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26/11: मुंबई हमले के कुछ जाने, कुछ अनजाने हीरो

68 घंटों तक मुंबई और देश को दहलाने वाले इस हमले को 9 साल पूरे हो गए हैं

Updated On: Nov 25, 2017 06:31 PM IST

FP Staff

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26/11: मुंबई हमले के कुछ जाने, कुछ अनजाने हीरो

26-11 यानि मुंबई हमले को नौ साल हो गए हैं. दो दिनों तक मुट्ठी भर आतंकवादियों ने देश की आर्थिक राजधानी को बंधक बना रखा था. इस हमले की वीभत्सता कई कारणों से बढ़ जाती है. एक तो ये देश के सबसे हाईप्रोफाइल इलाकों में से एक पर किया गया हमला था. दूसरा आतंकी इन जगहों से ऐसे वाकिफ थे कि जैसे वो यहीं रहते हों.

लंबे समय तक रेकी चलती रही और हमारे सिस्टम को भनक भी नहीं लगी. 26-11 के बाद के हमले के बाद पुलिस, एनएसजी को जिस तरह की हड़बड़ाहट का सामना करना पड़ा उसने कई सवाल खड़े किए. मीडिया की लापरवाही भरी कवरेज से भी आतंकियों को मदद मिली, ऐसे में हमें उन नायकों का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिन्होंने अपनी जान देकर भी इस आपात स्थिति से मुंबई को बाहर निकाला.

मुंबई पुलिस

हवल्दार तुकाराम ओम्बले की ही वजह से कसाब को जिंदा पकड़ा जा सका था. तुकाराम को कसाब के साथ हुई इस मुठभेड़ में अपनी जान देनी पड़ी थी. इसी तरह एन्काउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर, एसीपी अशोक कामटे, एटीएस चीफ हेमंत करकरे भी इस हमले में शहीद हो गए थे. इन सभी को बहादुरी के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था. इन लोगों के साथ ही मुंबई पुलिस के वो लोग भी इतने ही सम्मान के हकदार हैं जो उस समय मोर्चे पर नहीं थे मगर कंट्रोल रूम और बाकी जगहों पर काम करते हुए शहर की स्थिति नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहे थे.

एनएसजी

हमले के दूसरे दिन ताज होटल में एनएसजी ने मोर्चा संभाला था. आतंकवादी बंधकों को मारते जा रहे थे और होटल में ग्रेनेड का इस्तेमाल कर रहे थे. एनएसजी कमांडो गजेंद्र सिंह बिष्ट और मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को इन आंतकियों से सीधे इनकाउंटर में शहीद होना पड़ा, लेकिन इनके चलते ही ताज होटल को हमलावरों से छुड़वाया जा सका.

डॉग स्क्वॉड

मैक्स सीजर, टाइगर और सुल्तान नाम के इन चार कुत्तों ने इस हमले में कई जाने बचाईं. इन चारों ने मिलकर कुल 8 किलो आरडीएक्स, 25 ग्रेनेड, चार डेटोनेटर और दूसरे हथियार बरामद करवाए. जिनकी वजह से कई जानें बचीं. सरकार ने इन तीनों को इसके लिए गोल्ड मेडल भी दिया. इनमें से मैक्स की उम्र के चलते 2016 में मौत हो गई. बाकी तीनों मुंबई के एक कैनल में अपना रिटायरमेंट गुजार रहे हैं.

कैप्टन रवि धर्निधिरका

इनका नाम कम ही लोग जानते हैं. भारतीय मूल के कैप्टन धर्निधिरका के खाते में ताज होटल के 157 लोगों की जान बचाने का श्रेय है. यूएस मरीन में कैप्टन रहे रवि ने 4 साल ईराक में गुजारे थे. मुंबई हमले के समय ये ताज के ही अंदर एक रेस्टोरेंट में थे.

हमले के समय पहले कैप्टन को लगा था कि वो खुद इन हमलावरों से मुकाबला कर सकते हैं. फिर आतंकियों के हथियारों के खतरे को देखते हूए उन्होंने बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने का फैसला किया. किचन के चाकू और दूसरे औजारों, कुर्सियों टेबल वगैरह से उन्होंने पहले आतंकियों का रास्ता रोका और फिर बंधकों को अपने साथ लेकर सुरक्षित किया. इस काम में उनकी मदद दक्षिण अफ्रीका के दो पूर्व कमांडो ने भी की. हमले में जलते हुए होटल की 20वीं मंजिल से 157 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना अपने आप में एक बड़ा मिशन है जिसे कैप्टन ने बखूबी अंजाम दिया.

इसी तरह ताज होटल का स्टाफ और दूसरे तमाम ऐसे लोग हैं जिन्होंने 68 घंटों के इस आतंक से बाहर निकलने में अपनी भूमिका निभाई.

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