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सुप्रीम और हाई कोर्ट में लंबित मामलों में कमी, लोअर कोर्ट में हुई बढ़ोत्तरी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुहैया कराए गए नवीनतम आंकड़े के अनुसार 17 जुलाई, 2017 तक यह संख्या घटकर 58,438 हो गई

Bhasha Updated On: Oct 01, 2017 04:30 PM IST

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सुप्रीम और हाई कोर्ट में लंबित मामलों में कमी, लोअर कोर्ट में हुई बढ़ोत्तरी

सुप्रीम कोर्ट और देश भर के 24 हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या कम हुई है लेकिन निचली न्यायापालिका में इस तरह के मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है.

कानून मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़े के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 2014 के अंत तक लंबित मामलों की संख्या 62,791 थी जो दिसंबर 2015 में घटकर 59,272 हो गई. लेकिन 2016 में यह संख्या बढ़कर 62,537 हो गई.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुहैया कराए गए नवीनतम आंकड़े के अनुसार 17 जुलाई, 2017 तक यह संख्या घटकर 58,438 हो गई. इनमें 48,772 दीवानी एवं 9,666 फौजदारी मामले शामिल हैं.

इसी तरह 2014 के अंत तक देश के 24 हाईकोर्ट में 41.52 लाख लंबित मामले थे. दिसंबर, 2015 में यह संख्या घटकर 38.70 लाख हो गई. लेकिन 2016 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 40.15 हो गई.

इसके उलट देश की न्यायिक प्रणाली का आधार समझी जाने वाली लोअर कोर्ट में पिछले तीन सालों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ गई.

लोअर कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 2014 में 2.64 लाख थी जो 2015 में बढ़कर 2.70 लाख हो गई और दिसंबर, 2016 में इनकी संख्या और बढ़कर 2.74 करोड़ हो गई.

इस साल एक सितंबर तक हाईकोर्ट में 413 न्यायाधीशों की कमी थी. हालांकि स्वीकृत संख्या 1,079 है, हाईकोर्ट में 666 न्यायाधीश काम कर रहे हैं.

हालांकि देश भर की लोअर कोर्ट में करीब 20,000 न्यायिक अधिकारियों की संख्या स्वीकृत है, वे 4,937 न्यायिक अधिकारियों की कमी का सामना कर रहे हैं.

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