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जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या से सरकार चिंतित, रिहाई के प्रयास शुरू

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देश के सभी 24 हाई कोर्ट को खत लिख कर इस मामले में पहल की अपील की

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Feb 16, 2017 09:55 PM IST

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जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या से सरकार चिंतित, रिहाई के प्रयास शुरू

देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की बढ़ती हुई संख्या पर केंद्र सरकार ने चिंता जाहिर की है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देश के सभी 24 हाई कोर्ट को पत्र लिख कर इस मामले में पहल करने की अपील की है.

विचाराधीन कैदियों की रिहाई सुनिश्चित 

केंद्र सरकार ने देश की उच्च न्यायालयों से आग्रह किया है कि जिन कैदियों ने अपने संभावित समय से आधा समय जेल में बिता लिया है. उन कैदियों की रिहाई सुनिश्चित कराई जाए. इसके लिए किसी भी जमानतदार की अनिवार्यता को भी खत्म किया जाए.

देश के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को लिख कर कहा है कि ऐसे विचाराधीन कैदियों के मामले को हाईकोर्ट खुद ही संज्ञान लेकर उनकी रिहाई सुनिश्चित कराए. साथ ही जिला अदालतों को भी ऐसा करने के लिए कहे.

देश के जाने माने क्रिमिनल लॉयर, संविधान विशेषज्ञ और राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा, ‘मैं भारत के कानून मंत्री के द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत करता हूं. लाखों कैदी बिना ट्रायल के जेलों में भरे रहते हैं उससे संविधान की मूल भावना को धक्का पहुंचता है. भारत के कानून मंत्री का यह कदम स्वागत योग्य है’.

जरूरी कदम उठाने को कहा था

तीन साल पहले सितंबर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए सरकार और हाईकोर्ट को जरूरी कदम उठाने को कहा था.

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल पहले विचाराधीन कैदियों के मामले में  जरुरी कदम के लिए आदेश दिए थे

सीआरपीसी की धारा 434-ए के मुताबिक अगर कोई विचाराधीन कैदी किसी अपराध के लिए संभावित सजा की आधी अवधि पूरी कर चुका है तो उसे रिहा किया जा सकता है. उसे किसी जमानतदार या बिना जमानतदार के ही जमानत दी जा सकती है. कानून का यह प्रावधान आजीवन कारावास और मौत की सजा प्राप्त कैदियों पर लागू नहीं होता है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार देश में इस समय कुल कैदियों की संख्या में 67 फीसदी विचाराधीन कैदियों की है.

5 राज्यों में सबसे ज्यादा विचाराधीन कैदी

देश में सबसे ज्यादा विचाराधीन कैदियों की संख्या वाले पांच राज्य हैं.

बिहार में 82.4 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 81.5 फीसदी, ओडिशा में 78.8 फीसदी, झारखंड में 77.1 फीसदी और दिल्ली में 76.7 फीसदी विचाराधीन कैदियों की संख्या है.

देश की अलग-अलग जेलों में इस समय 2 लाख 82 हजार 879 विचाराधीन कैदियों की संख्या है. यह आंकड़े साल 2014 के जेल सांख्यिकी के आंकड़े से मिले हैं. तीन साल में इसमें और बढ़ोतरी हो गई होगी. भारत में विचाराधीन कैदियों की संख्या कैरेबियाई देश बोरबाडोस की आबादी के बराबर है.

Jail 2

सरकार के आंकड़े के अनुसार भारत के केंद्रीय कारागार और राज्य सरकारों की जेलों में लगभग चार लाख कैदी बंद हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय लगभग पौने तीन लाख विचाराधीन कैदी हैं.

भारतीय जेलों में कैद कैदियों में से लगभग 75 फीसदी कैदी छोटे-मोटे अपराधों में बंद हैं. ये दोषी ठहराए जाने पर मिलने वाली सजा से अधिक या लगभग आधे से अधिक अवधि का कारावास की सजा पूरा कर चुके हैं.

विचाराधीन कैदियों के जीवन में नई उम्मीद जगी

सरकार की इस पहल से पौने तीन लाख विचाराधीन कैदियों के जीवन में नई उम्मीद का दिया रोशन होने वाला है. सरकार की इस कोशिश से अंधेरे में जीवन जी रहे विचाराधीन कैदियों को उजाले में ले जाने के एक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

साल 2010 से 2014 के बीच 25 फीसदी विचाराधीन कैदी एक साल से अधिक समय तक जेल में बंद थे. इस अवधि के दौरान कुल कैदियों की पर विचाराधीन कैदियों का प्रतिशत 65 प्रतिशत रहा.

यह आंकड़ा 2014 पार करते-करते 70 प्रतिशत तक पहुंच गया. 2014 में हर 10 कैदी में से 7 कैदी विचाराधीन कैदी था. जबकि उस 10 में से 2 को बिना दोषी ठहराए एक साल से अधिक जेल में बंद रखा गया था.

विचाराधीन कैदियों की संख्या में तेजी

पिछले पांच सालों के दौरान तीन महीने तक के लिए हिरासत के मामलों को अगर छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी हिरासत की अवधि में विचाराधीन कैदिये की संख्या में तेजी आई है. सबसे अधिक तेजी तीन से पांच साल के लिए हिरासत में रखने की श्रेणी में देखा गया है.

Jail 1

साल 2014 में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 16 से 25 फीसदी से अधिक विचाराधीन कैदियों को एक वर्ष से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया है.

सीधे संख्या की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 18 हजार 214 मामले सामने आए हैं. जम्मू-कश्मीर में 54 फीसदी, गोवा में 50 प्रतिशत, गुजरात में 42 फीसदी मामलों में विचारधीन कैदियों को एक वर्ष से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया.

विचाराधीन कैदी की श्रेणी में कौन ?

ऐसे आरोपी जिन्हें ट्रायल, जांच या पूछताछ के लिए हिरासत में रखा जाता है उन्हें विचाराधीन कैदी कहा जाता है. दोष साबित होने तक विचाराधीन कैदियों को निर्दोष माना जाता है.

विचाराधीन कैदियों के लिए कानूनी सहायता तक पहुंच बनाना आसान नहीं होता. एक तो जेल के अंदर रहते हुए उनके पास संसाधनों की कमी रहती है. दूसरी ओर, जेल परिसर के अंदर वकीलों के साथ बातचीत करने के लिए उन्हें खुला वातावरण नहीं मिलता है. विचाराधीन कैदी असहाय और दया के पात्र बनकर जेल में अपनी जिंदगी काटते हैं.

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दुनिया भर के कानून के जानकारों का मानना है कि जेल, अपराधियों के सुधार का जगह होता है. एक ऐसी जगह जहां पर लोग सजा काटते हुए अपनी भूल का अहसास कर सकें. पर भारत के जेलों में कैदियों की स्थिति इस आदर्शवादी सोच से बिल्कुल उलट है.

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