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2011 में सौंपी गई रिपोर्ट को केरल सरकार ने खारिज नहीं किया होता तो न देखना पड़ता ये दिन

केरल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन के लिए गैर जिम्मेदार पर्यावरणीय नीति को दोषी ठहराया जाना चाहिए. यह एक 'मानव निर्मित आपदा' है.

Updated On: Aug 18, 2018 01:45 PM IST

FP Staff

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2011 में सौंपी गई रिपोर्ट को केरल सरकार ने खारिज नहीं किया होता तो न देखना पड़ता ये दिन

दक्षिणी राज्य केरल में अगस्त का महीना तबाही लेकर आया है. लिहाजा पूरे राज्य में बाढ़ की स्थिति भयानक हो गई है. अब तक इस बाढ़ से तीन सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सरकार के मुताबिक पिछले 90 साल में ऐसी बाढ़ नहीं आई थी.

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में 53,000 से ज़्यादा लोगों को राज्य भर में 439 राहत शिविरों में भेजा गया है. इस साल केरल में मॉनसून के दौरान कुल 143,220 लोग 1790 राहत शिविरों में रह रहे हैं. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल में 29 मई से 19 जुलाई तक 130 लोगों की मौत हो गई.

एक प्रेस रिलीज में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा, 'शुरुआती मूल्यांकन के अनुसार राज्य को 8,316 करोड़ रुपये (83 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है. केरल को 1924 के बाद सबसे खतरनाक बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है. 14 में से 10 जिलों में हालत बेहद खराब हैं. पानी लगातार बढ़ने के चलते राज्य में 27 डैम खोल दिए गए हैं. राज्य भर में 211 जगहों पर भूस्खलन हुए हैं.

यह त्रासदी खराब नीति निर्णयों की ओर इशारा करती है

पर्यावरणविद ने इस त्रासदी के लिए खराब नीति निर्णयों की ओर इशारा किया है. इस मानसून से प्रभावित अधिकांश क्षेत्रों को पश्चिमी घाट के विशेषज्ञों के पैनल ने संवेदनशील बताया था.

ये रिपोर्ट माधव गाडगील, इकोलॉजिस्ट और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज के संस्थापक की अध्यक्षता वाली एक टीम ने तैयार किया था. पर्यावरणविदों के मुताबिक, संवेदनशील पश्चिमी घाट क्षेत्र को बचाने के लिए समिति की सिफारिशें काफी मजबूत थीं.

समिति ने सुझाव दिया था कि पश्चिमी घाटों के 140,000 किलोमीटर क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण की जरूरत के मुताबिक तीन जोन में बांटा जाना चाहिए. समिति ने इन इलाकों में खनन और निर्माण कामों पर प्रतिबंधों की सिफारिश की थी. रिपोर्ट पहली बार 2011 में सरकार को सौंपी गई थी. लेकिन केरल सरकार ने समिति की रिपोर्ट को खारिज कर दिया और इसकी किसी भी सिफारिश को नहीं अपनाया.

मीडिया से बात करते हुए माधव गाडगील ने कहा है कि केरल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन के लिए गैर जिम्मेदार पर्यावरणीय नीति को दोषी ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने इसे 'मानव निर्मित आपदा' भी कहा.

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