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NIA हदिया लव जेहाद मामले में कानूनी पहलू की जांच नहीं कर सकतीः SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे हदिया की पसंद के वैधता पर सवाल नहीं कर सकते, कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या कोई अदालत किसी के विवाह को रद्द कर सकता है

Updated On: Jan 23, 2018 12:44 PM IST

FP Staff

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NIA हदिया लव जेहाद मामले में कानूनी पहलू की जांच नहीं कर सकतीः SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) केरल के 'लव जेहाद' मामले में कानूनी पहलू की जांच नहीं कर सकती है.

अदालत ने कहा कि वे हदिया की पसंद के वैधता पर सवाल नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि एक बड़ी औरत को उसके माता-पिता के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. केवल हदिया को अपने विकल्पों पर फैसला करने का अधिकार था.

सुप्रीम कोर्ट हदिया के पति शफीन जहान की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें केरल हाईकोर्ट ने इनके विवाह को रद्द कर दिया था. अदालत ने पूछा कि क्या एक कोर्ट किसी के विवाह को रद्द कर सकता है. और वो भी तब जब महिला और पुरुष दोनों वयस्क हैं.

हदिया के पिता के वकीलों में से एक ए रघुनाथ ने कहा कि हम एनआईए से उम्मीद करते हैं कि लड़की को अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने के लिए एक रिपोर्ट अदालत में दर्ज करे. हम खुश हैं कि वह सुरक्षित है. अब देखना है कि आगे क्या होता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 22 फरवरी को बहस सुनेगा.

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के सलेम से हदिया को अपनी होम्योपैथिक की पढ़ाई करने के लिए भेजा था. कोर्ट ने केरल पुलिस को निर्देश दिया था कि वह हदिया को सुरक्षा मुहैया कराए और जल्द से जल्द सलेम पहुंचाए. जिससे कि वो अपनी पढ़ाई शुरू कर सके.

सुप्रीम कोर्ट ने सलेम स्थित होम्योपैथिक कॉलेज के डीन को हदिया के अभिभावक के रूप में नियुक्त किया था. साथ ही साथ किसी भी समस्या में संपर्क करने की इजाजत भी दी थी.

हदिया कई सप्ताह से अपने माता-पिता के घर में रह रही है.शीर्ष अदालत की एक बेंच ने कॉलेज और विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि वह हदिया को फिर से दाखिला दे और हॉस्टल की सुविधा मुहैया कराए.

दो घंटे से भी अधिक चली सुनवाई के दौरान हदिया ने कहा था कि वह अपने पति शफीन के साथ रहना चाहती हैं. जब जस्टिस चंद्रचूड ने हदिया से भविष्य के सपनों के बारे में पूछा, तो उसने कहा था कि मुझे स्वतंत्रता चाहिए.

शफीन ने 20 सितंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और मांग की थी कि अपने पुराने आदेश के मुताबिक एनआईए इस विवादित मामले में शादी और धर्म परिवर्तन की जांच कर सके.

केरल हाईकोर्ट ने 'लव जेहाद' का एक उदाहरण बताते हुए इनके विवाह को रद्द कर दिया था जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

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