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झारखंड: भूख से मरी बच्ची के परिवार पर एक और मुसीबत

डिप्टी कमिश्नर का कहना है कि राइट टू फूड कैंपेन एनजीओ में काम करने वाली तारामती साहू ने अपने कुछ सहयोगियों की मदद से कोयली देवी को उनके घर से निकाला.

Updated On: Oct 21, 2017 03:25 PM IST

FP Staff

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झारखंड: भूख से मरी बच्ची के परिवार पर एक और मुसीबत

झारखंड के सिमडेगा में राशन कार्ड रद्द होने के चलते हुई बच्ची की मौत के बाद भी उसके परिवार की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को बच्ची संतोषी कुमारी के परिवारवालों को उनके घर से कुछ लोगों ने निकाल दिया और उन्हें पंचायत भवन में छोड़ आए.

सिमडेगा के डिप्टी कमिश्नर मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि उन्होंने इस मामले को सुलझा दिया है. न्यूज18 से बातचीत में कहा कि बच्ची संतोषी कुमारी की मां कोयली देवी को पंचायत भवन से उनके घर वापस भेज दिया गया है.

एनजीओ वर्कर को पुलिस ने बताया जिम्मेदार

भजंत्री ने बताया कि राइट टू फूड कैंपेन एनजीओ में काम करने वाली तारामती साहू ने अपने कुछ सहयोगियों की मदद से कोयली देवी को उनके घर से निकाल कर पंचायत भवन में छोड़ दिया था लेकिन उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर को पुलिस के साथ भेजा और उन्हें उनके घर छोड़ा और साथ ही वहां कुछ पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है.

तारामणि साहू ने ही संतोषी कुमार की मौत का मामला सबके सामने लाया था. 11 साल की संतोषी 8 दिनों से भूख से तड़पती रही और पिछले 28 सितंबर को उसकी मौत हो गई थी.

पुलिस ने इस बात से इनकार किया था कि बच्ची की मौत में आधार कार्ड की कोई भूमिका है. अब इस घटना के बाद उन्होंने एनजीओ को ही इसका जिम्मेदार बताया है.

राशन कार्ड आधार कार्ड से लिंक न होने कर दिया गया था रद्द

जिले के करीमति गांव में रहने वाले संतोषी के परिवार का सरकारी राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था. इसकी वजह उसे आधार से लिंक नहीं कराया जाना बताया गया.

बीपीएल रेखा से नीचे रहने वाले संतोषी के परिवार के पास कोई नौकरी नहीं है, न ही इनके स्थायी आमदनी का कोई जरिया है, जिसके कारण परिवार पूरी तरह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मिलने वाले सरकारी राशन पर ही निर्भर था. संतोषी एक स्थानीय स्कूल में पढ़ती थी, जहां उसे मिड डे मील की वजह से खाना मिल जाता था लेकिन दुर्गा पूजा की वजह से स्कूल बंद था.

संतोषी के पिता मानसिक तौर पर बीमार हैं जबकि उसकी मां और बहन दोनों मजदूरी कर के एक दिन में मुश्किल से 90 रुपए तक कमा पाती हैं. संतोषी का परिवार बड़ी मुश्किल से किसी तरह घर का खर्चा चला रहा था लेकिन पिछले कुछ दिनों से किसी ने कुछ नहीं खाया था.

कुछ लोगों ने परिवार के राशन कार्ड को रिन्युअल कराने के लिए जलडेगा के ब्लॉक ऑफिसर को भेजा था लेकिन ये मामला ही उनके पास 1 अक्टूबर को पहुंचा तब तक संतोषी की मौत हो चुकी थी.

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