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कर्नाटक: करोड़ों की शादी में उलझे सियासी समीकरण

यहां तक कि येदुरप्पा भ्रष्टाचार के फंदे में भी फंस गए, जेल चले गए और सीएम की कुर्सी छिनी, सो अलग.

Updated On: Nov 25, 2016 04:42 PM IST

T S Sudhir

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कर्नाटक: करोड़ों की शादी में उलझे सियासी समीकरण

15 नवंबर की शाम कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष बीएस येदुरप्पा उस जगह पर पहुंचे जहां जनार्दन रेड्डी की बेटी की शादी होनी थी. शादी अगली सुबह थी. इसी दिन संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होना था. सबने सोचा कि येदुरप्पा शिष्टाचार के नाते दुल्हन और दुल्हे को आशीर्वाद देने आए हैं और लगे हाथ रेड्डी से यह भी कह देंगे कि शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि दिल्ली में मौजूद रहना होगा.

लेकिन अगले दिन सवेरे शादी के वक्त वह वहां पहुंच गए. इससे हर कोई हैरान था. नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन में लगे लोगों में नाराजगी थी. ऐसे मौके पर हर कोई दौलत जनार्दन रेड्डी के इस दौलत के नंगे नाच के खिलाफ था. लोग इस शादी को निजी दौलत का भद्दा प्रदर्शन मान रहे थे.

रेड्डी ने बेंगलुरू के पैलेस ग्राउंड को हूबहू विजयनगर साम्राज्य के राज्य में तब्दील कर दिया और पैसा पानी की तरह बहाया गया. अनुमान है इस शादी 150 से 500 करोड़ रुपए खर्च हुए होंगे.

क्यों पहुंचे शादी में

येदुरप्पा के दिमाग में क्या चल रहा था? क्या इसका यह मतलब है कि उनके नेतृत्व में कर्नाटक बीजेपी एक बार फिर पार्टी से निकाले गए रेड्डी के साथ रिश्ते सुधारना चाह रही है?

वैसे वहां एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर और साथ ही भाजपा सांसद शोभा करंडलाजे भी मौजूद थीं. क्या इसका यह मतलब है कि रेड्डी को राज्य बीजेपी नेतृत्व का भरपूर समर्थन प्राप्त है?

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लेकिन क्या यह इतना आसान है?  उसूल की बात करें तो गैरकानूनी तरीके से खनन करने वाले की पार्टी में कोई जगह नहीं होनी चाहिए. जनार्दन रेड्डी ने कर्नाटक में अवैध खनन से अकूत दौलत कमाई है. लेकिन कर्नाटक की सियासत इतनी पेचीदा है कि जो दिख रहा हो, जरूरी नहीं कि वह वही हो.

येदुरप्पा ने शादी में शामिल होने और फोटो खिंचाने के लिए जो कारण गिनाए उनमें से एक था कि वह रेड्डी बंधुओं को लगभग दो दशक से जानते हैं. उस समय से जब उनकी बेटी ब्राह्मणी पैदा हुई थी. इससे भी अहम बात यह है कि येदुरप्पा कभी नहीं भूल सकते है कि 2008 में कर्नाटक विधानसभा में उनकी सरकार को विश्वासमत जीतने में रेड्डी भाइयों ने कितनी मदद की थी.

ऑपरेशन कमल को रेड्डी भाइयों का समर्थन प्राप्त था.

हालांकि रेड्डी ने राजसी वैभव के साथ की गई इस शादी के मौके को राजनीतिक बयान देने के लिए इस्तेमाल किया कि वह वापस आ गए हैं, लेकिन शायद बीजेपी उन्हें अभी लेने के लिए तैयार नहीं है. भगवा पार्टी के लिए दुविधा की स्थिति है.

कथनी और करनी

अगर रेड्डी को भाजपा में शामिल करके कर्नाटक में चर्चित नेताओं में जगह दे दी जाती है तो इससे कांग्रेस को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल जाएगा और भाजपा पूरे देश में नैतिकता का दम नहीं भर पाएगी. भाजपा जिस तरह की राजनीति करने की कोशिश कर रही है उस पर यह एक बदनुमा दाग होगा.

राजनीतिक विश्लेषक सुगाता राजू का कहना है, ‘बीजेपी ज्यादातर मुद्दों पर हमेशा नैतिकता की दुहाई देती है. चाल चरित्र उनकी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है. यहां तक कि नोटबंदी के मुद्दे पर ही देख लीजिए, यहां भी वे वही तर्क दे रहे हैं.’

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लेकिन पूरी तरह रिश्ते खत्म कर देने के साथ भी चुनौतियां जुड़ी होती हैं. येदुरप्पा जमीनी हालात को अच्छी जानते हैं कि लिंगायत वोट और सिद्घरमैया के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी उन्हें शायद सरकार बनाने के लिए जरूरी 113 के जादुई आंकड़े के पास न ले जाए.

वह जानते हैं कि जब 2008 में उनकी लोकप्रियता चरम पर थी तब भी वो बहुमत से थोड़ा सा पीछे रह गए थे और उन्हें निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनानी पड़ी थी. येदुरप्पा जानते हैं कि उन पर लगे इल्जामों के दाग भले ही धुल गए हैं लेकिन कर्नाटक बीजेपी में उनके दुश्मनों की कमी नहीं है, ये लोग येदुरप्पा की लुटिया डूबने पर खुशी मनाएंगे. हो सकता है कि इसी असुरक्षा की वजह से वह रेड्डी के पास बीमा पॉलिसी लेने गए हों.

दिल्ली नाखुश

रेड्डी के नजदीकी साथी और बेल्लारी से सांसद बी श्रीरामुलु वाल्मीकि समुदाय से हैं. मध्य कर्नाटक के इलाके में इस समुदाय की अच्छी खासी मौजूदगी है. येदुरप्पा ओबीसी समुदाय को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करते रहे हैं और वो चाहेंगे कि श्रीरामुलु उनके दायीं तरफ खड़े हों.

हो सकता है कि श्रीरामुलु के साथ कुछ हिसाब-किताब बन जाए. इस तरह जनार्दन रेड्डी के साथ आधिकारिक तौर पर कोई संपर्क नहीं होगा, लेकिन श्रीरामुलु और रेड्डी की निकटता काम आ सकती है.

भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता एसआर हीरेमथ कहते हैं, ‘जनार्दन रेड्डी ने ही इसी महीने बेल्लारी में श्रीरामुलु के महल जैसे घर का उद्घाटन किया है. जहां तक बीजेपी का संबंध है तो पार्टी के भीतर कुछ कशमकश है. लगता है कि पार्टी रेड्डी को एक खनन माफिया डॉन की तरह नहीं देखती.’

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लेकिन बताया जाता है कि दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व रेड्डी के साथ येदुरप्पा की निकटता से खुश नहीं है. यह तो सब जानते हैं कि शादी में हुए खर्च को लेकर विपक्ष ने नोटबंदी के मुद्दे पर बीजेपी पर हमला बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ा. शादी में येदुरप्पा की मौजूदगी से लोगों की यही धारणा मजबूत हुई कि बीजेपी की कथनी और करनी एक जैसी नहीं हैं. क्योंकि जहां गरीब आदमी अपने ही बैंक खाते से महज दो हजार रुपए निकालने के लिए इतनी मुसीबतें झेल रहा है, वहीं अमीर लोगों पर नोटबंदी का जरा फर्क नहीं पड़ा है.

येदुरप्पा को याद नहीं जब

शादी में कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्रियों जी परमेश्वरा और डीके शिवकुमार की मौजूदगी कहीं न कहीं इशारा कर रही थी कि अगर बीजेपी रेड्डी को साथ नहीं लेना चाहती है तो वह और लोगों के साथ भी जा सकते हैं. हर पार्टी को खनन सूरमाओं की जरूरत है और हर नेता जानता है कि चुनाव लड़ने के लिए संसाधन कहां से जुटाने हैं. इससे बीजेपी की दुविधा और बढ़ जाती है. येदुरप्पा को खासतौर यह भी याद होगा कि रेड्डी बंधुओं ने अपने फायदे के लिए उनकी सरकार की कितनी बांह मरोड़ी थी. यहां तक कि येदुरप्पा भ्रष्टाचार के फंदे में भी फंस गए, जेल चले गए और सीएम की कुर्सी छिनी, सो अलग. इसलिए रेड्डी बंधुओं की तरफ से फ्रेंड रिवेस्ट को कंफर्म करने से पहले उन्हें सोच विचार करना होगा.

आयकर विभाग ने जनार्दन रेड्डी को सवालों की एक सूची भेजी है जिनमें शादी में हुए खर्च का ब्यौरा मांगा गया है. कोशिश यह जानने की है कि आखिर वो इतना पैसा लाते कहां से हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं को संदेह है कि जांच एजेंसियों ने सिर्फ भारत में उनकी संपत्ति को जब्त किया है जबकि विदेशों में उनके खातों को हाथ ही नहीं लगाया गया है. उनके खिलाफ आने वाले महीनों में जो कदम उठाए जाएंगे उनसे ही तय होगा कि एक बार फिर बेल्लारी गणतंत्र को तैयार करने में रड्डी की कोई मदद की जाएगी या नहीं.

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