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नक्सलवादः हिंसा की घटनाओं में कमी, मगर नहीं थम रहा सिलसिला

2013 से 2016 की अवधि में सशस्त्र माओवादी कैडरों के मारे जाने के मामलों में 122 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है

Updated On: Mar 26, 2018 03:26 PM IST

FP Staff

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नक्सलवादः हिंसा की घटनाओं में कमी, मगर नहीं थम रहा सिलसिला

गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि साल 2013 से 2016 के बीच देश में वामपंथी उग्रवादियों की ओर से आत्मसमर्पण की संख्या में 411 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तथा आंतरिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियां : मूल्यांकन एवं प्रतिक्रिया तंत्र’ विषय पर संसदीय समिति को गृह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट सौंपी है. इसमें बताया है कि देश के 10 राज्यों में 106 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित हैं जिनमें से 7 राज्यों में 35 जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं.

गृह मंत्रालय के अनुसार, साल 2013 से 2016 की अवधि में वामपंथी उग्रवादी घटनाओं में कुल 7.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और यह वर्ष 2013 की 1136 घटनाओं की तुलना में घटकर वर्ष 2016 में 1048 रह गई. इसी प्रकार से वामपंथी उग्रवाद से संबंधित मौतों में भी 30 प्रतिशत की कमी आई है और ये इस अवधि में 379 की तुलना में घटकर 278 रह गई है.

माओवादियों के मरने की घटनाओं में 122 प्रतिशत की हुई है वृद्धि 

समिति को बताया गया कि साल 2017 में 15 फरवरी तक माओवादी हिंसा की 143 घटनाएं घटी है जिसमें 45 मौतें हुई .

मंत्रालय ने बताया कि 2013 से 2016 की अवधि में सशस्त्र माओवादी कैडरों के मारे जाने के मामलों में 122 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. जो साल 2013 के 100 की तुलना में साल 2016 में बढ़कर 222 हो गई. इसी तरह से मुठभेड़ों के मामलों में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

गृह मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया कि इस अवधि में सुरक्षा बलों के कर्मियों की क्षति के मामलों में भी 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और यह 115 से घटकर 65 रह गई.

पिछले साल आए एक रिपोर्ट में माओवादी हिंसा में पिछले दो दशक से ज्यादा वक्त में 12 हजार लोगों की जान गई है जिसमें 2,700 सुरक्षाकर्मी हैं.

गृह मंत्रालय के तैयार किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मारे गए लोगों में 9,300 ऐसे मासूम नागरिक शामिल हैं जिनकी या तो नक्सलियों ने पुलिस का मुखबिर बताकर हत्या कर दी या वो सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच की गोलीबारी में मारे गए थे.

छत्तीसगढ़ और झारखंड सबसे अधिक उग्रवाद प्रभावित राज्य 

मंत्रालय का दावा है कि यह आंकड़े सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे अभियानों और गृह मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए क्षमता निर्माण उपायों की प्रभावशीलता को दर्शातें हैं. इसके साथ ही हिंसा के मार्ग को छोड़ने वाले और मुख्यधारा में लौटने वाले वामपंथी उग्रवादियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है.

समिति को यह भी बताया गया कि वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित रहा जहां 395 घटनाएं घटी और 107 मौतें हुई . झारखंड में 323 घटनाएं एवं 85 मौत, बिहार में 129 घटनाएं एवं 28 मौत, ओडिशा में 86 घटनाएं एवं 27 मौते और महाराष्ट्र में 73 घटनाएं एवं 23 मौत के मामले सामने आए हैं .

गृह मंत्रालय ने कहा कि वामपंथी नए राज्यों को निशाना बना रहे हैं तथा वह अपना आधार कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु के साझा सीमावर्ती इलाकों में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं . वे सड़क निर्माण जैसी विकास गतिविधियों का भी निरंतर विरोध कर रहे हैं.

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