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कंपनियों को महंगी पड़ेगी डेटा की चोरी और छेड़छाड़, अधिकारियों को हो सकती है जेल

जस्टिस श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय कमेटी ने लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधार कानून में बड़ा बदलाव करने की सिफारिश की है

Updated On: Jul 29, 2018 11:25 AM IST

FP Staff

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कंपनियों को महंगी पड़ेगी डेटा की चोरी और छेड़छाड़, अधिकारियों को हो सकती है जेल

कंपनी के अधिकारी 'जानबूझ' कर या लापरवाही में डेटा चोरी और 'निहायत निजी सूचनाओं' के साथ छेड़छाड़ करते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है. इस जुर्म में उन्हें 5 साल की सजा भी हो सकती है.

यह बात जस्टिस बीएन कृष्ण कमेटी की ओर से तैयार किए गए डेटा सुरक्षा के प्रस्तावित मसौदे में कही गई है. कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, कमेटी के मसौदे में डेटा सुरक्षा कानून का उल्लंघन संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माने जाने की सिफारिश की गई है. इस अपराध की जांच इंस्पेक्टर रैंक से नीचे के अधिकारी से न कराए जाने की सलाह दी गई है.

आधार कानून में हो बड़ा बदलाव

इसी के साथ, जस्टिस श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय कमेटी ने लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधार कानून में बड़ा बदलाव करने की सिफारिश की है.

कमेटी का कहना है कि आधार से पहचान पुष्ट करने का अधिकार केवल भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की ओर से मान्यता प्राप्त सार्वजनिक इकाइयों या कानूनन अधिकार प्राप्त इकाइयों को ही होना चाहिए ताकि लोगों की निजता की सुरक्षा तय की जा सके.

भारत डेटा चोरी में अव्वल

देश में हालिया डेटा चोरी की घटनाएं दुनिया में औसत से अधिक है. रक्षा तकनीक बनाने वाली कंपनी थेल्स के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है. थेल्स ई-सिक्योरिटी के दक्षिण एशिया बिक्री निदेशक जेम्स कुक ने ‘थेल्स डेटा थ्रेट रिपोर्ट 2018’ जारी करते हुए पीटीआई-भाषा से कहा कि सर्वेक्षण में शामिल करीब 52 प्रतिशत भारतीयों ने पिछले साल डाटा में सेंधमारी किए जाने की बात मानी. यह दुनिया के औसत 36 प्रतिशत से अधिक है.

वहीं पिछले कुछ समय में ही डेटा चोरी होने की बात 75 प्रतिशत भारतीय ने स्वीकार की जबकि इसका वैश्विक औसत 67 प्रतिशत है.

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