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कठुआ रेप केस: वकीलों के प्रदर्शन पर उठते सवालों के जवाब देने होंगे

दिल्ली में वकीलों ने कठुआ रेप और हत्या मामले में जम्मू और आसपास के कुछ वकीलों द्वारा वकालत पेशे की आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए मौन जुलूस निकाला

Updated On: Apr 18, 2018 06:04 PM IST

Kangkan Acharyya

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कठुआ रेप केस: वकीलों के प्रदर्शन पर उठते सवालों के जवाब देने होंगे

'जम्मू के कठुआ जिले के एक गांव में 8 साल की बच्ची के साथ रेप कर उसकी हत्या करने वाले इंसान नहीं बल्कि दानव हैं और कुछ वकीलों द्वारा उनका समर्थन किया जाना बेहद शर्मनाक मामला है', दिल्ली के वकील अशोक अरोड़ा ने देश की राजधानी में वकीलों की एक सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही. अरोड़ा ने कठुआ रेप और हत्या मामले में जम्मू और आसपास के कुछ वकीलों द्वारा वकालत पेशे की आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए मौन जुलूस निकाला. इस सिलसिले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सामने ज्ञापन भी सौंपा गया.

इस जघन्य हत्याकांड के अभियुक्तों के बचाव में जम्मू हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने बाकी बार एसोसिएशंस के साथ मिलकर बीते 11 अप्रैल को जम्मू बंद का आयोजन किया था. जम्मू क्षेत्र से जुड़े वकीलों की इन एसोसिएशंस का आरोप है कि पुलिस इस सिलसिले में डोगरा समुदाय के कुछ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर इस समुदाय के लोगों को जानबूझकर और गलत इरादे से निशाना बना रही है. जम्मू क्षेत्र के वकीलों ने इस मामले में केंद्र सरकार की जांच एजेंसी- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग भी की थी. एक जघन्य कांड के तहत 8 साल की एक बच्ची के साथ मंदिर में गैंगरेप कर उसकी हत्या किए जाने का मामला सामने आया है.

'लॉयर्स फॉर डेमोक्रेसी एंड रूल ऑफ लॉ' ने निकाला मौन जुलूस

अशोक अरोड़ा ने जम्मू के वकीलों के एक तबके द्वारा इस सिलसिले में किए गए विरोध-प्रदर्शनों की कड़ी निंदा की. उनका कहना था कि यह रेपिस्ट और हत्यारों का पक्ष लेने और उनके साथ खड़े होने जैसा मामला है. उन्होंने कहा, 'दुनिया में सबसे खतरनाक स्थिति उस वक्त पैदा होती है, जब लोग बच्चों के साथ हुए अन्याय के पक्ष में खड़े हो जाते हैं. हम इस बात को लेकर शर्मिंदा हैं कि वकीलों ने इस बच्ची के रेपिस्ट और हत्यारों का पक्ष लिया.' जम्मू बार एसोसिएशन और अन्य वकीलों द्वारा रेप और हत्याकांड के अभियुक्तों के बचाव में उतरने के खिलाफ दिल्ली के वकीलों के एक संगठन द्वारा निकाले गए मौन जुलूस में कई वकील शामिल हुए. 'लॉयर्स फॉर डेमोक्रेसी एंड रूल ऑफ लॉ' नामक संस्था की तरफ से निकाले गए इस मार्च मे कई वकीलों ने हिस्सा लिया. इन वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से बार काउंसिल ऑफ इंडिया के ऑफिस तक शांतिपूर्वक मार्च किया.

देशभर में प्रदर्शन का इरादा

वकीलों की इस जुलूस की अगुवाई सोम दत्त शर्मा कर रहे थे. उनका कहना था कि भारत का कोई भी कानून यह नहीं कहता है कि भगवा टीम से जुड़े लोग तमाम तरह के नियम-कानून से ऊपर हैं. उन्होंने बताया, 'भगवा झंडे के साथ मौजूद लोग इस संबंध में फैसला लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं कि कौन दोषी है और कौन नहीं है.'

उनका यह भी कहना था कि जल्द ही देशभर में प्रदर्शन कर उन वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी, जिन्होंने न सिर्फ कठुआ रेप कांड में बलात्कार और हत्या मामले के अभियुक्त को बचाने की कोशिश की, बल्कि रेप और हत्या की शिकार बच्ची के पक्ष में मुकदमा लड़ रही वकील को भी धमकाने से बाज नहीं आए. उनके मुताबिक, अपने पेशे को शर्मसार करने वाली हरकत के तहत इन वकीलों ने पुलिस को भी चार्जशीट दायर करने से रोकने की कोशिश की.

वकीलों के इस जुलूस में शामिल हुईं महिला वकील शालू निगम का कहना था कि उन्हें यह जानकर सदमा लगा है कि रेप और हत्या की शिकार बच्ची का केस लड़ रही वकील को उनके सहकर्मी और वकील डराने-धमकाने के अलावा कई और अन्य तरीकों से परेशान कर रहे हैं. निगम ने कहा, 'एक निश्चित धार्मिक समुदाय से ताल्लुक रखने का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरे के अधिकारों पर चोट करें.' एक अहम घटनाक्रम के तहत इस सिलसिले में जम्मू-कश्मीर के बार काउंसिल को भी जमकर फटकार लगाई गई. बच्ची के साथ रेप और उसके बाद हुई हत्या मामले में कथित तौर पर अभियुक्तों के समर्थन में खड़े होने को लेकर जम्मू-कश्मीर बार काउंसिल की कड़ी आलोचना की गई.

कठुआ रेप की पीड़िता की वकील दीपिका राजावत. (फोटो- पीटीआई)

कठुआ रेप की पीड़िता की वकील दीपिका राजावत. (फोटो- पीटीआई)

सोमदत्त शर्मा ने बताया, 'बार एसोसिएशंस के खिलाफ काउंसिल को तुरंत हरकत में आना चाहिए था और इस तरह की हरकत करने वाले बार एसोसिएशंस के सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए थी. हालांकि, ऐसा लगता है कि बार एसोसिएशंस की उद्दंड वकीलों के साथ सांठगांठ है.'

एक और वकील नंदिता राव का कहना था कि प्रोफेशनल मूल्यों का उल्लंघन दरअसल जानबूझकर किया गया. उनके मुताबिक, यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद तमाम जगहों पर सांप्रदायिकता भरा संदेश फैलाना है.

उन्होंने कहा, 'इन वकीलों को बखूबी यह पता है कि किसी भी कानूनी समस्या के लिए हमेशा कानूनी उपाय होता है. अगर इन प्रदर्शनकारी वकीलों को ऐसा लग रहा था कि रेप और हत्या मामले के इन आरोपियों को गलत तरीके से अभियुक्त बनाया जा रहा है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते थे. ऐसा करने के बजाय उन्होंने बंद का आयोजन किया और पीड़िता की तरफ से मुकदमा लड़ रही वकील को धमकी दी. दरअसल, उन्होंने इसके जरिये धमकीभरा संदेश दिया है. वे यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके समुदाय के लोगों को अभियुक्त नहीं बनाया जा सकता.'

वकीलों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सौंपा ज्ञापन

बहरहाल, देश की राजधानी में मौजूद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के दफ्तर के पास जब जुलूस खत्म हुआ, तो पाया गया कि गेट अंदर से बंद कर दिए गए थे. साथ ही, वहां पर बड़ी संख्या में पुलिस मौजूद थी. इसके अलावा, बैरिकेडिंग भी की गई थी.

इस जुलूस में शामिल वकीलों का एक समूह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के भीतर गया. इन वकीलों की तरफ से प्रोफेशनल मूल्यों के उल्लंघन के मामले में जम्मू के वकीलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग संबंधी ज्ञापन सौंपा गया. वकीलों के समूह ने जम्मू बार एसोसिएशन से जुड़े और अन्य वकीलों के एक तबके द्वारा आचार संहिता के कथित उल्लंघन संबंधी सूची भी सौंपी. इसमें बताया गया कि पुलिस को अदालत के पीठासीन अधिकारी के आवास पर चार्जशीट दायर करना पड़ी. वकीलों की तरफ से पेश की गई जानकारी के मुताबिक दरअसल, वकीलों ने उन्हें चार्जशीट दायर करने से रोका था, जिसके बाद पुलिस को यह फैसला लेना पड़ा.

इसमें आगे कहा गया कि जम्मू-हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने स्थानीय बार एसोसिएशन के साथ मिलकर जम्मू बंद का आयोजन किया और पुलिस पर हिंदू डोगरा समुदाय को परेशान करने का आरोप लगाया. इसके अलावा, वकीलों ने इस मुकदमे को सीबीआई को ट्रांसफर करने की भी मांग की. बच्ची के साथ रेप और बाद में उसकी हत्या के मामले में जम्मू क्षेत्र के वकीलों के रवैये के खिलाफ देश की राजधानी में जुलूस निकालने वाले इन वकीलों का कहना था कि जम्मू बंद के दौरान अभियुक्तों का समर्थन करते हुए तिरंगे का भी इस्तेमाल किया गया. ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सांप्रदायिक मांगों के आधार पर बंद का आह्वान करना वकीलों का काम नहीं है.

ज्ञापन में प्रोफेशनल मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आरोप लगाया गया है कि जम्मू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बी एस सलाथिया ने भी पीड़िता की वकील दीपिका सिंह राजावत को यह केस नहीं लड़ने के लिए बार-बार धमकी दी.

कठुआ जिले की हीरानगर तहसील के रसाना गांव में इस साल जनवरी में 8 साल की एक बच्ची को अगवा कर उससे रेप किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. इस बच्ची का शव 17 जनवरी 2018 को बरामद किया गया. इससे करीब एक सप्ताह पहले वह इस इलाके के जंगलों में घोड़ों को चराते हुए गुम हो गई थी.

इस मामले की जांच कर रही जम्मू-पुलिस की अपराध शाखा ने पिछले हफ्ते कठुआ जिले की एक अदालत में 7 लोगों के खिलाफ मुख्य चार्जशीट दायर की. इसके अलावा, मामले के एक अन्य अभियुक्त और नाबालिग शख्स के खिलाफ अलग से चार्जशीट दायर की गई.

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