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सुरक्षा हटने के बाद अगर अलगाववादियों पर हमले हुए तो और घिर सकती है सरकार

सेंट्रल युनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में प्रोफेसर नूर बाबा कहते हैं कि ऐसी स्थिति में अगर कोई बड़ी दुर्घटना घटित होती है तो इसके लिए सरकार पर ही दोष मढ़ा जाएगा.

Updated On: Feb 18, 2019 05:37 PM IST

FP Staff

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सुरक्षा हटने के बाद अगर अलगाववादियों पर हमले हुए तो और घिर सकती है सरकार

14 फरवरी को सीआरपीएफ के जवानों पर पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर सरकार ने कश्मीर के बड़े अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है. इन नेताओं में हुर्रियत के उदारवादी धड़े के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक भी शामिल हैं.

ये आदेश गृहमंत्री राजनाथ सिंह की श्रीनगर यात्रा के बाद आया. एक कड़ा संदेश देने की इच्छा से सरकार ने ये निर्णय लिया है कि भारतीय करदाताओं के पैसे उन्हें सुरक्षा नहीं दी जाएगी जो पाकिस्तान से पैसे लेते हैं.

राजनाथ सिंह के दौरे के दो दिन बाद रविवार को गवर्नर सत्यपाल मलिक ने अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटाए जाने का आदेश दिया. इसके अलावा उनकी दूसरी सुविधाएं भी छीन ली गई हैं जो सरकार उन्हें देती है.

दिलचस्प बात ये है कि हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े, जिसके नेता पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर को मिलाए जाने की बात करते हैं, के किसी भी नेता की सुरक्षा व्यवस्था नहीं हटाई गई हैं.

सरकार की तरफ से दिए आदेश में कहा गया है, ' हालिया हमले के मद्देनजर पुलिस संसाधनों केइस्तेमाल पर तत्काल रिव्यू किया गया है. अलगाववादियों और उनके समर्थकों को सरकार की तरफ से कोई सुरक्षा नहीं दी जाएगी.'

हालांकि सरकार की तरफ से लिया गया ये निर्णय सांकेतिक ज्यादा है इसका कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ने वाला है. गौरतलब है कि जैसे ही सरकार की तरफ ये आदेश आया था उसके बाद हुर्रियत नेता अब्दुल गनी भट्ट की तरफ से कहा गया कि उन्हें इसकी जरूरत भी नहीं थी.

सुरक्षा व्यवस्था हटाए जाने पर मीरवाइज उमर फारूक ने भी कहा है कि हमने कभी सरकार सुरक्षा नहीं मांगी थी. उन्होंने ये भी कहा कि इन सब कदमों से कश्मीर की समस्या का समाधान नहीं होने वाला.

हालांकि यह भी आशंका जताई जा रही है कि अलगाववादी नेताओं से सुरक्षा कवर हटाए जाने के बाद अगर उन पर किसी तरह का कोई हमला होता है तो स्थितियां और भी भयावह हो सकती हैं. इससे पहले कश्मीर में दो बड़े अलगाववादी नेताओं की हत्या को लेकर राज्य में बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हुए थे. ये दो बड़े नेता थे मीर वाइज उमर फारूक के पिता मोहम्मद फारूक और बिलाल लोन के पिता अब्दुल गनी लोन.

सेंट्रल युनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में प्रोफेसर नूर बाबा कहते हैं कि ऐसी स्थिति में अगर कोई बड़ी दुर्घटना घटित होती है तो इसके लिए सरकार पर ही दोष मढ़ा जाएगा.

वो कहते हैं कि आम चुनावों से पहले इन नेताओं की सुरक्षा हटाना बीजेपी को वोट के रूप में फायदा तो पहुंचा सकता है लेकिन किसी अनहोनी की स्थिति में ये बैकफायर भी कर सकता है. प्रोफेसर नूर बाबा की बातों की तस्दीक एक कश्मीरी पुलिस अधिकारी भी करते हैं. उनका मानना है कि ये निर्णय एक दोधारी तलवार की तरह है.

(समीर यासिर की स्टोरी से इनपुट के साथ.)

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