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JNU: अनिवार्य उपस्थिति का विरोध करने वाले डिपार्टमेंट हेड हटाए जाएंगे!

अनिवार्य उपस्थिति का विरोध करने वाले डीन और विभागाध्यक्षों के खिलाफ जांच के लिए जेएनयू कार्यकारी परिषद ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है

Updated On: Mar 14, 2018 01:20 PM IST

FP Staff

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JNU: अनिवार्य उपस्थिति का विरोध करने वाले डिपार्टमेंट हेड हटाए जाएंगे!

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अनिवार्य उपस्थिति का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. जेएनयू प्रशासन अनिवार्य उपस्थिति का विरोध करने वाले डीन और एक सेंटर के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है. उनको पद से भी हटाया जा सकता है. जेएनयू कार्यकारी परिषद ने मंगलवार को दोनों विभागाध्यक्षों के खिलाफ जांच करने के लिए एक जांच कमेटी बनाने का निर्णय लिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, जेएनयू प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अध्यक्ष और डीन प्रशासनिक संरचना के हिस्सा होते हैं. शिक्षकों और विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का अधिकार है. यदि अध्यक्ष और डीन किसी मुद्दे पर लिखित में विरोध करते हैं तो यह प्रशासन के खिलाफ जाता है इसलिए कार्यकारी परिषद ने जांच समिति का गठन किया है.

तीन सदस्यीय जांच समिति में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के डीन पवन के धर, संस्कृत और इंडिक स्टडीज के डीन गिरीश नाथ झा और सोशल साइंसेस स्कूल के डीन प्रदीप्ता के चौधरी शामिल हैं.

सूत्रों ने बताया कि अनिवार्य उपस्थिति का विरोध करने वाले डीन और अध्यक्षों की संख्या 7 से ज्याादा नहीं थी. जेएनयू में कुल 13 डीन और 38 अध्यक्ष हैं. इसके अलावा 5 अध्यक्ष स्पेशल सेंटर्स के हैं.

अनिवार्य उपस्थिति को लागू करने का निर्णय पिछले साल जब दिसंबर में लिया गया तब से ही यह विवाद का मुद्दा बन गया है. इस मामले का विरोध करते हुए छात्रों और शिक्षकों के यूनियन ने फरवरी मध्य से ही ओपन एयर क्लास लगाना शुरू कर दिया था.

जेएनयू प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालय कई विभागाध्यक्षों को हटाने पर भी विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि अगर कोई कहता है कि मैं नियम को लागू नहीं कर सकता, तो वह एक अथॉरिटी को खारिज कर रहा है. जब कार्यकारी परिषद ने अनिवार्य उपस्थिति को लागू करने का निर्णय लिया तो इसे लागू करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मैं अध्यक्ष होता इसे लागू करने से मना करने के बजाय इस्तीफा दे देता.

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