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कठुआ केस: इंसाफ दिलाने से ज्यादा आरोपियों को बचाने में व्यस्त है सिस्टम!

कठुआ और उन्नाव केस को अगर इतनी प्राथमिकता से मीडिया में न उठाया गया तो शायद इन मामलों को निचले स्तर पर ही दबा दिया गया होता

Updated On: Apr 15, 2018 09:34 PM IST

Aditi Sharma

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कठुआ केस: इंसाफ दिलाने से ज्यादा आरोपियों को बचाने में व्यस्त है सिस्टम!

एक वक्त था जब खुद को इस देश का नागरिक बताने में गर्व महसूस होता था. सपना देखते थे कि इस देश के लिए कुछ करेंगे. देश का नाम रोशन करेंगे. लेकिन कई सारे लोग इस सपने को साकार करने में इतनी मेहनत करेंगे ये कभी नहीं सोचा था. वाकई कुछ ही समय में हमारे देश का नाम खूब रोशन हुआ है. इस देश ने कुछ ही सालों में काफी प्रगति कर ली है. प्रगति भी ऐसे वैसे मामलों में नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और अपराध जैसे मामलो में जो अच्छे से अच्छा देश नहीं कर पाता. हर बार की तरह इस बार भी आंदोलन की ज्वाला भड़क चुकी है.

सोशल मीडिया इस वक्त कठुआ मामले में लंबे-लंबे पोस्ट से भर चुका है. हर जगह बच्ची को इंसाफ दिलाने की बातें हो रही हैं. लेकिन हम ये भूल रहे हैं कि ये हिन्दुस्तान है. यहां पीड़ित को इंसाफ दिलाने में नहीं बल्कि आरोपियों को बचाने में विश्वास किया जाता है. फिर वो चाहे उत्तर प्रदेश का उन्नाव का रेप केस हो या कश्मीर का कठुआ रेप केस.

क्या वाकई इतनी बड़ी हो गई है समुदाय और धर्म की लड़ाई

ऐसे मामलों को देखकर एक सावाल उठता है कि क्या हमारे देश में समुदाय-धर्म जैसी चीजे वाकई इतनी बड़ी हो गई हैं कि एक 8 साल की बच्ची को भी उसका शिकार बनाने में किसी को कोई हिचक नहीं होती? हम इंसानों को जानवरों में सबसे ऊपर का दर्जा दिया गया है क्योंकि हम में क्या गलत है और क्या नहीं ये सोचने समझने की शक्ति ज्यादा होती है. मगर फिर कठुआ जैसे मामलों को देख कर लगता है कि हम तो जानवर कहलाने के लायक भी नहीं बचे हैं.

तरस आता है उन लोगों पर और उनकी मानसिकताओं पर जो लोगों की हिफाजत के लिए पुलिस में भर्ती होते हैं, मगर अपने मतलब को पूरा करने के लिए 8 साल की बच्ची तक को कुचल देते हैं. महज 8 साल की बच्ची जिसे शायद धर्म का असली मतलब भी नहीं पता उसके साथ बार बार एक हफ्ते तक रेप किया गया. वो भी मंदिर जैसी जगह पर.

इस घिनौनी करतूत का मास्टरमाइंट 60 साल का रिटार्यड सेल्स ऑफिसर था. इसके अलावा इस साजिश में 6 लोग और शामिल थे. इस मामले में दाखिल की गई चार्जशीट के मुताबिक मास्टमाइंड सांजी राम ने अपने भतीजे को खास तौर मेरठ से बुलाया ताकि वो भी उस मासूम सी बच्ची को अपना शिकार बना सके.

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हैरानी वाली बात तो ये है कि जिस चार्जशीट से इन सब बातों का खुलासा हुआ एक वक्त तो उसको दाखिल किए जाने पर भी विरोध किया जा रहा था. ये विरोध और कोई नहीं बल्कि खुद बार एसोसिएशन के वकील कर रहे थे. जी हां वही वकील जो लोगों को इंसाफ दिलाने का दावा ठोंकते हैं. इसके चलते उन्होंने 1 दिन के लिए जम्मू बंद भी बुलाया था.

परिवार को अब भी है इंसाफ की उम्मीद

दूसरी तरफ अब इस केस में बच्ची का केस लड़ रही वकील दीपिका सिंह राजावत का कहना है कि उन्हें अब ये केस लड़ने पर धमकियां मिल रही हैं. इतना ही नहीं इस बच्ची के परिवार वालों को भी धमकियां मिल रही हैं कि वो उन्हें दफनाने नहीं देंगे. मगर इन सब की वजह क्या है? बस यही कि वो अल्पसंख्यक समुदाय से है. उस बच्ची की मां रोते बिलखते बस एक ही सवाल पूछ रही है कि मेरी बच्ची का क्या कसूर था? उसने किसी का क्या बिगाड़ा था जो उसे मार डाला.

उधर उसकी बहन का कहना है कि अब उसे रास्ते से जाने में भी डर लग रहा है. लेकिन इन सब के बावजूद पूरे परिवार को अब भी भरोसा है कि उनको इंसाफ मिलेमा, लेकिन क्या ऐसा वाकई होगा क्योंकि हर बार की तरह इस मामले में भी राजनीति शुरू हो चुकी है और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो चुका है.

फिर शुरू हुई राजनीति

इस मामले में चार्जशीट दाखिल कराने का विरोध कर रहे वकीलों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद मंगलवर को पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया था  कि वकीलों के भेस में कठुआ की भीड़ के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए ये नहीं भूलना चाहिए कि महबूबा मुफ्ती की कैबिनेट के दो बीजेपी मंत्रियों के बयानों की वजह से ही इस भीड़ को दम मिला है. इस मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई का क्या?

उनके इस ट्वीट से साफ है कि वो इन मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रह थे.लेकिन वहीं अब बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस पर वार करते हुए ऑन रिकॉर्ड कहा है कि जम्मू बार एसोसिएशन के प्रेसीडेंट बीएस स्लेथिया गुलाम नबी आजाद के पोलिंग एजेंट हैं.

खैर ये लड़ाई तो हर बार की तरह चलती ही रहेगी लेकिन रेप की समस्या इस देश से शायद कभी खत्म नहीं होगी क्योंकि हमारा देश बेटों को सुधारने की बजाए बेटियों को बचाने में ज्यादा यकीन रखता है. आपको 8 महीने की बच्ची के साथ हुआ रेप याद है जिसके साथ इतनी बर्बरता हुई थी कि पूरा देश कांप गया था. उसका रेप करने वाला और कोई नहीं बल्कि उसका ही भाई था.

आखिर किस-किस से बचाएंगे हम अपनी बेटियों को और कब तक बचाएंगे.एक तरफ मनु भाकर और पूनम यादव जैसी लड़किया गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन कर रही हैं मगर फिर नजर जाती है इन रेप के मामलों पर और सब बदल जाता है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 2015 में 34,600 से ज्यादा रेप हुए हैं और उनमें से 95वें प्रतिशत यानी 33,098 मामले ऐसे थे जिनमें आरोपी पीड़िता का जानने वाला था.

ये आंकड़े 2 साल पुराने हैं मगर कम होने की बजाए ये अब और बढ़ गए होंगे. ऐसे में तो इस समस्या से निपटने का एक ही रास्ता नजर आता है. अगर हम वाकई अपनी बेटियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें पैदा करना ही बंद कर दें क्योंकि हमारा कानून इस वक्त आरोपियों के बचाने में ज्यादा व्यस्त है.

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