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भारत में 10 साल तक यूनिफॉर्म सिविल कोड संभव नहीं: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

मौलाना सैय्यद जलालुद्दीन उमरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने लॉ कमीशन के अध्यक्ष से मुलाकात की और बताया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए यह उचित समय नहीं है

FP Staff Updated On: Jul 31, 2018 08:34 PM IST

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भारत में 10 साल तक यूनिफॉर्म सिविल कोड संभव नहीं: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मंगलवार को दावा किया कि लॉ कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान ने बोर्ड के सदस्यों को बताया कि भारत में अगले 10 सालों तक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना संभव नहीं है.

मौलाना सैय्यद जलालुद्दीन उमरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को लॉ कमीशन के अध्यक्ष से मुलाकात की और बताया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए यह उचित समय नहीं है.

उमरी ने कहा कि लॉ कमीशन के अध्यक्ष ने उन्हें बताया कि संविधान पर्सनल लॉ के संरक्षण की गारंटी देता है. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने हमें बताया कि जब कई नागरिक और आपराधिक कानून भारत में समान रूप से लागू नहीं होते हैं, तो फिर पर्सनल लॉ के बारे बात क्यों हो रही हैं. पिछले दिनों एक इंटरव्यू में जस्टिस चौहान ने कहा था कि यूसीसी संभव नहीं है और यह कोई विकल्प भी नहीं था.

अगस्त के अंत में पहले कमीशन पेश कर सकता है रिपोर्ट

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और लॉ कमीशन के बीच पहली बैठक 21 मई को हुई थी. कमीशन अगस्त के अंत मे जस्टिस चौहान के सेवानिवृत्त होने से पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है.

पर्सनल लॉ बोर्ड के एक सदस्य कमल फारूकी ने को बताया कि अध्यक्ष ने हमें कुरान के अनुसार गोद लेने और विरासत जैसे मुद्दों की व्याख्या करने के लिए कहा, जो उनकी सिफारिशों को बनाने में मदद कर सके. हालांकि बोर्ड ने कहा है कि कमीशन धार्मिक सिद्धांतों और मान्यताओं की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए नागरिक कानूनों में सुधार की मांग करेगा.

मुस्लिम बोर्ड ने फिर से दोहराया है कि वे सरकार द्वारा मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे क्योंकि सरकार कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है.

हलाला के लिए कठोर कार्रवाई की मांगB

लॉ कमीशन के कुछ सवालों के जवाब में बोर्ड ने कहा कि गोद लेना इस्लाम का हिस्सा नहीं इसलिए इसकी अनुमति नहीं है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव ने मौलाना वाही रहमानी ने जस्टिस चौहान को एक पत्र भी दिया जिसमें कहा गया है कि ‘दिव्य कानून में कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’

इस बीच दो निकाह हलाला और बहुविवाह पीड़ितों ने भी मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि हलाला के डर की वजह से वे अपनी शादी को दोबारा शुरू नहीं कर पा रहे हैं.

हालांकि, इस तरह की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए कमल फारूकी ने बताया कि ‘यह हलाला नहीं है.’ उन्होंने कहा कि इस्लाम में हलाला जैसा कुछ भी नहीं है. हलाला का अभ्यास करने वालों के खिलाफ कठोर कानून कार्रवाई होनी चाहिए.

(साभार न्यूज-18)

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