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जॉनसन एंड जॉनसन ने बेचे गड़बड़ हिप इंप्लान्ट डिवाइस, चार लोगों की मौत, कंपनी ने छुपाए रिकॉर्ड

कंपनी ने देशभर में सैकड़ों हिप इंप्लान्ट सर्जरी करवाई हैं, जिनमें गड़बड़ियां थीं और कंपनी ने इसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिया है

Updated On: Aug 24, 2018 11:50 AM IST

FP Staff

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जॉनसन एंड जॉनसन ने बेचे गड़बड़ हिप इंप्लान्ट डिवाइस, चार लोगों की मौत, कंपनी ने छुपाए रिकॉर्ड

शीर्ष की ग्लोबल फार्मा कंपनियों में शामिल जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं. रिपोर्ट है कि कंपनी ने देशभर में सैकड़ों हिप इंप्लान्ट सर्जरी करवाई हैं, जिनमें गड़बड़ियां थीं और कंपनी ने इसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिया है. साथ ही ये भी रिपोर्ट है कि इस सर्जरी में गड़बड़ी की वजह से चार लोगों की मौत भी हो गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबकि, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय की ओर से एक जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी की ओर से गड़बड़ हिप इंप्लांट डिवाइस बेचे जाने की शिकायतों की जांच करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बैठाई गई थी. इस कमेटी की जांच में ही ये हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं. कमेटी का गठन 8 फरवरी, 2017 को किया गया था. कमेटी ने 19 फरवरी, 2018 को अपना रिपोर्ट पेश किया था.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी ने गड़बड़ हिप इंप्लान्ट रिप्लेसमेंट सिस्टम इंपोर्ट किए थे और बेचे थे. 3,600 लोगों की सर्जरी में इसका इस्तेमाल किया गया, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से उन्हें ट्रेस नहीं किया जा सका है. ऊपर से कंपनी ने इस इंप्लांट सिस्टम और सर्जरी का कोई रिकॉर्ड सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन को उपलब्ध नहीं कराया. रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि इस सर्जरी की वजह से चार लोगों की मौत भी हो गई है.

कमिटी की अध्यक्षता मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. अरुण अग्रवाल कर रहे हैं. अपनी रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि कंपनी सर्जरी से प्रभावित हर मरीज को 20-20 लाख दे. और रिवीजन सर्जरी के लिए रिइम्बर्शमेंट प्रोग्राम अगस्त 2025 तक चले.

जांच में कमेटी को पता चला कि कंपनी ने ASR XL Acetabular Hip System और ASR Hip Resurfacing System बाहर से इंपोर्ट किया था, जबकि इन दोनों डिवाइसों को वैश्विक स्तर पर वापस ले लिया गया था.

सर्जरी में इन डिवाइसों का इस्तेमाल किया गया जिसके चलते मरीजों को और समस्याएं हुईं, फिर उनकी रिवीजन सर्जरी की गई. मेटल ऑन मेटल इंप्लांट से खून में कोबाल्ट और क्रोमियम की बहुत ज्यादा मात्रा हो जाती है, जिससे ये मेटल आयन्स टिशूस और बॉडी ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचाता है. इससे और भी कई स्वास्थ्य की समस्याएं हो सकती हैं. इससे दर्द भी बढ़ता और सक्रियता भी कम होती है.

कमेटी की इस रिपोर्ट पर कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि कमेटी ने अभी तक कंपनी को अपनी रिपोर्ट नहीं दिखाई है, इसलिए वो अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दे सकते.

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