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जस्टिस कूरियन जोसेफ हुए रिटायर, कहा- कानून के जानकार की चुप्पी अनपढ़ की हिंसा के मुकाबले ज्यादा नुकसानदायक

जस्टिस कुरियन जोसेफ वर्ष 2000 में केरल हाईकोर्ट के जज बने थे, उन्होंने दो बार हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का जिम्मा संभाला था, 2010 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया

Updated On: Nov 30, 2018 09:43 AM IST

FP Staff

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जस्टिस कूरियन जोसेफ हुए रिटायर, कहा- कानून के जानकार की चुप्पी अनपढ़ की हिंसा के मुकाबले ज्यादा नुकसानदायक

सुप्रीम कोर्ट के तीसरे वरिष्ठ न्यायाधीश कूरियन जोसेफ साढ़े पांच साल के कार्यकाल के बाद बीते गुरुवार को रिटायर हो गए. वह उन 4 वरिष्ठ जजों में शामिल थे जिन्होंने 12 जनवरी को ऐतिहासिक संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस कुरियन जोसेफ वर्ष 2000 में केरल हाईकोर्ट के जज बने थे. उन्होंने दो बार हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का जिम्मा संभाला था. 2010 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया. 2013 में वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए. जस्टिस जोसेफ के पिता केरल हाई कोर्ट में क्लर्क थे.

12 जनवरी को हुए संवाददाता सम्मेलन से पूरा देश स्तब्ध रह गया था

जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस जे. चेलमेश्वर और जस्टिस मदन बी. लोकुर ने मामलों को चुनिंदा तरीके से आवंटित करने पर सवाल खड़े किए थे जिनमें सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी एच लोया जैसे संवेदनशील मामले भी शामिल हैं. लोया की 1 दिसम्बर 2014 को मौत हो गई थी. वहीं जस्टिस रंजन गोगोई फिलहाल भारत के प्रधान न्यायाधीश हैं और जस्टिस चेलमेश्वर इस वर्ष जून में रिटायर हो गए थे. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार 12 जनवरी को हुए संवाददाता सम्मेलन से पूरा देश स्तब्ध रह गया था. बार नेताओं ने गुरुवार को जस्टिस जोसेफ को विदाई दी और उन्हें हाल के वर्षों में सबसे लोकप्रिय जज करार दिया. साथ ही कहा कि उनकी मुस्कुराहट मधुर है. नेताओं ने जस्टिस गोगोई से आग्रह किया कि उन्हीं की तरह मुस्कुराने वाले न्यायाधीश को उनकी जगह लाया जाए.

जस्टिस जोसेफ ने दो राहत अभियानों में काफी सक्रियता दिखाई थी

जस्टिस जोसेफ ने दो राहत अभियानों में काफी सक्रियता दिखाई थी. इस वर्ष अगस्त में केरल में आई भीषण बाढ़ के बाद दिल्ली में वकीलों की तरफ से आयोजित अभियान में उन्होंने हिस्सा लिया था. जस्टिस कूरियन जोसेफ उस पांच सदस्यीय पीठ का भी हिस्सा थे जिसने दो के मुकाबले तीन के बहुमत से मुस्लिमों के बीच तीन तलाक को निरर्थक, अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. जस्टिस जोसेफ ने तब भी सख्त ऐतराज जताया था, जब उन्हें लगा कि सरकार गुड फ्राइडे को वर्किंग डे घोषित कर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा कर रही है. तब उन्होंने प्रधानमंत्री और तत्कालीन चीफ जस्टिस को इस मुद्दे पर पत्र लिखा था.

यह देश संविधान से बंधा हुआ है, यह हम सबको एकजुट रखता है

वहीं सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ ने अपनी विदाई के दिन कहा कि जजों को महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक मसलों पर निर्णय करते वक्त देश की विविधता को ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने अपने विदाई समारोह में कहा, यह बहुत विविधता वाला देश है. यहां की संस्कृति, धर्म, भाषा में विविधता है. यह देश संविधान से बंधा हुआ है. यह संविधान ही हम सबको एकजुट रखता है. जस्टिस जोसेफ ने कहा, कानून के जानकार की चुप्पी अनपढ़ की हिंसा के मुकाबले ज्यादा नुकसान कर सकती है. जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा- जिंदगी एक मुस्कान के साथ ही अच्छी है. अगर आप मुस्कुराते हैं तो दूसरे भी आपकी ओर देखकर मुस्कुराते हैं और इस तरह से सिलसिला बन जाता है. ये सब इसलिए, क्योंकि जिंदगी एक मुस्कान की हकदार है.

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