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चुनाव तेलंगाना में हो रहे हैं और 'जान' कर्नाटक के 'उल्लुओं' की जा रही है

कर्नाटक से उल्लू लगातार गायब हो रहे हैं और इसकी वजह है चुनाव. राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों को हराने के लिए उल्लुओं का सहारा ले रही हैं

Updated On: Dec 03, 2018 03:07 PM IST

FP Staff

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चुनाव तेलंगाना में हो रहे हैं और 'जान' कर्नाटक के 'उल्लुओं' की जा रही है

देश में फिलहाल चुनावी माहौल चल रहा है. इसका असर देश की आम जनता और राजनीतिक पार्टियों पर साफ दिखाई दे रहा है. लेकिन इनके अलावा भी एक चीज ऐसी है जो चुनावों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. हम बात कर रहे हैं उल्लुओं की, जिनकी तादाद कर्नाटक में लगातार कम होती जा रही है. इसकी वजह क्या है, जब ये जानने की कोशिश की गई तो जवाब ने सबको चौंका कर रख दिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक से उल्लू लगातार गायब हो रहे हैं और इसकी वजह है चुनाव. राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों को हराने के लिए उल्लुओं का सहारा ले रही हैं. दरअसल भारत में कई लोगों का मानना है कि उल्लू बैड लक यानी बुरी किस्मत लेकर आता है. लोग कहते हैं जिस घर में उल्लू घुस जाता है, उनका खराब समय शुरू हो जाता है. इसी मान्यता के चलते राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों के गुड लक को बैड लक में बदलने के लिए उल्लुओं की तस्करी करवा रही हैं.

इस बात का पता तब चला जब बेंगलुरु के कलबुर्गी जिले में पुलिसकर्मियों ने 6 लोगों को सेदाम में उल्लू की एक प्रजाति इंडियन गर्ल आउल की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया. सेदाम तेलंगाना की सीमा से सटा इलाका है. तब उन लोगों ने बताया कि चुनाव लड़ रहे राजनेताओं ने उल्लुओं का ऑर्डर दिया था ताकि वो काला जादू कर अपने प्रतिद्वंदियों के गुड लक को बैड लक में बदल सकें.

हर उल्लू को 3 से 4 लाख में बेचने की योजना

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक शरारती तत्वों का प्लान हर उल्लू को 3 से 4 लाख में बेचने का था. रिपोर्ट के मुताबिक कई बार उल्लुओं को काला जादू करने के लिए मार भी दिया जाता है और शरीर के अंग जैसे पैर, पंख, आंखे, सिर प्रतिद्वंदियों के घर के सामने फेंक दिए जाते हैं. ऐसे अंधविश्वास के चक्कर न जाने कितने बेजुबान जानवरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है.

रिपोर्ट के मुताबिक जंगल में रहने वाले लोगों का कहना है कि इससे पहले बेंगलुरु से तीन, मैसूर से तीन और बेलागवी से ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं. कुछ वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट की माने तो दीवाली के वक्त भी उल्लुओं की भारी डिमांड होती है. कुछ लोगों का मानना है कि तेलंगाना चुनाव के चलते उल्लुओं पर खतरा मंडरा रहा है.

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