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नौकरी छूटने के बाद मलेशिया में कैद हुए 32 भारतीय, कोलकाता के NGO ने मांगी MEA से मदद

उन्होंने यह भी दावा किया कि कैसीनो कर्मचारियों ने लोगों को धमकी दी है कि 'केवल उनके मृत शरीर ही घर पहुंच पाएंगे'

Updated On: Nov 10, 2018 05:59 PM IST

FP Staff

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नौकरी छूटने के बाद मलेशिया में कैद हुए 32 भारतीय, कोलकाता के NGO ने मांगी MEA से मदद
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कोलकाता स्थित एक एनजीओ ने पश्चिम बंगाल के 32 लोगों को बचाने के लिए विदेश मंत्रालय से सहायता मांगी है. एनजीओ के मुताबिक कथित तौर पर मलेशिया में दो संगठनों ने उन्हें कैद किया हुआ है.

एनजीओ के एक अधिकारी के मुताबिक नेशनल एंटी-ट्रैफिकिंग कमेटी ने प्रधान मंत्री कार्यालय और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री कार्यालय को इन लोगों के बचाव के लिए पत्र भी लिखा है, जिनकी दुर्दशा व्हाट्सएप पर साझा किए गए वीडियो के माध्यम से सामने आई है. वीडियो में, समूह के दो लोगों ने दावा किया कि मलेशिया पहुंचने के बाद उनका पासपोर्ट और वीजा छीन लिया गया था और उन्हें मलेशिया के राज्य सरवाक की राजधानी कुचिंग में ले जाया गया था.

एक कमरे में बंद हैं 23 लोग

एनजीओ के शेख जिन्नार अली ने कहा, 'दोनों ने कहा कि 23 अन्य लोगों के साथ, मलेशिया में एक कमरे में एक कैसीनो कर्मचारियों द्वारा बंद कर दिया गया था. जबकि सात अन्य को एक और कमरे में बंदी बनाया गया था. उन्होंने कहा कि 32 लोगों का समूह, दो बच्चों सहित, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हुगली और बीरभूम जिलों से हैं.

अली ने कहा कि भारतीय हाई कमीशन के अधिकारियों ने एनजीओ को सूचित किया है कि मलेशिया पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और कुचिंग में जल्द ही उनके ठिकानों का पता लगा लेगी. उन्होंने कहा कि शुरुआत में 32 लोगों को मलेशिया में भारी वेतन पैकेज के साथ कबीर हुसैन नामक एक आदमी ने लालसा दिया था, जो उत्तर 24 परगना जिले के गोपालनगर में जॉब कंसलटेंसी फर्म चलाता है.

अली ने कहा, 'उन लोगों ने सितंबर में पर्यटक वीजा के तहत मलेशिया ले जाने से पहले हुसैन को 80,000 रुपए से 90,000 रुपए का भुगतान किया था.' इसके बाद, वीडियो के संदेश में दोनों लोगों ने कहा कि कुछ लोगों को 'एक कैसीनो में बेचा गया था, जबकि अन्य को एक निर्माण कंपनी को बेचा गया था.'

सिर्फ शव ही पहुंचेंगे भारत वापस

उन्होंने यह भी दावा किया कि कैसीनो कर्मचारियों ने लोगों को धमकी दी है कि 'केवल उनके मृत शरीर ही घर पहुंच पाएंगे.' अली ने कहा कि वीडियो संदेश के मुताबिक, उन्हें कैद में भोजन और चिकित्सा सहायता भी नहीं दी जा रही है.

उन्होंने कहा, 'जब हमने उनके परिजनों से संपर्क किया, तो उन्होंने दावा किया कि हुसैन के भुगतान एजेंटों को समूह को मलेशिया से वापस लाने के लिए भारी मात्रा में भुगतान किया गया है. राशि का भुगतान करने के बावजूद उन्हें भारत लौटने की इजाजत नहीं दी गई.' गौरतलब है कि नेशनल एंटी-ट्रैफिकिंग कमेटी ने हाल ही में ईरान में फंसे कुछ सोने के कारोबारियों को घर वापस लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

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