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एक देश-एक चुनाव के बाद कॉमन सिविल कोड पर मचेगा हो हल्ला

आने वाले वक्त में विधि आयोग यूनिफार्म सिविल कोड पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा और उस घड़ी ये बात तय है कि मसले पर बहस का तूफान उठ खड़ा होगा.

Updated On: Apr 19, 2018 10:37 PM IST

Sanjay Singh

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एक देश-एक चुनाव के बाद कॉमन सिविल कोड पर मचेगा हो हल्ला

देश के विधि आयोग ने पहले केंद्र और राज्यों में एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर एक वर्किंग पेपर ‘साइमलटेनिएस इलेक्शन- कांस्टीट्यूशनल एंड लीगल पर्सपेक्टिव' नाम से तैयार किया. फिर इस मसले पर मंगलवार की रोज आयोग की 14वीं बैठक में विचार-विमर्श हुआ. विधि आयोग इसके बाद एक और बड़े तथा सामाजिक-सियासी एतबार से शायद सबसे ज्यादा उलझन वाले मसले पर विचार करने जा रहा है. यह मसला है समान नागरिक आचार संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) का.

एक तथ्य यह भी है कि बीते एक माह में आयोग और विधि मंत्रालय ने इस मसले पर तीन सार्वजनिक नोटिस जारी किए हैं. इससे संकेत मिलता है कि मसले पर विचार-विमर्श को पूरी संजीदगी से लिया जा रहा है.

सबसे नया पब्लिक नोटिस बीते 10 अप्रैल को सदस्य सचिव डॉ. संजय सिंह के नाम से जारी हुआ है. इस नोटिस में कहा गया है, 'भारत का विधि आयोग समान नागरिक आचार संहिता की जांच-परख कर रहा है. आयोग ने नागरिकों और संगठनों (सरकारी और गैर सरकारी दोनों) से निवेदन किया है कि वे समान नागरिक आचार संहिता से जुड़े किसी भी मसले पर अपनी प्रविष्टि राय, चर्चा या फिर वर्किंग पेपर के रूप में भेजें.

प्रविष्टि सिर्फ तीन तलाक के विषय पर नहीं भेजी जा सकती क्योंकि यह विषय 19 मार्च 2018 को जारी एक सार्वजनिक अपील के जरिए संसद में विचाराधीन है. इसके अलावे सुप्रीम कोर्ट ने समीना बेगम बनाम भारतीय संघ तथा अन्य से जुड़े मुकदमे में एक अर्जी को मंजूर किया है जो बहुविवाह, निकाह हलाला, निकाह मुताह तथा निकाह मिस्यार से संबंधित है.'

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प्रतीकात्मक तस्वीर

विधि आयोग ने कहा है कि लोगों और संगठनों की ओर से मसले पर बड़ी तादाद में राय-विचार आए हैं और अब भी इनका आना जारी है सो आयोग ने राय-सुझाव को भेजने की अंतिम तारीख 30 दिनों के लिए आगे बढ़ा दी है. अब मसले पर राय-सुझाव 6 मई 2018 तक भेजे जा सकते हैं.

इस मुद्दे पर फर्स्टपोस्ट ने सदस्य सचिव डा. संजय सिंह से बातचीत की और पूछा कि जो राय-सुझाव आए हैं उनकी छानबीन करने और समान नागरिक आचार संहिता के वर्किंग पेपर का प्रारूप तैयार करने तथा उसपर विचार करने के लिए आयोग को बैठक बुलाने में अंतिम तारीख के बीतने के बाद से आगे कितना वक्त लग सकता है तो डॉ. सिंह ने जवाब में लगातार यही कहा कि ‘मैं इससे ज्यादा नहीं बता सकता’ और ‘इस मसले पर आगे कुछ कहने का मैं अधिकारी व्यक्ति नहीं हूं’.

अब जरा आप इन तथ्यों पर गौर कीजिए- विधि आयोग का गठन अमूमन तीन सालों के लिए होता है. पहले विधि आयोग ने अपना कामकाज 1955 में शुरू किया और उसके कार्यकाल का समापन 1958 में हुआ. अभी के विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बलवीर सिंह चौहान हैं और इस आयोग का गठन 1 सितंबर 2015 को हुआ था. लिहाजा मौजूदा विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2018 को खत्म हो रहा है.

मौजूदा विधि आयोग के संदर्भ की शर्तों के क्लॉज (उपबंध) डी में समान नागरिक आचार संहिता की चर्चा है लेकिन इस चर्चा में नागरिक संहिता का नाम सीधे-सीधे ना लेते हुए कहा गया है कि आयोग 'राज्य के नीति निर्देशक नियमों की रोशनी में मौजूदा कानूनों की परीक्षा करेगा, सुधार और संशोधन के रास्ते सुझाएगा और ऐसे विधानों का सुझाव देगा जो नीति निर्देशक नियमों के अमल तथा संविधान की प्रस्तावना में लिखे उद्देश्यों को हासिल करने के लिए जरूरी हों.'

संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि राज्य पूरे भारत राष्ट्र में नागरिकों के लिए समान आचार संहिता कायम करने की कोशिश करेगा.

ऐसे में माना जा सकता है कि मौजूदा विधि आयोग समान नागरिक संहिता पर अपनी अंतिम रिपोर्ट या फिर वर्किंग पेपर 31 अगस्त 2018 यानी अपने कार्यकाल की अवधि समाप्त होने से पहले जरूर ही पेश करना चाहेगा.

आयोग इस सिलसिले में जो कुछ भी पेश करता है वह चाहे जिस रूप में हो और उसमें चाहे जो भी बातें लिखी गई हों लेकिन ये तय है कि उससे सियासत का पारा तेजी से चढ़ेगा, मुद्दे पर पूरे देश में सियासी और दूसरे रंग-ढंग की बहसें सरगर्म होंगी. समान नागरिक संहिता का मसला सामाजिक, राजनीतिक और भावनात्मक साबित हुआ है. इस मसले ने लोगों, खासकर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को सुलगाया है और ठीक इसी कारण से हिंदू समुदाय की भावनाएं भी समान नागरिक संहिता को लेकर भड़कती रही हैं.

मौजूदा विधि आयोग के कार्यकाल की समाप्ति की तारीख और समान नागरिक संहिता पर पेश किए जाने वाले इसके दस्तावेज या कह लें रिपोर्ट (अगर आयोग ऐसा करता है तो) का समय भी करीब-करीब वही होगा जब बीजेपी के शासन वाले तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में चुनाव हो रहे होंगे. अगर आयोग मसले पर कोई रिपोर्ट पेश करता है तो उससे बहसें सरगर्म होंगी ही और इन बहसों से पैदा होने वाली गरमी आगे भी जारी रहेगी.

बड़ी संभावना इसी बात की बनती है कि समान नागरिक संहिता पर पेश की गई रिपोर्ट से उठी बहसों की गर्मी समुदायों का ध्रुवीकरण करते हुए आगे 2019 के चुनावों की जमीन तैयार करेगी. अगर ऐसा होता है तो फिर आने वाले सभी अहम चुनावों का सियासी कथानक इसके जरिए बदल जाएगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर

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मुस्लिम समुदाय का एक तबका तीन तलाक तथा समान नागरिक संहिता पर हो रही पहलकदमी का पुरजोर विरोध कर रहा है और उसकी कोशिश इन मसलों पर समुदाय के जज्बातों को हवा देने की है.

मुस्लिम समुदाय के कई नेता इन मसलों को खुलेआम कई मंचों से उठाते रहे हैं लेकिन पटना के गांधी मैदान में रविवार के रोज हुई ‘दीन बचाओ देश बचाओ’ रैली पर खास ध्यान देने की जरुरत है. रैली में बिहार, झारखंड, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल से मुस्लिम समुदाय के हजारों सदस्य जमा हुए थे. इन लोगों ने जानी-पहचानी पोशाक कुर्ता-पायजामा तथा इमामी टोपी पहन रखी थी ताकि उनका नजरिया बाआसानी जाहिर हो सके.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि केंद्र की मौजूदा सरकार से देश तथा इस्लाम को खतरा है. रहमानी इमारत-ए-शरिया के भी प्रमुख हैं. इमारत-ए-शरिया का असर चार राज्यों में है और इन्हीं चार राज्यों से पटना की रैली में मुस्लिम समुदाय के लोग जुटे थे.

रैली में रहमानी ने कहा कि 'हमने चार सालों तक इंतजार किया, उम्मीद बांधी कि बीजेपी संविधान के मुताबिक देश चलाना सीख जाएगी. लेकिन हम गलती पर थे. मिसाल के लिए गौर कीजिए कि मुस्लिम पर्सनल लॉ पर किस तरह हमले हो रहे हैं. केंद्र की मौजूदा सरकार के रहते हमारा देश और इस्लाम खतरे में है.' रहमानी का ख्याल ये था कि मुस्लिम समुदाय को खबरदार रहना होगा ताकि शरीयत पर हो रहे हमले की काट की जा सके. उन्होंने कहा कि 'आरएसएस के एजेंडे में ढेर सारे मुद्दे हैं जिसे ये सरकार लागू करने की कोशिश करेगी. तीन तलाक के बाद समान नागरिक संहिता का मसला सामने आएगा और उसके बाद लाउड स्पीकरों के जरिए अजान देने पर पाबंदी आयद की जाएगी.'

देश के विधि आयोग ने समान नागरिक आचरण संहिता को लेकर जो सार्वजनिक नोटिस जारी किया है वह अभी तक मीडिया की नजरों के खास घेरे में आने से बचा हुआ है लेकिन आने वाले वक्त में विधि आयोग यूनिफार्म सिविल कोड पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा और उस घड़ी ये बात तय है कि मसले पर बहस का तूफान उठ खड़ा होगा.

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