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वो चार मामले जिन्होंने लालू को 'बे-चारा' कर दिया

सोमवार को आए फैसले के बाद अबतक 4 मामलों में लालू यादव दोषी करार दिए चुके हैं.

FP Staff Updated On: Mar 19, 2018 03:14 PM IST

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वो चार मामले जिन्होंने लालू को 'बे-चारा' कर दिया

आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को चारा घोटाले के चौथे मामले में सोमवार को दोषी करार दिया गया. इसके पहले उन्हें चाईबासा कोषागार मामले में दोषी करार दिया गया है. कुल मिलाकर चार मामलों में लालू यादव दोषी करार दिए जा चुके हैं. आइए जानते हैं इन चारों मामलों के बारे में.

चाईबासा कोषागार घोटाले के दो मामले

1992-93 में फर्जी निकासी का यह मामला है. उस वक्त लालू यादव अविभाजित बिहार राज्य के मुख्यमंत्री थे. कांड संख्या RC-68 A/96 के तहत मामला दर्ज हुआ है. 1996 में सीबीआई ने 79 लोगों को आरोपी बनाया. वर्ष 2001 में लालू समेत 56 आरोपियों के खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल हुआ. ट्रायल फेस करने वालों में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत 6 नेता, तीन आइएएस अधिकारी, पशुपालन और ट्रेजरी के 7 अधिकारी और 40 सप्लायर शामिल है.

इस मामले में सुनवाई के दौरान 14 आरोपियों की मौत हो चुकी है. मृतकों में चारा घोटाले का सूत्रधार श्याम बिहारी सिन्हा सहित पशुपालन विभाग के चार अधिकारी, दो बजट पदाधिकारी, दो पूर्व मंत्री, एक आइएएस, एक पूर्व सांसद और पांच सप्लायर शामिल हैं. दो अभियुक्तों प्रमोद कुमार जायसवाल और सुशील कुमार झा ने इस मामले में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है. वहीं दीपेश चांडक, आर के दास और शैलेष सिंह सरकारी गवाह बन चुके हैं. इस मामले में एक आरोपी फूल सिंह अब तक फरार है. चाईबासा से जुड़े एक दूसरे मामले में एक और केस था जिसपर इसी साल फैसला सुनाया गया. 35.62 करोड़ के घोटाले में 5 साल की सजा हुई थी.

क्या है देवघर चारा घोटाला मामला

जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए के देवघर चारा घोटाले का खुलासा हुआ. तब के उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों पर छापा मारा. छापेमारी में पता चला कि 1990 के दशक में ऐसी कंपनियों को सरकारी ट्रेजरी से चारा के नाम पर पैसे जारी किए गए, जो थी ही नहीं. 1990 से 1994 के बीच देवघर ट्रेजरी से फर्जी तरीके से 89.27 लाख निकालने से जुड़े केस में लालू को सजा सुनाई गई थी.

इसमें 1996 में पटना हाई कोर्ट ने चारा घोटाले में जांच के आदेश दिए थे. देवघर ट्रेजरी केस में 1997 में 38 लोगों पर आरोप पत्र दाखिल हुआ. इनमें 11 की मौत हो चुकी है, जबकि 3 सरकारी गवाह बन गए. 2 ने अपराध मान लिया था. जिन आरोपियों को अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में दोषी करार दिया था, उनमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, तीन आईएएस अधिकारी समेत कई आला अधिकारी भी शामिल हैं.

दुमका कोषागार गबन का मामला

दुमका कोषागार का यह मामला दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपए फर्जी तरीके से निकासी करने से जुड़े है. इस मामले में 11 अप्रैल 1996 में सीबीआई ने 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इस मामले में 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई थी.

लालू को चारा घोटाले से जुड़े पहले मामले में वर्ष 2013 में पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी. दूसरे मामले में लालू को 23 दिसंबर 2017 को दोषी ठहराया गया था और 6 जनवरी को साढ़े तीन साल कैद की सजा सुनाई गई थी. तीसरे मामले में उन्हें चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के लिए 24 जनवरी को दोषी ठहराया गया था और पांच साल की सजा दी गई. लालू के खिलाफ चारा घोटाला मामले में 6 केस दर्ज हैं, जिनमें से तीन मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है.

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