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कोलकाता: स्कूल ने 10 छात्राओं पर लगाया लेस्बियन होने का आरोप

परिजनों का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने बेबुनियाद आरोप लगाकर लड़कियों का भविष्य खराब कर दिया है

Updated On: Mar 13, 2018 07:22 PM IST

FP Staff

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कोलकाता: स्कूल ने 10 छात्राओं पर लगाया लेस्बियन होने का आरोप

कोलकाता के एक निजी स्कूल ने 10 छात्राओं पर लेस्बियन होने का आरोप लगाया है. इसके बाद छात्राओं के परिजनों ने स्कूल में आकर विरोध किया. इस दौरान परिजनों की स्कूल की संचालिका के साथ काफी बहसबाजी भी हुई. घटना दक्षिणी कोलकाता में स्थित कमला गर्ल्स स्कूल की है. छात्राओं के परिजनों का कहना है कि स्कूल मैनेजमेंट ने जबरन छात्राओं से लेस्बियन होने की बात कबूल करवाकर उनसे लिखित में इस बारे में एक पत्र लिया है.

मिरर नॉउ में छपी खबर के मुताबिक स्कूल की संचालिका ने परिजनों के आरोपों से इनकार दिया. स्कूल संचालिका का कहना है कि कुछ छात्राओं ने आरोपी 10 छात्राओं के खिलाफ उनके इस तरह के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी.

इसके बाद मैनेजमेंट ने आरोपी छात्राओं को बुलाया और उनसे पूछताछ की तो उन्होंने यह बात कबूल कर ली. स्कूल संचालिका ने कहा कि संवेदनशील मामला होने के कारण हमने आरोपी छात्राओं से यह बात लिखित में भी देने को कहा.

स्कूल संचालिका ने कहा कि मामले के खुलासे के बाद हमने छात्राओं के अभिभावकों को इस मामले पर चर्चा के लिए स्कूल बुलाया. हमारा उद्देश्य सिर्फ यह था कि अभिभावकों से बात करके छात्राओं को सही रास्ते पर लाया जाए. लेकिन इस मामले से आरोपी छात्राओं के अभिभावक भड़क गए और उन्होंने हंगामा कर दिया. परिजनों का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने बेबुनियाद आरोप लगाकर लड़कियों का भविष्य खराब कर दिया है.

अभिभावकों ने स्कूल मैनेजमेंट के आरोपों को बेबुनियाद और झूठा करार दिया है. एक अभिभावक ने कहा कि अगर 2 लोग हाथ में हाथ डालकर या कंधे पर हाथ रखकर चल रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि दोनों लेस्बियन हैं.

समलैंगिकता को अपराध ठहराने को लेकर बनी आईपीसी की धारा 377 अंग्रेजों के जमाने की है. इस धारा को साल 1861 में लागू किया गया था. फिलहाल समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने को कई संगठन पिछले कई सालों से प्रयासरत हैं. सुप्रीम कोर्ट भी धारा 377 की कानूनी वैधता को लेकर फिर से सुनवाई को तैयार हो गई है. पिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.

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