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जम्मू-कश्मीर: 'युवाओं के आतंकवादी बनने की वजह सरकार है'

सुरक्षा बलों की सख्ती और लगातार कामयाबी के बावजूद कश्मीर के लोग मानते हैं कि आतंकवाद का ये कोई हल नहीं है

Umar Manzoor​ Shah Updated On: Sep 04, 2017 03:13 PM IST

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जम्मू-कश्मीर: 'युवाओं के आतंकवादी बनने की वजह सरकार है'

केंद्र सरकार की तरफ से लगातार बयान आ रहे हैं कि कश्मीर में आतंकवाद के दिन अब गिनती के ही बचे हैं. लेकिन कश्मीर के लोग इस दावे से इत्तिफाक नहीं रखते. लोगों का मानना है कि सिर्फ आतंकियों को मारने से कश्मीर मसले का हल नहीं होगा. जब तक बुनियादी मुद्दे का हल नहीं निकाला जाता, आतंकवाद का खात्मा नहीं किया जा सकता. कश्मीरी कहते हैं कि आतंकवादी बंदूक क्यों उठा रहे हैं, हमें उस वजह को खत्म करना होगा.

जुलाई में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि आतंकवाद के दिन अब गिनती के ही बचे हैं. सरकार कश्मीर को हिंसा से मुक्त कराने के लिए वचनबद्ध है.

साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल के मुताबिक साल 2016 में 165 आतंकवादी मारे गए थे. वहीं इस साल आठ महीनों में ही 135 आतंकवादी मारे जा चुके हैं.

दक्षिणी कश्मीर में तैनात एक पुलिस अफसर ने कहा कि इस साल कई बड़े आतंकवादी मारे गए हैं. इनमें लश्कर-ए-तैयबा का अबु दुजाना, हिज्बुल मुजाहिदीन के रियाज नायकू और सब्जार बट शामिल हैं. सुरक्षा बलों के हाथों कम से कम 14 आतंकी कमांडर मारे गए हैं. इस पुलिस अफसर का कहना था कि अब गिनती के ही आतंकवादी बचे हैं. जल्द ही उनका भी सफाया कर दिया जाएगा.

आतंकियों के गढ़ माने जाने वाले इलाकों के लोग कहते हैं कि सुरक्षा बल उनके इलाकों की लगातार तलाशी लेते रहते हैं. ये तो अब रोज की बात हो गई है. दक्षिणी कश्मीर के त्राल के रहने वाले मोहम्मद अशरफ कहते हैं कि यहां तो रोजाना ही आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ होती रही है. त्राल को आतंकियों का गढ़ माना जाता है. अशरफ का कहना है कि ऐसा लगता है कि सुरक्षा बलों को कहा गया है कि एक-एक आतंकवादी को चुन-चुन कर मारो.

बीमारी का जड़ से खात्मा जरूरी है

सुरक्षा बलों की सख्ती और लगातार कामयाबी के बावजूद कश्मीर के लोग मानते हैं कि आतंकवाद का ये कोई हल नहीं है. अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारुक ने हाल ही में कहा था कि एक आतंकवादी मारा जाता है तो उसकी जगह दस खड़े हो जाएंगे.

मीरवाइज ने कहा कि अगर सभी आतंकवादी मारे जाते हैं, तो भी लोगों में इतनी नाराजगी है कि वो बंदूक लेकर खड़े हो जाएंगे. मीरवाइज के मुताबिक कश्मीरी युवा हर तरफ हो रहे जुल्मो-सितम से परेशान होकर बंदूक उठा रहे हैं. उमर फारुक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में गरीबी, सुरक्षा बलों की मौजूदगी और हर बात पर शक किए जाने की वजह से युवा बहुत परेशान हैं.

पूर्व आतंकवादी आजम इंकलाबी का कहना है हम तो पिछले 28 साल से ये सुनते आए हैं कि जल्द ही आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा. आजम का कहना है कि कश्मीर समस्या इतने दिनों से अनसुलझी है, ये बात राज्य के युवाओं को बहुत परेशान करती है.

 

Indian army soldiers patrol inside their army base after it was attacked by suspected separatist militants in Panzgam in Kashmir's Kupwara district

कश्मीर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाली शेख शौकत हुसैन कहती हैं कि आतंकवाद के जल्द खात्मे के बयान पहले भी दिए जाते रहे हैं. मगर असल में कोई खास बदलाव नहीं हुआ. शौकत हुसैन कहती हैं कि कश्मीर में आतंकवाद इसलिए है क्योंकि इसके पीछे ये अनसुलझा विवाद है. जब तक कश्मीर मसले का हल नहीं होता, आतंकवाद का खात्मा नहीं हो सकता.

श्रीनगर के पुराने इलाके में रहने वाले एक पूर्व आतंकवादी ने कहा कि आतंकवाद कश्मीर का अटूट हिस्सा बन गया है. कश्मीर से आतंकवाद के खात्मे के लिए इस समस्या को जड़ से खत्म करना होगा. इस पूर्व आतंकवादी ने माना कि आज घाटी में सक्रिय आतंकियों की तादाद काफी कम रह गई है. 90 के दशक में ये संख्या बहुत ज्यादा थी. उसका कहना है कि अगर आज हथियार और गोला-बारूद आसानी से उपलब्ध होते तो और युवा आतंकवाद का दामन थाम लेते.

कश्मीर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हमीदा नईम कहती हैं कि युवाओं के आतंकवादी बनने की वजह सरकार है. हमीदा के मुताबिक ज्यादातर कश्मीरी हिंसा के समर्थक नहीं हैं. मगर सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी और सरकार का सैन्य समाधान पर जोर, युवाओं के आतंकवादी बनने की सबसे बड़ी वजह है.

हमीदा कहती हैं कि सरकार की नीति की वजह से ही कश्मीर में आतंकवाद ने जड़ें जमाई हैं. जब तक कश्मीर समस्या का हल नहीं होता, आतंकवाद का पूरी तरह से खात्मा नामुमकिन है.

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