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जस्टिस लोया की मौत का मुद्दा गंभीर है: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एक पक्षीय सुनवाई की बजाय द्विपक्षीय सुनवाई की जरुरत है

Bhasha Updated On: Jan 12, 2018 03:33 PM IST

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जस्टिस लोया की मौत का मुद्दा गंभीर है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के स्पेशल जस्टिस बी एच लोया की कथित तौर पर रहस्यमय हालात में हुई मौत को एक 'गंभीर मुद्दा' बताया और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा.

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एक पक्षीय सुनवाई की बजाय द्विपक्षीय सुनवाई की जरुरत है.

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एम एम शांतानागौदर की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के अधिवक्ता निशांत आर कटनेश्वरकर को 15 जनवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है.

सुनवाई की शुरुआत में ‘बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन’ का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि हाईकोर्ट इस पर सुनवाई कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट को याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए.

दवे ने कहा कि बंबई हाईकोर्ट को मामले की जानकारी है और मेरे विचार से सुप्रीम कोर्ट को मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए. अगर कोर्ट सुनवाई करता है तो हाईकोर्ट के समक्ष उलझन खड़ी हो सकती है.

याचिकाकर्ता और महाराष्ट्र के पत्रकार बी आर लोन की ओर से पक्ष रख रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्हें भी बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन से निर्देश हैं कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नहीं सुना जाना चाहिए. पीठ ने कहा कि वह याचिकाओं पर गौर करने के साथ ही उठाई जा रही आपत्तियों पर भी विचार करेगी.

याचिकाकर्ता कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला का पक्ष रख रहे अधिवक्ता वरींदर कुमार शर्मा ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें एक दिसबंर 2014 को एक जस्टिस की रहस्यमयी परीस्थितियों में मौत हो गई जिसकी जांच होनी चाहिए.

पीठ ने कटनेश्वरकर को सरकार से निर्देश लेने के साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जस्टिस लोया की मौत से संबंधित दस्तावेजों को दाखिल करने को कहा. पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को तय की है.

लोया की 1 दिसंबर, 2014 को दिल का दौरा पड़ने से नागपुर में मौत हो गई थी.

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