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कठुआ रेप मामला: मंदिर में रेप, भगवान क्या फिर वनवास पर निकल गए!

जांच कौन करेगा और इसके नतीजे क्या निकलेंगे यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन इस बार देवस्थान से वनवास के लिए निकले भगवान शायद कभी ना लौटें

Updated On: Apr 12, 2018 08:37 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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कठुआ रेप मामला: मंदिर में रेप, भगवान क्या फिर वनवास पर निकल गए!

जम्मू कश्मीर के देवस्थान पर 8 साल की बच्ची का रेप होता है. पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, रेप का मुख्य आरोपी पहले 'पूजा आराधना' करता है फिर मंदिर में बच्ची का रेप करता है. यह कुकर्म जितना घिनौना है, उससे घिनौनी इसके पीछे की वजह है.

इस रेप का मास्टरमाइंड सांजी राम रिटायर्ड सेल्स ऑफिसर है. रेप करने वालों में स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) दीपक खजूरिया और सांजी का 15 साल का भतीजा शामिल है. ऐसे मामलों में लोगों की सोच यही होती है कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले लेकिन, यहां ऐसा नहीं है. इन आरोपियों को जब पुलिस गिरफ्तार करती है तो लोग इनके समर्थन में नारे लगाते हैं. सड़कों पर उतरते हैं.

रेप करने पर सजा नहीं रिहाई चाहिए!

इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद लोग इनकी सजा की नहीं, रिहाई की मांग कर रहे हैं. हिंदू एकता मंच के बैनर तले कठुआ में एक प्रदर्शन किया गया. यह प्रदर्शन 8 साल की बच्ची से गैंगरेप के खिलाफ नहीं बल्कि आरोपियों की रिहाई के लिए हुई थी. ये प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय झंडा लेकर नारे लगा रहे थे. इनकी मांग यही थी कि एसपीओ दीपक खजूरिया को रिहा कर दिया जाए. खजूरिया को 10 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था.

एक बलात्कारी के सपोर्ट में प्रदर्शन! आखिर रेप का यह मामला कैसे अलग है. किसी भी धर्म के नाम पर रेप करना और उसे सही साबित ठहराना उस धर्म की सबसे बड़ी नाकामी है. और यह नाकामी इस बार हिंदू धर्म के हिस्से में आई है.

Protest in Kolkata

मुस्लिम गुर्जर-बकरवाल कम्युनिटी की 8 साल की बच्ची को अगवा करके एक मंदिर में रखा जाता है. बच्ची की गलती महज इतनी थी कि वह अल्पसंख्यक समुदाय की थी. जिस साजिश के तहत इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया है, वह रूह कंपा देने वाला है.

एक रिटायर्ड सेल्स ऑफिसर, एक पुलिस वाला और 15 साल का एक युवक मिलकर 8 साल की बच्ची से 7 दिनों तक मंदिर में रेप करते रहे. 12 जनवरी को उस बच्ची को अगवा किया गया था. 17 जनवरी को उस बच्ची का शव मिला. शुरुआती जांच में पता चला कि 15 साल का एक लड़का इस मामले में शामिल है.यह युवक सांझी का भतीजा है, जिसे इसी काम के लिए मेरठ से बुलाया गया था.

हैरान करने वाली बात है कि अपना नाम आने से पहले खजूरिया भी इस जांच टीम का हिस्सा थे. जांच में कोताही के आरोप लगने के बाद यह मामला जम्मू-कश्मीर की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. एक एसआईटी गठित हुई, जिसमें पता चला कि इसमें खजूरिया भी शामिल हैं. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई, जो हिंदू एकता मंच को रास नहीं आई.

मंदिर में रेप करने की कोई साफ वजह का पता नहीं चल पाया है. धर्म की आड़ में रेप करने वाले ये लोग मानसिक तौर पर विकृत हैं. इन्हें धर्म से नहीं धर्मांधता से प्यार है. ईश्वर है या नहीं, इसपर बहस हो सकती है. लेकिन 8 साल की बच्ची के साथ जो इनलोगों ने किया है उसे देखकर यह तो तय है कि जम्मू कश्मीर के उस देवस्थान पर ईश्वर तो नहीं है.

नेताओं का क्या धर्म है?

शायद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी रेप के मामले को कम्युनल शक्ल दी गई है. इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो गई है. लेकिन जम्मू बार एसोसिएशन लगातार यह दबाव बना रहा है कि इस मामले में किसी केंद्रीय एजेंसी से जांच करानी चाहिए. राज्य सरकार इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, उसके बाद सीबीआई जांच की क्या वजह है आप बेहतर समझ सकते हैं. अब इस मामले में नया मोड़ आया है. हिंदू एकता मंच और पीड़ित का परिवार दोनों सीबीआई जांच की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए हैं. बात यहीं खत्म नहीं होती. केंद्र सरकार के एक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी 22 फरवरी को कहा था कि अगर लोगों को राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं है तो यह मामला सीबीआई को सौंप देना चाहिए. यानी पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों को अब सिर्फ सीबीआई पर ही भरोसा है.

दूसरी तरफ पीड़ित परिवार का केस लड़ रही वकील दीपिका पर बार एसोसिएशन का लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है.

दीपिका गुप्ता का कहना है कि उन्हें ये केस लड़ने पर लगातार धमकियां मिल रही हैं. आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका ने आऱोप लगाया है कि बार एसोसिएशन के वकीलों ने उनके अटेंडेंट से कहा है कि वे दीपिका को पानी भी न पीने दे.

राज्य में पीडीपी और बीजेपी दोनों की मिलीजुली सरकार है. दिलचस्प है कि बीजेपी भी सीबीआई जांच की मांग को सपोर्ट कर रही है. राज्य में बीजेपी के दो वरिष्ठ मंत्री लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा रेप आरोपी के समर्थन में 1 मार्च को हिंदू एकता मंच की रैली में भी शामिल हुए. वहीं दूसरी तरफ पीडीपी की सीएम महबूबा मुफ्ती आरोपियों की रिहाई को लेकर हो रहे प्रदर्शन को गलत करार दे रही हैं. यानी मिलीजुली सरकार का एक धड़ा आरोपियों के पक्ष में है तो दूसरा धड़ा पीड़ित परिवार के पक्ष में. जांच कौन करेगा और इसके नतीजे क्या निकलेंगे यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन इस बार देवस्थान से वनवास के लिए निकले भगवान शायद कभी ना लौटें.

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