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कुलभूषण केस: जानिए आईसीजे में पाक के काउंसल खावर कुरैशी के बारे में ये दिलचस्प बातें!

पाकिस्तान के लोगों का मानना है कि खावर कुरैशी की नियुक्ति करना पाक सरकार का गलत कदम था

FP Staff Updated On: May 18, 2017 11:26 PM IST

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कुलभूषण केस: जानिए आईसीजे में पाक के काउंसल खावर कुरैशी के बारे में ये दिलचस्प बातें!

आईसीजे में कुलभूषण मामले में भारत के हाथों करारी शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान में पाक सरकार की रणनीति की कड़ी निंदा हो रही है.

पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी एक खबर के अनुसार इस निंदा में खावर कुरैशी की काउंसल के तौर पर नियुक्ति भी शामिल है. पाकिस्तान के लोगों का मानना है कि कुलभूषण जाधव मामले में खावर कुरैशी की काउंसल के तौर पर नियुक्ति पाक सरकार की भारी गलती थी.

पाकिस्तानी नागरिक नहीं हैं कुरैशी?

यह बहुत ही दिलचस्प बात है कि इंटरनेशनल कोर्ट में पाकिस्तान के मुख्य वकील यानी काउंसल खावर कुरैशी पाकिस्तानी नागरिक नहीं हैं. हालांकि कुरैशी पाकिस्तानी मूल के जरूर हैं लेकिन उन्होंने कभी भी पाकिस्तान में वकालत भी नहीं की है.

कुरैशी यूके के जाने-माने वकील हैं और उन्होंने ब्रिटेन से ही वकालत की पढ़ाई की है और प्रैक्टिस भी वहीं करते हैं.

कुरैशी इंटरनेशनल लॉ के जानकार माने जाते हैं और यूके सरकार के सलाहकार भी रह चुके हैं. 1999 से 2006 के बीच यूके सरकार द्वारा सिविल मामलों में सलाह के लिए नियुक्त किए गए 20 बैरिस्टर्स में से एक खावर कुरैशी भी थे.

1998 से 2008 तक वे ‘बार कौंसिल इंटरनेशनल रिलेशंस कमिटी’ के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं और इस दौरान वे पब्लिक इंटरनेशनल लॉ कमिटी के चेयरमैन भी रह चुके हैं.

अक्टूबर 2006 में वे ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ‘क्वीन काउंसल’ के पद पर भी नियुक्त किए गए थे. वे ब्रिटेन में हाई कोर्ट में जज भी रह चुके हैं. इसके अलावा यूके सरकार द्वारा अलग-अलग समय में उन्हें कई महत्वपूर्ण पदों की भी जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है.

ब्रिटेन के कई यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग में वे विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं. खावर कुरैशी पाकिस्तान के अलावे कई अन्य देशों के लिए भी इंटरनेशनल कोर्ट में मुकदमों की पैरवी कर चुके हैं.

आईसीजे में सबसे कम उम्र के काउंसल

वे इंटरनेशनल में काउंसल के रूप में जिरह करने वाले सबसे कम उम्र के वकील भी रह चुके हैं. यह उपलब्धि उन्हें तब हासिल हुई जब 1993 में बोस्निया के काउंसल के तौर पर इंटरनेशनल कोर्ट में यूगोस्लाविया के खिलाफ नरसंहार के मामले में जिरह की थी.

कुलभूषण मामले में भले ही खावर कुरैशी के नेतृत्व में पाक को मात खानी पड़ी लेकिन वो भारत के खिलाफ भी पाकिस्तान सरकार के तरफ से मुकदमे की पैरवी पहले भी कर चुके हैं. इस मुकदमें में पाकिस्तान को जीत भी मिली थी.

यह मुकदमा हैदराबाद के 7 वें निजाम की संपत्ति से जुड़ा हुआ था. भारत के विभाजन के बाद ब्रिटेन में हैदराबाद के 7 वें निजाम की 35 मिलियन यूरो संपत्ति पर पाकिस्तान और भारत दोनों ने अपना-अपना दावा किया था और ब्रिटिश कोर्ट ने पाकिस्तान के दावे को सही ठहराया था.

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