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कश्मीर में बसाए जा रहे हैं रोहिंग्या मुसलमान: बीजेपी

विधायकों की मांग है कि राज्य सरकार को इस पर विचार होना चाहिए

Updated On: Dec 28, 2016 05:45 PM IST

Ishfaq Naseem

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कश्मीर में बसाए जा रहे हैं रोहिंग्या मुसलमान: बीजेपी

कश्मीर घाटी में पश्चिमी पाकिस्तान के हिंदू शरणार्थियों को पहचान पत्र जारी करने पर हो रहे बवाल के बाद भाजपा के विधायकों ने अपनी ही सरकार पर रोहिंग्या मुस्लिमों को राज्य में बसाये जाने पर सवाल उठाए हैं.

उनके अनुसार, तकरीबन 6,000 से ज्यादा रोहिंग्या मुस्लिमों को जम्मू में बसाए जाने के मामले में सरकार द्वारा लापरवाही बरती गई है. मुस्लिमों को हिंदू बहुल आबादी क्षेत्र में बसाया गया और सरकार ने वर्क परमिट जारी करके उन्हें विभिन्न नौकरी करने की आजादी भी दी.

भाजपा सदस्यों ने राज्य सरकार से बांग्लादेशी मुस्लिमों के राज्य में गैरकानूनी रूप से बसने पर भी लगाम कसने की मांग की है.

12,000 हजार से अधिक रोहिंग्या मुस्लिम झुग्गियों में बसे हैं

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से करीब 6,000 से ज्यादा रोहिंग्या मुस्लिम जम्मू शहर, जो हिंदू बाहुल्य क्षेत्र है, के अलग-अलग हिस्सों में पिछले 6 सालों से रह रहे हैं. बर्मा से शरणार्थियों के लगभग 1200 परिवार, जिनमें 6,000 से ज्यादा लोग हैं, जम्मू के नरवाल जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बसे हुए हैं.

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जम्मू रेंज के आईजी दानिश राना के अनुसार, इन रोहिंग्या मुस्लिमों को सरकार ने वर्क परमिट दिया है और वे गैरकानूनी तरीके से यहां नहीं रह रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘इनकी संख्या 6,000 से ज्यादा है और ये कानूनन यहां रह रहे हैं. इन्हें भारत सरकार से वर्क परमिट मिला हुआ है. ये वो रोहिंग्या मुस्लिम हैं जो बर्मा में बौद्ध आबादी से मतभेद के बाद यहां आ कर बसे हैं.’

उनके अनुसार ये लोग 6 साल पहले यहां आकर बसना शुरू हुए थे और वक्त के साथ-साथ इनकी संख्या में इजाफा हुआ है. वह बताते हैं, ‘ये लोग यहां कोई भी छोटा-मोटा काम करते हैं. पेट पालने के लिए कभी कूड़ा बीनते हैं तो कभी इन्हें भीख मांगते हुए भी देखा जा सकता है.’

सरकार को पॉलिसी बनानी चाहिए

भाजपा विधायकों की मांग है कि राज्य सरकार को इस पर पॉलिसी बनानी चाहिए कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिम राज्य में रह सकते हैं या नहीं. नौशेरा से भाजपा के विधायक रविंदर रैना का कहना है कि 2 जनवरी से जम्मू में शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में यह मुद्दा उठाया जाएगा.

उनका कहना है, ‘सरकार को रोहिंग्या मुस्लिमों के मामले पर पॉलिसी बनानी चाहिए. यह बहुत गंभीर मसला है. सरकार को पता होना चाहिए कि वे यहां कैसे आए हैं. वे यहां गैरकानूनी रूप से रह रहे हैं और इससे राज्य की सुरक्षा को खतरा हो सकता है. हम चाहते हैं कि सरकार इस पर गंभीरता से सोचे और अपना रुख साफ करे.’

रामनगर से भाजपा के विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने भी कहा कि गैरकानूनी रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों से कड़ाई से पेश आना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘जो भी विदेशी नागरिक अवैध तरीके से यहां रह रहे हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.’

यह पुलिस भी मानती है कि कई बांग्लादेशी नागरिक यहां अवैध रूप से रह रहे हैं. आईजी राना बताते हैं, ‘यहां कई ऐसे भी हैं जो गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं. बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके ट्रेवल डॉक्यूमेंट के अनुसार उनके कानूनी तौर पर यहां रहने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है पर वे यहीं हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो अवैध रूप से सीमा पार करके यहां पहुंचे हैं.’

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, बहुत से बांग्लादेशी नागरिक अपनी पहचान छिपाकर यहां आते हैं इसलिए राज्य में बसे बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या के बारे में कोई ठीक रिकॉर्ड नहीं है.

सरकार सद्भाव बनाए रखना चाहती है

रविंदर रैना की मांग है कि राज्य में रह रहे ऐसे शरणार्थियों की गिनती करवाई जाए. जहां एक ओर भाजपा विधायक राज्य में इन शरणार्थियों के रहने पर पॉलिसी बनाने की अपनी मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने म्यांमार की सरकार को राखिन प्रान्त में सांप्रदायिक सद्भाव बनाये रखने की सलाह दी है.

गौरतलब है कि राखिन म्यांमार का वही क्षेत्र है जहां अक्सर बौद्धों और रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच लगातार टकराव होते रहते हैं. एक सरकारी दस्तावेज के अनुसार, ‘भारत सरकार ने म्यांमार के राखिन क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव बनाये रखने को लेकर म्यांमार की सरकार से बात की है.’

वैसे अगर सरकारी आंकड़े देखें जाएं तो पता लगता है कि भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा जम्मू कश्मीर से डिपोर्ट यानी वापस भेजे गए विदेशी नागरिकों की संख्या बहुत कम है. दिल्ली से साल 2009 में 1,645, साल 2010 में 989 और 2011 में 161 विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया वहीं जम्मू कश्मीर में यह संख्या महज़ 2-3 की ही रही.

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