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कठुआ रेप केस: 10 महीने बाद भी गांव जाने में डर रहा परिवार, मिल रहीं धमकियां

बीते एक हफ्ते से सबीना और याकूब रासना में इंतजार कर रहे हैं. ये दोनों वहां जा रहे हैं जहां उनकी बच्ची के साथ बर्बरता हुई थी

Updated On: Nov 01, 2018 04:21 PM IST

FP Staff

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कठुआ रेप केस: 10 महीने बाद भी गांव जाने में डर रहा परिवार, मिल रहीं धमकियां
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जम्मू-कश्मीर का कठुआ केस अभी तक लोगों के दिलों में दहशत को जिंदा कर देता है. पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 10 जनवरी को एक आठ साल की बच्ची का किडनैप करके उसके साथ मंदिर में रेप किया गया था. बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी.

न्यूज18 के मुताबिक इस बच्ची के माता-पिता सबीना और याकूब (बदले हुए नाम) कारगिल चोटी से सांबा की तरफ कई किलोमीटर पैदल चल चुके हैं लेकिन अपने घर पहुंचने के लिए उन्हें बहुत हिम्मत जुटानी पड़ रही है. उनका घर बस 25 किलोमीटर दूर है.

लेकिन बीते एक हफ्ते से सबीना और याकूब रासना में इंतजार कर रहे हैं. ये दोनों वहां जा रहे हैं जहां उनकी बच्ची के साथ बर्बरता हुई थी लेकिन ये दोनों लोग वहां जाने से डर रहे हैं. उन्हें याद है कि बेटी के शव को दफनाने के लिए उन्हें बहुत भटकना पड़ा था. उसे दफनाने के लिए वह कई गांव गए थे लेकिन किसी ने ऐसा नहीं करने दिया.

जिसके बाद गांव से सात किलोमीटर दूर जाकर इन्होंने अपनी बेटी को दफनाया. लेकिन जब वो दोबारा गांव पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं तो लोग उन्हें धमकी दे रहे हैं और बेटी की मौत के लिए खुद उसके माता-पिता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

सबीना बताती हैं कि लोग कहते हैं कि हमारी वजह से कुछ लोगों को जेल जाना पड़ा इसलिए गांव से निकल जाओ. अब सबीना और याकूब इतना डर गए हैं कि वह पानी लेने के लिए झरने के पास भी नहीं जाते.

याकूब बताते हैं कि बेटी के केस के लिए मुझे तीन-चार बार कोर्ट जाना पड़ा. इसके खर्च के लिए उन्हें अपनी भेड़ और बकरियां बेचनी पड़ीं. लेकिन याकूब यह भी कहते हैं कि वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए सारी संपत्ति बेच देंगे.

वहीं मृत बेटी को याद करते हुए सबीना कहती हैं कि हत्यारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. लेकिन वह डरते हुए इस बात का भी जिक्र करती हैं कि अगर दोषियों को फांसी होती है तो उन्हें भी मार दिया जाएगा.

सबीना और याकूब कहते हैं कि अगर उनके पास कोई दूसरा रास्ता होता तो वह कभी गांव वापस नहीं आते लेकिन उनके पास दूसरी जगह जमीन खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को रिश्तेदारों के पास छोड़ दिया है और दोनों अब अकेले हैं.

ऐसा पहली बार नहीं है जब सबीना की जिंदगी में गमों ने दस्तक दी हो. इससे पहले भी 2012 में एक एक्सीडेंट हुआ था जिसमें याकूब की मां और तीन छोटे बच्चों की मौत हो गई थी. सबीना और याकूब बताते हैं कि उन्हें अब तक किसी तरह का मुआवजा नहीं मिला, अप्रैल में जम्मू-कश्मीर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण ने परिवार को 2 लाख रुपए के मुआवजे की मंजूरी दी लेकिन उसे एक भी पैसा नहीं मिला.

याकूब और सबीना के पास 200 बकरियां और भेड़ें हैं. उनके पास 14 घोड़े भी हैं. रसाना में एक घर और दो एकड़ जमीन भी है. लेकिन बीते कुछ समय से ग्रामीणों ने उन्हें परेशान कर रखा है. याकूब ने कहा, 'गांव में एक कुंआ है लेकिन उससे पानी भरने के लिए भी हमें गांव वालों से अनुमति लेनी पड़ती है.'

याकूब कहते हैं कि अगर वो अपना घर बेचना भी चाहें तो कोई नहीं खरीदेगा. इसलिए अगले दो हफ्तों तक याकूब और सबीना अपने घर से 25 किलोमीटर दूर रहेंगे. अगर कोई समाधान नहीं हुआ तो सर्दियों में वह फिर पहाड़ों की ओर लौट जाएंगे.

(लेखक आकाश हसन कश्मीर के स्वतंत्र पत्रकार हैं और उन्होंने यह स्टोरी न्यूज18 के लिए की है)

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