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अफजल गुरु स्क्वॉड बनाकर कश्मीर में ताबड़तोड़ हमले कर रहा है जैश-ए-मोहम्मद

भारत में घुसपैठ करने के बाद अफजल गुरु स्क्वॉड के आतंकवादी को अक्सर 24 घंटों के अंदर मार गिराया जाता है

Updated On: Oct 09, 2017 01:58 PM IST

Sameer Yasir

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अफजल गुरु स्क्वॉड बनाकर कश्मीर में ताबड़तोड़ हमले कर रहा है जैश-ए-मोहम्मद

आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने कश्मीर घाटी में बेहद खतरनाक ढंग से वापसी की है. इस संगठन ने संसद पर हमले के मुजरिम अफजल गुरु के नाम से आत्मघाती हमले का दस्ता बनाया है.

अफजल गुरु स्क्वॉड का नाम पहली बार साल 2014 में सामने आया था. उस दौरान इस स्क्वॉड ने सरहदी इलाकों में सेना के ठिकानों पर कई हमले किए थे. हमले के बाद सेना के ठिकानों में इसके आतंकवादियों ने यह संदेश लिखा था- ये अफजल गुरु की मौत का बदला है.

अफजल गुरु स्क्वॉड का हर नया हमला, पिछले वाले से ज्यादा खतरनाक होता गया. इस स्क्वॉड के पहले हमले उत्तरी कश्मीर में मोहरा और तंगधार में सेना के कैंपों पर किए गए थे. इसके बाद अफजल गुरु स्क्वॉड ने जम्मू के कठुआ और सांबा में आतंकी हमले किए. स्क्वॉड ने सब से भयानक हमला पठानकोट एयरबेस पर किया था. इस हमले ने भारत-पाकिस्तान के रिश्ते में गहरी दरार डाल दी.

अफजल गुरु स्क्वॉड बनाने का एलान जैश-ए-मुहम्मद के संस्थापक और सरगना मौलाना मसूद अजहर ने की थी. भारत से उसकी दुश्मनी तीन दशक पुरानी है.

मसूद अजहर 1993 में पुर्तगाल के पासपोर्ट पर भारत आया था. कुछ ही महीनों के भीतर वो दक्षिणी कश्मीर में पकड़ा गया था. उस वक्त वो हरकत-उल-मुजाहिदीन का महासचिव था. अगले सात साल वो जेल में कैद रहा. 1999 में उसे कंधार विमान अपरहण कांड के एवज में दो आतंकवादियों, उमर सईद और मुश्ताक जरगर के साथ रिहा किया गया था.

Pulwama: Army personnel take position during a gun battle with militants, who launched a pre-dawn attack on a district police complex in which three security personnel were martyred, in Pulwama of South Kashmir on Saturday. PTI Photo by S Irfan(PTI8_26_2017_000097B)

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल इस साल अब तक 150 आतंकवादियों को मुठभेड़ में ढेर कर चुके हैं (फोटो: पीटीआई)

रिहा होने के कुछ ही महीनों के भीतर उसने जैश-ए-मुहम्मद के नाम से आतंकी संठन बना लिया था. जैश का पहला हमला 17 साल के एक कश्मीरी लड़के ने फिदाईन हमलावर बनकर किया था. आफाक शाह नाम के इस लड़के ने सेना की 15वीं कोर के मुख्यालय के गेट पर खुद को बम से उड़ा लिया था.

9/11 हमले के बाद पाकिस्तान की घरेलू और विदेश नीति में बदलाव आया

कश्मीर में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद की एंट्री के बाद सेना और सुरक्षा बलों के ठिकानों पर हमलो में तेजी आई थी. आतंकवादी बार-बार सरकारी ठिकानों को निशाना बना रहे थे. लेकिन 2001 में अमेरिका पर हुए 9/11 के आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान की घरेलू और विदेश नीति में बदलाव आया. इसके बाद जैश-ए-मुहम्मद की गतिविधियां भी कम हो गईं. बाद के दस वर्षों में कश्मीर से जैश का नामो-निशां मिट गया.

लेकिन फरवरी 2013 में अफजल गुरु को फांसी पर लटकाए जाने के बाद से जैश को नई जिंदगी मिली है. अफजल गुरू के बारे में कहा जाता है कि वो दिसंबर, 2001 में संसद पर हुए हमले के मास्टरमाइंड गाजी बाबा का बेहद करीबी था. मरने के बाद अफजल गुरु जैश की नई पहचान बन गया.

उसकी फांसी के एक साल बाद 26 जनवरी, 2014 को मसूद अजहर ने कश्मीर के बारे में अफजल गुरु का एक लेख जारी किया. अफजल ने ये लेख तिहाड़ जेल में लिखा था. उस ने अपने लेख में कश्मीर के लिए तालिबान जैसे संगठन की जरूरत बताई थी.

उसी दिन मसूद अजहर ने अफजल गुरु स्क्वॉड बनाने का ऐलान भी किया था. इस स्क्वॉड ने सब से ताजा हमला अर्धसैनिक बलों के ठिकाने पर किया है. यह हमला श्रीनगर शहर के बार हमहमा जैसे बेहद सुरक्षित इलाके में किया गया. हथियारों से लैस तीन हमलावर, बीएसएफ की 182वी बटालियन के कैंप में घुस गए.

ये हमलावर उन 17 आतंकियों के गिरोह का हिस्सा हैं, जिन्होंने इस साल कश्मीर में घुसपैठ की थी. इन लोगों ने दक्षिणी कश्मीर को अपना ठिकाना बनाया है. इस झुंड के सात से दस आतंकवादियों का अब भी कोई अता-पता नहीं है.

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हिज्बुल और लश्कर-ए-तैयबा सुरक्षा बलों की कार्रवाई से भारी दबाव में

उत्तरी कश्मीर के आईजी मुनीर खान ने कहा कि इन घुसपैठियों में से सात से दस आतंकवादी अभी और जिंदा हैं. जिनका खात्मा किए जाने की जरूरत है. अफजल गुरु स्क्वॉड के जरिए जैश-ए-मुहम्मद ने कश्मीर में उस वक्त दोबारा एंट्री की है, जब हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन सुरक्षा बलों की कार्रवाई से भारी दबाव में हैं. इनके कई बड़े आतंकवादी सुरक्षाबलों के हाथों मारे जा चुके हैं.

जिस वक्त अफजल गुरु स्क्वॉड बनाने का एलान हुआ था, उस वक्त कहा गया था कि 300 फिदाईन भारत में हमले करने के लिए तैयार हैं. यह बात मसूद अजहर ने जनवरी 2014 में दिए अपने भाषण में कही थी.

बीएसएफ कैंप पर हमले से पहले अफजल गुरु स्क्वॉड के आतंकवादियों ने 26 अगस्त को दक्षिणी कश्मीर में जिला पुलिस लाइन पर हमला किया था. इसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के आठ जवान शहीद हो गए थे. उस हमले के बाद भी स्क्वॉड के आतंकवादियों ने पुलिस लाइन की इमारत के एक खंभे पर लिखा था कि यह अफजल गुरु का बदला है.

कश्मीर के एक पुलिस अफसर के मुताबिक, भारत में घुसपैठ करने के बाद अफजल गुरु स्क्वॉड का आतंकवादी अक्सर 24 घंटों के अंदर खत्म कर दिया जाता है.

अफजल गुरु स्क्वॉड अब कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में हमले कर रहा है

सेना की खुफिया विंग ने यह देखा है कि इस स्क्वॉड के आतंकवादी अक्सर लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं. हर हमले के बाद इसके आतंकवादी अपनी कोई न कोई निशानी जरूर छोड़ जाते हैं. लेकिन, हमहमा और पुलवामा पुलिस लाइन पर हुए हमलों से जाहिर है कि अफजल गुरू स्क्वॉड के आतंकवादी अब कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में हमले कर रहे हैं. वो खास तौर से श्रीनगर और आस-पास के इलाकों को निशाना बना रहे हैं.

Pathankot airforce base

भारतीय वायुसेना के पठानकोट बेस पर पिछले साल जनवरी में जैश के आतंकवादियों ने फिदाईन हमला किया था

हाल ही में सेना के एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि वो यहां पर फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालने के लिए नहीं आए हैं. वो यहां मरने-मारने के लिए ही आए हैं. अब जो जान देने पर आमादा हो, उसे रोकना मुश्किल है. अफजल गुरू स्क्वॉड ने सबसे बड़ा हमला पिछले साल सितंबर में किया था. जब उरी में सेना के कैंप पर हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे. उस हमले में चारों हमलावर आतंकवादी भी मारे गए थे.

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