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झारखंडः RIMS बना मरीजों के लिए कब्रगाह, 2 दिन में 26 की मौत

दो दिन के अंदर 26 मरीजों की मौत हो गई. ये सब हुआ जूनियर डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के हड़ताल की वजह से

Anand Dutta Updated On: Jun 04, 2018 01:12 PM IST

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झारखंडः RIMS बना मरीजों के लिए कब्रगाह, 2 दिन में 26 की मौत

झारखंड का सबसे बड़ा अस्पताल शनिवार दो मई को अचानक मरीजों के लिए कब्रगाह बन गया. दो दिन के अंदर 26 मरीजों की मौत हो गई. ये सब हुआ जूनियर डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के हड़ताल की वजह से. दर्द से कराहती गर्भवती महिला हो या ऑपरेशन के लिए तड़पते मरीज, किसी को भी अस्पताल में घुसने नहीं दिया जा रहा था. हड़तालियों का कहना था कि जब तक स्वास्थ्य मंत्री वार्ता करने नहीं आएंगे, तब तक किसी तरह की सुनवाई नहीं होगी. चाहे कितने भी मरीजों की मौत हो जाए. परिणाम ये हुआ कि 2 दिन में लगभग 750 मरीज अस्पताल छोड़कर चले गए.

जानकारी के मुताबिक शनिवार की रात को गीता गुप्ता (45 साल) नाम की मरीज को भर्ती कराया गया. उसने कर्जदारों के फोन से तंग आकर पति के साथ मिलकर जहर खा लिया था. पति की मौत शनिवार को ही हो गई थी. इधर गीता का इलाज मेडिसिन वार्ड में डॉ उमेश प्रसाद की यूनिट में चल रहा था. रविवार सुबह तड़के तीन बजे उसकी तबियत अचानक खराब होने लगी, तो पास में बैठी बेटी ऋचा (23 साल) ने नर्स को आवाज दी. नर्स आकर एक सुई लगा गई और उसके थोड़ी देर बाद गीता की मौत हो गई.

इससे बाद गुस्साए परिजनों ने नर्स पर आरोप लगाया कि उसने गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिसकी वजह से गीता की मौत हो गई. बेटी ऋचा का कहना है कि जब डॉक्टर ने उसकी मां को खतरे से बाहर बताया था, तब इस इंजेक्शन के तुरंत बाद ही उसकी मां की मौत, केवल नर्स की गलती से हुई है.

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इस बीच परिजनों संग हाथापाई शुरू हो गई. नर्स मनोरंजनी बाखला और सुधा सिन्हा का एप्रन फट गया. हंगामा देख रिम्स की अन्य नर्सें और जूनियर डॉक्टर का हुजूम उमड़ पड़ा. सभी रिम्स प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. स्वास्थ्य मंत्री के बिना किसी से बातचीत को तैयार नहीं हुए. इस बीच जो मरीज रिम्स के अंदर जाने की कोशिश करता, उसे धक्के देकर बाहर कर दिया गया.

सबने कहा कि पहले सरकार उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ले, तभी वह काम पर लौटेंगे. रिम्स के निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव के मुताबिक इस हड़ताल में रिम्स के लगभग 600 कर्मचारी शामिल थे.

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हड़ताल पर अस्पताल की नर्सें

मरीजों से अधिक सरकार दिख रही थी लाचार

यह पहली बार नहीं है, जब रिम्स में नर्स या जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल किया है. केवल मई माह में विभिन्न कारणों से चार बार हड़ताल हो चुका है. राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल होने के नाते पूरे राज्यभर के मरीजों का आना-जाना हर दिन लगा रहता है. आंकडों के अनुसार रिम्स के ओपीडी में हर दिन लगभग 1500 मरीज चिकित्सीय सलाह लेने आते हैं. लगभग 1400 मरीजों का हर दिन इलाज किया जाता है. वहीं 30 से 35 मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है.

हड़ताल के बाद रांची के बीजेपी सांसद रामटहल चौधरी, विधायक डॉ जीतूचरण राम हड़ताली कर्मचारियों को मनाने पहुंचे, लेकिन वह टस से मस नहीं हुए. निजी अस्पताल लग गए मौके का फायदा उठाने में. इस बीच गरीब और बेबस मरीजों के हालात का फायदा उठाने के लिए राजधानी के निजी अस्पताल सक्रिय हो गए. उन्होंने अपने एजेंटों को रिम्स के आसपास तैनात कर दिया. ये एजेंट उनके कर्मचारी से लेकर ऑटो ड्राइवर तक थे, जो मरीजों को सीधे उन अस्पतालों तक पहुंचा रहे थे.

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इसमें सबसे अधिक नुकसान राज्य से सुदूर इलाकों से आए आदिवासी मरीजों का हुआ. उन्हें न तो शहर की जानकारी थी, न ही उस निजी अस्पताल की जहां वह भर्ती करा दिए जा रहे थे. एक तरफ रिम्स में उनका इलाज नहीं हो रहा, दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में फंसने का डर सताता रहा.

मंत्री ने कहा- मैं बाहर हूं, आता हूं तो मामले को देखता हूं

इधर स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी राज्य के बाहर निकल चुके थे. हड़ताली कर्मचारी उससे नीचे किसी अधिकारी से बात करने को तैयार नहीं थे. पूछने पर मंत्री ने केवल इतना कहा कि दो दिन बाद लौटता हूं तो देखता हूं आखिर मामला क्या है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि गरीब जनता जो इस सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आती है, उसके प्रति केवल स्वास्थ्य मंत्री ही जिम्मेवार हैं? सीएम सहित 11 मंत्रियों के कैबिनेट और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेवारी नहीं कि वह नर्सों से जाकर बात करते और राज्य के सबसे बड़े अस्पताल की व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास करते.

हड़ताल की वजह से मरीजों का बुरा हाल

हड़ताल की वजह से मरीजों का बुरा हाल

दो विधानसभा उपचुनाव में जीत का जश्न मना रहे जेएमएम नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी दिनभर घर में बैठना उचित समझा, वह भी तब जब रिम्स से उनके सरकारी आवास की दूरी महज तीन किलोमीटर है. मरीजों का दर्द जानना क्या केवल सरकार की जिम्मेदारी है? सीएम रघुवर दास के पास जब मामले को पहुंचाया गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘रिम्स में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अपनी बात सबको रखने का हक है, लेकिन कायदे से. मैं हड़ताली कर्मियों से काम पर जल्द लौटने की अपील करता हूं. स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को वार्ता कर मामले का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया है.’

धरने पर बैठे रहे मरीजों के सैकड़ों परिजन

शनिवार दिनभर मरीजों के परिजनों, हड़ताली कर्मचारी, रिम्स प्रशासन और रांची जिला प्रशासन आपस में उलझते रहे. रविवार सुबह से बड़ी संख्या में मरीजों के परिजन रिम्स मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ चुके थे. उनका कहना था कि किसी एक की गलती का खामिजाया 26 लोगों को जान गंवाकर भुगतनी पड़ी है.

एक परिजन रानी कुजूर का कहना था कि उसके मरीज के आंत का ऑपरेशन हुआ है. उसका खाना-पीना इंजेक्शन ही है, वह अन्न नहीं खा सकता है. लेकिन कोई इंजेक्शन देनेवाला नहीं था. सबसे खतरनाक स्थिति बर्न वार्ड के मरीजों का था. दर्द से कराहते मरीजों को इंजेक्शन देनेवाला कोई नहीं था. रिम्स प्रबंधन केवल इतना कर पाई कि सीनियर डॉक्टरों को तत्परता से ड्यूटी पर तैनात रहने को कहा है. भला कुछेक डॉक्टर सैकड़ों मरीजों का इलाज कैसे कर सकते थे.

मरीज की मौत पर बिलखते परिजन

मरीज की मौत पर बिलखते परिजन

रिम्स नर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष रामरेखा राय का कहना है कि गीता गुप्ता और उसके पति ने 29 मई को जहर खा लिया था. दोनों को उसी दिन भर्ती कराया गया, लेकिन उसी दिन पति की मौत हो गई. इधर एक मई की रात को पत्नी गीता देवी की तबियत अचनाक अधिक खराब होने पर परिजनों ने नर्स को इसकी सूचना दी. नर्स ने तत्काल सीनियर डॉक्टर को बुलाने को कहा, जब तक डॉक्टर आते, मरीज की मौत हो गई थी. इसके बाद परिजनों ने नर्स के साथ मारपीट की.

मनमानी के बाद देर शाम टूटी हड़ताल

नर्सों, जूनियर डॉक्टरों की मनमानी का आलम यह था कि कराहते मरीजों के बीच कोई सेल्फी ले रहा था तो कोई चुटकुला सुना रहा था. इधर रविवार देर शाम मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी रिम्स पहुंचे. हड़तालियों ने सीधे कहा कि नर्सों के साथ मारपीट करनेवाले व्यक्ति पर कठोर कार्रवाई होगी. जबकि हड़ताल कर रहे नर्स और जूनियर डॉक्टरों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी. वर्तमान सिक्यूरिटी एजेंसी को हटाकर दूसरे को लगाया जाएगा. एक मरीज के साथ एक ही परिजन रहेंगे. आगामी विधानसभा सत्र में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट पास किया जाएगा. रिम्स के नर्सों को एम्स का वेतनमान देने पर विचार किया जाएगा.

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