसकम जिन्ना के नजरिए से ये एक बेहूदा तर्क है.

ऐसे ही जानकार जानते हैं कि ये दावा भी पूरी तरह से खोखला है कि नेहरू और जिन्ना की वकालत नहीं चलती थी. जबकि नेहरू और जिन्ना ही दोनों बहुत सफल वकील रहे थे. और दोनों ने ही कई महत्वपूर्ण केसों का नेतृत्व किया किया था.

माउंटबेटन की बेटी ने भी स्वीकारी है नेहरू-एडविना के अशारीरिक संबंधों की बात

हालांकि, एडविना माउंटबेटन की बेटी पामेला ने हाल ही में एक किताब अपनी मां के बारे में लिखी है. जिसमें एडविना के साथ नेहरू के संबंधों की भी चर्चा है. पढ़ें, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि नेहरू और एडविना के पराभौतिक प्रेम संबंध में सेक्स का स्थान नहीं था. ये खबर वैसे उस वक्त के तमाम अखबारों में छपी थी. यहां पढ़ें.

एक वेबसाइट पर छपी खबर के अनुसार-

पामेला, नेहरू के अपनी मां को भेजे खतों के बारे में डूबकर बताती हैं कि 'मैं समझ पाई थी कि कितनी गहराई से वह (नेहरू) और मेरी मां एक-दूसरे से प्यार करते हैं.' लेखिका के अनुसार, ये एक आध्यात्मिक और बौद्धिक संबंध था, न कि शारीरिक. पामेला का कहा है, 'न ही उनके पास शारीरिक प्रेम संबंध के लिए वक्त था, और न ही उनका हमेशा लोगों से घिरा रहने वाला व्यक्तित्व उन्हें कभी इसके लिये अकेला ही छोड़ता था.'

ऐसे में नेहरू की जिन फोटोशॉप्ड तस्वीरों का प्रयोग ऐसे प्रोपेगेंडा को फैलाने के लिये होता है अगल वो वास्तविक होतीं तो अभी तक उन पर कई डॉक्यूमेंट्री, लेख और किताबें आ चुकी होतीं.

ये तो एक छोटा सा उदाहरण है. राजीव दीक्षित गांधी-नेहरू परिवार से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा, इस्लाम के बारे में तमाम पूर्वाग्रहों, गौमूत्र की महिमा के गान, ज्योतिष और आयुर्वेद के इस्तेमाल को देशव्यापी बनाने वाले भी रहे हैं.

जीवन ही नहीं मौत भी विवादास्पद

भारत में फेक न्यूज के जनक राजीव दीक्षित का जीवन तो विवादास्पद था ही (जैसा कि इस लेख के पहले भाग में बताया गया है) उनकी मौत भी विवादास्पद रही. नवंबर, 2010 के आखिरी सप्ताह में राजीव छत्तीसगढ़ दौरे पर गए थे. कई जगहों पर उनका भाषण हुआ. इसके बाद 30 नवंबर को वह भिलाई पहुंचे. जहां अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई. वहीं दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें भिलाई के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और फिर वहां से अपोलो BSR हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

राजीव के समर्थक दावा करते हैं कि मौत के बाद राजीव की बॉडी नीली पड़ गई थी. जिससे उन्हें जहर दिए जाने का शक होता है. कहते हैं कुछ लोगों ने मौत के बाद पोस्टमॉर्टम की मांग की थी पर ऐसा हुआ नहीं. और राजीव की बॉडी को वर्धा लाने के बजाय हरिद्वार में रामदेव के पतंजलि आश्रम ले जाया गया, जहां उनकी अंत्येष्टि कर दी गई.

पर अब न ये प्रकरण उठता है, न राजीव का परिवार इसकी मांग करता है. कई लोगों ने उनके भाई से संपर्क साधने की कोशिश की है पर कोई फायदा नहीं हुआ है. बाद में बाबा रामदेव ने राजीव दीक्षित की मौत पर अपने और उनके बेहतरीन संबंध होने और इससे उनका कोई लेना-देना न होने की सफाई भी दी थी.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है)

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