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बच्चे के नामकरण पर हुआ माता-पिता में विवाद तो हाईकोर्ट ने तय किया नाम

माता-पिता बच्चे का नाम अपनी-अपनी पसंद का रखना चाहते थे, इसी को लेकर शुरू हुआ विवाद कोर्ट पहुंच गया, अब अदालत ने बच्चे का नामकरण किया है

Bhasha Updated On: May 10, 2018 09:48 PM IST

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बच्चे के नामकरण पर हुआ माता-पिता में विवाद तो हाईकोर्ट ने तय किया नाम

बच्चे के नामकरण को लेकर अलग-अलग धर्मों के माता पिता के बीच पैदा हुआ विवाद जब केरल हाईकोर्ट में पहुंचा, तो बच्चे का भविष्य देखते हुए अदालत ने उसका नामकरण करते हुए रजिस्ट्रार को दो हफ्ते के भीतर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया.

अलग-अलग धर्म के एक दंपति अपनी-अपनी इच्छानुसार नाम वाले अपने दूसरे बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में नगर निगम की ‘निष्क्रियता’ के लिए खफा थे. दोनों के बीच नाम रखने के मुद्दे पर वैवाहिक विवाद शुरू हो गया. इसके बाद अदालत ने मामले में हस्तक्षेप किया.

अलग रह रहे दंपति में से, बच्चे की मां का कहना था कि उसका नामकरण ‘जॉन मनी सचिन’ के रूप में किया गया है लेकिन पिता ने कहा कि जिस नाम पर सहमति बनी है वह ‘अभिनव सचिन’ है.

पिता ने अदालत को बताया कि बच्चे के जन्म के 28 वें दिन नामकरण समारोह (केरल में हिंदू व्यवस्था के अनुसार नामकरण संस्कार के लिए आयोजित किया जाने वाला समारोह) में उनके दूसरे बच्चे का नाम अभिनव सचिन रखने पर सहमति बनी थी.

मां-बाप के बीच पैदा हुए विवाद के बाद कोर्ट ने दिया नाम

अदालत को लगा कि बच्चे को एक नाम देने की तत्काल आवश्यकता है, क्योंकि स्कूल में नामांकन होने के उसके जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी. केरल हाईकोर्ट के जस्टिस एके जयशंकर नाम्बियार ने माता-पिता के बीच पैदा हुए मतभेद का संज्ञान लिया और दंपति की इच्छा का सम्मान करते हुए बच्चे का नामकरण ‘जॉन सचिन’ के रूप में कर दिया.

जस्टिस ने कहा कि ‘जॉन’ बच्चे के मां की इच्छा का प्रतिनिधित्व करेगा जबकि सचिन से पिता की जरूरते पूरी होंगी और यह पता चलेगा कि यह बच्चा उसका है.

रिट याचिका का निपटारा करते हुए जस्टिस ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार से फैसले की प्रति मिलने की तारीख से दो हफ्ते के भीतर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया.

अपने-अपने पसंद का नाम रखने पर हो गया था विवाद

इससे पहले मां के वकील ने बताया कि नामकरण संस्कार के दौरान बच्चे का नाम ‘जॉन मनी सचिन’ रखा गया था लेकिन पिता के साथ सुलह के लिए मां ‘मनी’ छोड़ने पर राजी हो गई थी. पिता हालांकि, जॉन के स्थान पर ‘अभिनव’ रखने पर जोर दे रहे थे.

जस्टिस जयशंकरन ने कहा कि यह कार्रवाई बच्चे के हित में होगा जिसका संरक्षण अभी मां के पास है. परिवार न्यायालय के निर्देशों के अनुसार उन्होंने बच्चे का संरक्षण समय-समय पर पिता को भी देने का निर्देश दिया.

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