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JNU में छात्रों की तरह अब टीचरों की भी अनिवार्य हुई हाजिरी

यूनिवर्सिटी ने छात्रों और प्रशासनिक स्टाफ के लिए अनिवार्य हाजिरी का नियम पहले ही लागू कर दिया है. 146वीं अकादमिक बैठक में शिक्षकों के लिए भी यह नियम लागू कर दिया गया

FP Staff Updated On: Jul 14, 2018 01:05 PM IST

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JNU में छात्रों की तरह अब टीचरों की भी अनिवार्य हुई हाजिरी

जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि अब टीचरों को भी हर दिन अपनी हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा.

एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की 146वीं अकादमिक परिषद बैठक में यह फैसला लिया गया.

इस फैसले के बारे में जेएनयू के एक बयान में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों और प्रशासनिक स्टाफ के लिए अनिवार्य हाजिरी का नियम पहले ही लागू कर दिया है. अब 146वीं अकादमिक बैठक में शिक्षकों के लिए भी यह नियम लागू कर दिया गया है. साथ ही जेएनयू फैकल्टी को भी दिन में कम से कम एकबार हाजिरी लगानी होगी.

नए नियम के मुताबिक, प्रत्येक सेमेस्टर के रजिस्ट्रेशन के वक्त छात्रों को यह लिखित में देना होगा कि वे हाजिरी के नियमों का पालन करेंगे. यह बयान यूनिवर्सिटी के रेक्टर (प्राचार्य) चिंतामणि महापात्र की ओर से जारी किया गया है.

एक और बड़ा कदम उठाते हुए जेएनयू परिषद ने यूनिवर्सिटी की सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित कर दिया है.

जैसा कि बयान में कहा गया है, परिषद की बैठक में कई सदस्यों ने इस पर खुशी जताई कि अब नामांकन प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी, कुशल, सुरक्षित और तरफदारी से मुक्त होगी.

जेएनयू ने इस साल से एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया है. अब आठ अगस्त को एक बार फिर से जेएनयू में दीक्षांत समारोह का आयोजन होगा. यह जेएनयू के इतिहास में दूसरी बार होगा जब पीएचडी के छात्रों को दीक्षांत समारोह आयोजित कर डिग्री दी जाएगी. हालांकि इस समारोह की अध्यक्षता कौन करेगा यह स्पष्ट नहीं हुआ है.

जेएनयू में समारोह ना होने के पीछे अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं. कुछ लोगों का मानना है कि जब पिछली बार दीक्षांत समारोह में बलराज साहनी को बुलाया गया था, तब उन्होंने अपने भाषण में सरकार के खिलाफ काफी बुरा-भला बोला था. इस भाषण के कारण विवाद पैदा हो गया था. शायद इसलिए उसके बाद कभी इस समारोह का आयोजन नहीं कराया गया.

हाल ही में मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को यह निर्देश दिया है कि वे सालाना दीक्षांत समारोह का आयोजन करें.

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