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कानपुर रेल हादसा: शोक ठीक, लेकिन सबक कब लेंगे?

कानपुर के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस की 14 बोगियां पटरी से उतर गईं.

Updated On: Nov 21, 2016 01:17 PM IST

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha

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कानपुर रेल हादसा: शोक ठीक, लेकिन सबक कब लेंगे?

रविवार तड़के तीन बजे कानपुर के पास एक पास बड़ा रेल हादसा हो गया है. इंदौर-पटना एक्सप्रेस कानपुर के पास पुखरायां स्टेशन पर डिरेल हो गई. मरनेवालों का आंकड़ा 100 के करीब पहुंचने वाला है.  देश में आए दिन रेल हादसों की खबरें आती है लेकिन उनसे कोई सबक नहीं लिया जाता.

इस हादसे में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई और घायलों की संख्या 150 से ज्यादा बताई जा रही हैं. ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए थे. ट्रेन  इंदौर से पटना जा रही थी.

रेलवे के प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया, 'कानपुर देहात के पास पुखरायां स्टेशन पर इंदौर-पटना एक्सप्रेस 19321 की 14 बोगियां पटरी से उतर गई हैं.'

कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दलजीत चौधरी ने बताया, ' हादसे में 63 लोगों की मौत हुई है, जबकि 150 से ज्यादा घायल है.'

हादसे में तीन बोगियां सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त है. अभी इन बोगियों से मृतकों और घायलों को निकालने की कोशिशें की जा रही हैं. मृतकों की संख्या बढ़ सकती है.

पुखरायां स्टेशन लखनऊ को मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से जोड़ने वाली ट्रेनों के लिए सिंगल लाइन है. ऐसे में दुर्घटना की वजह से कई रेलगाड़ियां प्रभावित होंगी.

पीएम, रेलमंत्री ने जताया शोक

पीएम मोदी ने दुर्घटना पर शोक जताया है और कहा है कि वो लगातार रेलमंत्री सुरेश प्रभु के संपर्क में हैं.

सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर बताया है कि हादसे के बाद राहत कार्य जारी है. हर तरह की मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. रेल मोबाइल मेडिकल यूनिट भी रवाना कर दी गई है. घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है.

रेलमंत्री ने ट्विटर पर हेल्पलाइन नंबर साझा किया है.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने हादसे के शिकार परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई है.

केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने भी पीड़ितों को सांत्वना देते हुए कहा है, ' प्रशासन जो कर सकता है, कर रहा है.'

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट कर हादसे पर शोक जताते हुए कहा, ' कानपुर के नजदीक पटना-इंदौर एक्सप्रेस के पटरी से उतरने में मारे गए लोगों की खबर से गहरा शोक पहुंचा है. पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.'

उन्‍होंने बताया कि एनडीआरएफ के डीजी से बात कर उन्हें अपनी टीमों को पुखरायां भेजने के निर्देश दिए  गए हैं. वो राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए खुद भी पुखरायां जा रहे हैं.

सबक कब लेंगे हम?

इसमें कोई शक नहीं कि किसी हादसे के तुरंत बाद शोक जताना ही पहली प्रतिक्रिया है, लेकिन क्या उसके बाद इस हादसे को याद किया जाता है. हादसों के कारणों के समझने और फिर से ऐसा न हो यह सुनिश्चित करने के लिए क्या होता है? फिलहाल इस हादसे के कारणों की जांच की जा रही है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है, 'अगर इस हादसे में कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.'

भारत में हर साल लगभग हजारों लोग रेल हादसों में जान गंवा देते है और लाखों लोग इन हादसों में अपंग होकर जिंदगी भर के लिए मजबूर हो जाते हैं लेकिन फिर भी इन हादसों में कोई कमी नहीं आती.

भारतीय रेलवे के स्टेस्टिकल इयर बुक में रेल हादसों पर जारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं ट्रेनों के डिरेल होने और लेवल क्रॉसिंग में हुई हैं. कुछ घटनाओं में रेलवे स्टाफ की लापरवाही का भी हाथ रहा है. इनमें ऐसे हादसे भी हैं जिन्हें थोड़ी सी सावधानी बरतकर रोका जा सकता था.

क्या यह बड़ा मुद्दा नहीं है. ये आंकड़े सोचने पर मजबूर कर देने वाले हैं. हर रेल हादसे के बाद शोक जताकर इतिश्री मान लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं है क्या हमारे पास? सबक क्या लेंगे हम?

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