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ताजमहल और लाल किला भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं: कैलाश विजयवर्गीय

'ऐसा क्यों होता है कि हमें सूखी होली और बिना पटाखों के लेकिन क्या कोई व्यक्ति ऐसे त्योहारों के मामले में पाबंदी की बात कर सकता है जिनमें बड़ी संख्या में बकरे काटे जाते हैं.'

Bhasha Updated On: Oct 17, 2017 05:43 PM IST

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ताजमहल और लाल किला भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं: कैलाश विजयवर्गीय

बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने आज कहा कि आगरा का ताजमहल और दिल्ली का लाल किला भारत की ऐतिहासिक धरोहर और स्थापत्य कला के बेमिसाल नमूने हैं, लेकिन मुगल बादशाह शाहजहां की बनाई दोनों इमारतों को देश की संस्कृति की पहचान नहीं माना जा सकता.

विजयवर्गीय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘हम ताजमहल की खूबसूरती और इसकी स्थापत्य कला का सम्मान करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं मानते कि ताजमहल देश के संस्कारों और संस्कृति की प्रतिमूर्ति है. इसी तरह हम लाल किले को भी देश के संस्कारों और संस्कृति की प्रतिमूर्ति नहीं मानते.’

उन्होंने कहा, 'ये इमारतें हमारी ऐतिहासिक धरोहर और स्थापत्य कला के शानदार नमूने जरूर हैं.'

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट के लगाए प्रतिबंध से जुड़े सवाल पर बीजेपी महासचिव ने कहा, 'हमारे देश में न्यायपालिका स्वतंत्र है और वो किसी भी मामले में दखल दे सकती है. लेकिन मेरा निजी मत है कि न्यायपालिका को कम से कम तीज-त्योहारों को लेकर जन भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.'

विजयवर्गीय ने कहा, 'ऐसा क्यों होता है कि हमें सूखी होली मनाने की सलाह दी जाती है और दीपावली पर कहा जाता है कि बच्चों के हाथों से फूलझड़ी छीन ली जाए. लेकिन क्या कोई व्यक्ति ऐसे त्योहारों के मामले में पाबंदी की बात कर सकता है जिनमें बड़ी संख्या में बकरे काटे जाते हैं.'

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