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डर के साये में जी रहा है कैसर का परिवार जिसपर सीआरपीएफ के ड्राइवर ने जीप चढ़ा दी थी

श्रीनगर के युवक कैसर अहमद की मौत को लेकर अपने ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज होने पर सीआरपीएफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है

Updated On: Jun 05, 2018 09:30 AM IST

Ishfaq Naseem

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डर के साये में जी रहा है कैसर का परिवार जिसपर सीआरपीएफ के ड्राइवर ने जीप चढ़ा दी थी

श्रीनगर के युवक कैसर अहमद की मौत को लेकर अपने ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज होने पर सीआरपीएफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. सीआरपीएफ ने कहा है कि उसके ड्राइवर पर लगे आरोप निराधार हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कैसर अहमद की मौत के मामले में सीआरपीएफ की गाड़ी चला रहे ड्राइवर पर खतरनाक और लापरवाही से गाड़ी चलाने का केस दर्ज किया है.

कैसर अहमद की मौत शुक्रवार को सीआरपीएफ की गाड़ी के नीचे आ जाने से हुई थी. ये घटना कश्मीर की सबसे बड़ी जामिया मस्जिद के बाहर हुई थी. कैसर अहमद नमाज पढ़ने के बाद मस्जिद के बाहर आया था. कैसर अहमद के परिवार ने मांग की है कि सीआरपीएफ के जवान और उस वक्त गाड़ी में बैठे सीनियर अफसर के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया जाए.

घटना में जख्मी हुए दूसरे युवक मुहम्मद यूनिस बट का श्रीनगर का कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में इलाज चल रहा है. कैसर के परिवार का कहना है कि वो पत्थरबाजी नहीं कर रहा था, बल्कि नमाज के बाद अपनी बाइक से पास ही स्थित मुहल्ले फतेहकदल आ रहा था.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि उसने रणबीर पीनल कोड (RPC) की धारा 304-A के तहत सीआरपीएफ के ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से हुई मौत का केस दर्ज किया है. वहीं, सीआरपीएफ की गाड़ी पर पत्थर चला रहे युवकों पर आरपीसी की धारा 307 के तहत हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज किया गया है.

Jammu-Kashmir Stone Pelting

जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसपी सज्जाद अहमद ने कहा कि, 'हम ड्राइवर की गिरफ्तारी कोशिश करेंगे. हम सारी औपचारिकताएं पूरी करेंगे और युवक की मौत से जुड़े सारे दस्तावेज जुटाकर बयान दर्ज करेंगे. जब गाड़ी की पहचान हो जाएगी, तो उसे जब्त किया जाएगा और ड्राइवर की गिरफ्तारी की जाएगी'. सज्जाद अहमद ने कहा कि सीआरपीएफ की गाड़ी को युवाओं ने नौहट्टा इलाके में स्थित शम्पोरा चौक पर रोका गया था. ये वही जगह है जहां कैसर अहमद की मौत हुई थी. एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पहले लापरवाही से गाड़ी चलाने से लगी चोट की मौत का केस ही दर्ज किया गया था. इस धारा के तहत पुलिस ड्राइवर को जमानत पर रिहा कर सकती है, अगर ड्राइवर लिखित भरोसा दे कि वो तफ्तीश के लिए पुलिस के बुलाने पर हमेशा हाजिर होगा.

लेकिन, सीआरपीएफ के प्रवक्ता संजय शर्मा ने ड्राइवर के खिलाफ दर्ज केस को निराधार बताते हुए कहा कि, 'उस वक्त जो हालात थे उसमें गाड़ी रेंगने की सूरत में भी नहीं थी.

हमारे अधिकारी और जवानों ने किसी तरह जान बचाकर भागने में कामयाबी हासिल की, वरना पत्थरबाज उन्हें पीट-पीटकर मार डालते'. संजय शर्मा ने कहा कि सीआरपीएफ की गाड़ी में 28वीं बटालियन के सेकेंड इन कमांड अधिकारी के साथ 4 और जवान सवार थे.

शर्मा ने कहा, 'वो चारों जवान अधिकारी की सुरक्षा में तैनात थे. सीआरपीएफ के अधिकारी उस वक्त ड्यूटी पर थे और भीड़ को सीआरपीएफ की गाड़ी को घेरने की कोई जरूरत नहीं थी. भीड़ किसी कमजोर को निशाना बनाना चाह रही थी. सीआरपीएफ का अधिकारी वहां पिकनिक मनाने नहीं गया था. वो वहां पर जवानों की तैनाती का मुआयना करने गया था'.

संजय शर्मा ने कहा कि अगर पुलिस ड्राइवर को गिरफ्तार करती है, तो सीआरपीएफ इसका विरोध करेगी. हालांकि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि वो सीआरपीएफ के ड्राइवर को गिरफ्तार करेगी. लेकिन अलगाववादियों और कैसर अहमद के परिवार ने पुलिस पर मामले को 'रफा-दफा करने' का आरोप लगाया है. अलगाववादियों के साझा विरोधी नेतृत्व ने कहा है कि पुलिस ने सीआरपीएफ की गाड़ी चलाने वाले पर केवल लापरवाही से गाड़ी चलाने का केस दर्ज किया है, जबकि ये तो कत्ल का सीधा सा मामला है. अलगाववादियों ने एक बयान में कहा, ' सुरक्षा बल कश्मीरियों को या तो गोली से मार रहे हैं, पैलेट गन से मार रहे हैं और अब वो कश्मीरियों को गाड़ी से कुचलकर मार रहे हैं'.

कैसर अहमद के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके जनाजे को श्रीनगर के फतेहकदल इलाके से ईदगाह की तरफ जाने से भी रोका था, जहां उसे दफनाया गया था. अशरफ के चचेरे भाई सुहीन अशरफ ने कहा कि, 'पुलिस ने जनाजे में शामिल लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसकी वजह से कई लोग घायल हो गए'.

सुहीम ने मांग की कि 'सीआरपीएफ के जवानों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हो'. उसने कहा कि कैसर अहमद के शव को गाड़ी में रखकर कब्रिस्तान तक ले जाना पड़ा. पुलिस की ज्यादती की वजह से बहुत से लोग नमाज-ए-जनाजा में भी शामिल नहीं हो सके. कैसर अहमद की दो बहने हैं. उनमें से एक कानून की पढ़ाई कर रही है. वहीं दूसरी बहन 11वीं क्लास में पढ़ रही है. कैसर अहमद के मां-बाप की कई साल पहले मौत हो गई थी.

अहमद के परिवार के कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें डर है कि अगर वो इंसाफ की मांग करते रहे, तो उन्हें इसका बुरा अंजाम भुगतना पड़ सकता है. कैसर के चचेरे भाई सुहीम ने कहा कि ड्राइवर ने बिना किसी अफसोस के उसके भाई पर गाड़ी चढ़ा दी थी. जिसके बाद उसे कुछ युवा पास के अस्पताल में ले कर गए. लेकिन कैसर की हालत बिगड़ती गई, जिस पर उसे बेहतर इलाज के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया. वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.कैसर के सीआरपीएफ की गाड़ी के नीचे दबे होने की तस्वीरें घाटी में वायरल हो गई हैं. जिसकी वजह से सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसके अलावा लोग सोशल मीडिया पर भी अपना गुस्सा निकाल रहे हैं और पुलिस पर सीआरपीएफ के प्रति 'नरमी बरतने' का आरोप लगा रहे हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे तमाम मामलों में सुरक्षा बल आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) का सहारा लेकर स्थानीय अदालतों में आपराधिक मामले नहीं चलने देते.

मानवाधिकार कार्यकर्ता एहसान उन्टू ने कहा कि, 'पुलिस सेना और सीआरपीएफ के जवानों पर इस कदर नरमी बरतती है कि एक कश्मीरी युवक को जीप के बोनट पर बांधने वाले मेजर लितुल गोगोई को तो गिरफ्तार भी नहीं किया गया था'.

जामिया मस्जिद के बाहर सुरक्षा बलों और युवकों में अक्सर झड़पें होती रहती हैं. दो हफ्ते पहले मस्जिद के बाहर भारत विरोधी और आजादी के नारे लगा रहे युवकों पर सुरक्षा बलों ने पैलेट दागी थीं और आंसू गैस के गोले फेंके थे. इस घटना में भी कई युवक घायल हो गए थे.

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