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21 देशों के 75 यूनिवर्सिटीज में JNU की अटेंडेंस पॉलिसी सबसे खराब

दुनियाभर के 21 देशों में चलने वाली 75 यूनिवर्सिटीज की अटेंडेंस पॉलिसी के सर्वे के दौरान इसमें शामिल होने वाले अमूमन सभी शिक्षकों ने JNU के इस नियम पर आश्चर्य जताया

Updated On: Jan 06, 2019 02:58 PM IST

FP Staff

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21 देशों के 75 यूनिवर्सिटीज में JNU की अटेंडेंस पॉलिसी सबसे खराब

संसद के सदस्यों द्वारा शुक्रवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि JNU के शिक्षक संघ ने अनिवार्य उपस्थिति के खिलाफ वहां के प्रशासन पर फिर से दबाव बनाने की कोशिश की है. शिक्षक संघ का कहना है कि एक सर्वे के अऩुसार दुनियाभर के 21 देशों के 75 यूनिवर्सिटीज में JNU की अनिवार्य उपस्थिति पॉलिसी सबसे विरोधात्मक है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर अनुसार जेएनयू के शिक्षक संघ ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बिना किसी शिक्षक से सलाह- मशविरा या चर्चा किए उन्हें भी अनिवार्य उपस्थिती के नियम में शामिल कर लिया. अटेंडेंस का नियम अब स्टूडेंट्स और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ के अलावा टीचर्स के लिए भी मौजूद है. शिक्षकों को भी अब रोज अटेंडेंस रेजिस्टर में हस्ताक्षर करना होता है. जल्द ही इन रेजिस्टर की जगह बायोमेट्रिक्स ले लेंगी.

सर्वे में शामिल हुए दुनियाभर के शिक्षकों ने जताया आश्चर्य

शिक्षकों का मानना है कि बीते 13 जुलाई को हुई 146वीं अकेडमिक काउंसिल की मीटिंग के एजेंडे में कहीं भी शिक्षकों के लिए अनिवार्य अटेंडेंस की बात नहीं की गई थी. लेकिन ये नियम लागू किया गया. नियम के लागू होते ही शिक्षकों की फेलोशिप, मेडिकल कवरेज, कॉन्फ्रेंस, रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए छुट्टी दी पर रोक लगाई जाने लगी.

इस बीच शिक्षक संघ ने JNU प्रशासन को कई लेटर लिखें, इस नियम के पीछे का कारण और इस पॉलिसी को गलत ठहराने की कोशिश की. शिक्षकों का मानना है कि ऐसे यूनिवर्सिटी जो अपने रिसर्च पेपर, पढ़ाई और पढ़ाई-लिखाई वाले माहौल के लिए जाना जाता है, वहां ऐसे नियमों का लागू करना बिल्कुल बेतुका लगता है. शिक्षक संघ ने इस पॉलिसी को गलत साबित करने के लिए दुनियाभर के 21 देशों में चलने वाली 75 यूनिवर्सिटीज की अटेंडेंस पॉलिसी का सर्वे किया, सर्वे में शामिल अमूमन सभी शिक्षकों ने जेएनयू के इस नियम पर आश्चर्य जताया.

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