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झारखंड में क्यों उठी विधानसभा में शराब का ठेका खुलवाने की मांग!

शराब बिक्री को लेकर पूरा विपक्ष और सरकार में शामिल सहयोगी दल आजसु भी शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री रघुवर दास को घेर सकती है. विपक्ष का कहना है कि कई मुद्दे हैं लेकिन शराब बिक्री भी एक प्रमुख मुद्दा है

Brajesh Roy Updated On: Dec 09, 2017 06:27 PM IST

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झारखंड में क्यों उठी विधानसभा में शराब का ठेका खुलवाने की मांग!

शराब पीने पिलाने के तौर-तरीकों को लेकर कितने ही शायर कवियों के भाव भले ही छलकते रहे हों लेकिन झारखंड में शराब अब विधानसभा में बेची जाए फिलहाल यह मुद्दा छाया हुआ है. प्रमुख विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली रघुवर सरकार के सामने यह मांग रख दी है, 'झारखंड विधानसभा में खुले शराब की दुकान.'

पलटवार करते हुए बीजेपी ने प्रेस कान्फ्रेंस करके यह भी कहा, 'शराब के शौकीन विपक्षी विधायक कहें तो उनके घर आंगन में हम शराब की दुकान खोल दें या फिर वे हमें जगह की लिस्ट ही बता दें.' इधर झामुमो के विधायक कुणाल षाडांगी ने ऐलान कर किया है कि वे 12 दिसंबर को विधानसभा में बियर की बोतल लेकर जाएंगे और मुख्यमंत्री रघुवर दास को भेंट करेंगे. गौरतलब है कि झारखंड में 12 दिसंबर से विधानसभा का शीत कालीन सत्र प्रारंभ हो रहा है.

क्यों चाहिए विपक्ष को विधानसभा परिसर में शराब की दुकान?

Hemant Soren

दरअसल झारखंड में शराब अब सरकार बेच रही है. निजी व्यावसायियों के ठेके को रद्द करते हुए रघुवर सरकार ने शराब की बिक्री के लिए सीधे सरकारी सेवाएं दे रखी है. इसी साल पहली अगस्त से झारखंड में अनुसूचित पंचायत क्षेत्रों को छोड़कर राज्य सरकार ने बीवरेज कॉरपोरेशन के माध्यम से शराब की बिक्री करना शुरू किया है. सूबे में आज पांच सौ से ज्यादा दुकान पर शराब सरकार बेच रही है. सरकारी दुकान पर शराब बेचने के लिए सेल्स मैन और आईटी के जानकार मैनेजर रखे गए हैं.

अनुबंध पर नियुक्त किए गए इन कर्मचारियों को वेतन के तौर पर पंद्रह से 25 हजार रुपए महीने तक दिया जा रहा है. विपक्ष का कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार पिछड़ती रघुवर सरकार अनुबंध पर नियुक्त पारा शिक्षकों को वेतन सिर्फ 8 हजार दे रही है. ऐसे में शिक्षा से कम और शराब से ज्यादा नजदीक हो गई है रघुवर सरकार.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने रघुवर सरकार को दो टूक कहा है, 'शराब बेचकर ये सरकार समाज का भला कभी नहीं कर सकती. रुपए तो कई तरीके से कमाए जाते हैं. यदि शराब बेचकर सरकार की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो विधानसभा में भी दुकान खोल देनी चाहिए. देश को पता तो चले कि लोकतंत्र के मंदिर से भी सरकार कुछ कमा सकती है.'

सरकार ने नहीं बीजेपी ने दिया जवाब

विपक्ष की इस मांग को लेकर रघुवर सरकार के बचाव में बीजेपी को तुरंत आगे आना पड़ा. प्रदेश कार्यालय रांची में प्रेस कान्फ्रेंस कर पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शहदेव और दीनदयाल बर्णवाल ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन से हेमंत सोरेन और पार्टी के विधायकों को सीख लेनी चाहिए. गुरुजी ने आजीवन शराबबंदी की लड़ाई लड़ी है. बीजेपी ने इस दौरान यह भी तर्क रखा कि शराब बिक्री पर अब सरकार का सीधा नियंत्रण है. इससे न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है बल्कि बिचौलियों पर नकेल कसते हुए नकली शराब की संभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.

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इसी बीच बीजेपी ने झामुमो पर चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि विपक्ष के नेताओं को शराब के लिए लाइन में लगना गंवारा नहीं है और पूर्ण शराबबंदी के लिए नाटक करते नजर आते हैं. उनके विधायकों को बाहर की दुकान से शराब खरीदने में परेशानी आ रही है, हमे खुलकर कहें व्यवस्था हम करवा देंगे. लोकतंत्र के मंदिर में शराब की दुकान की मांग करना झामुमो की मानसिक दिवालियापन का परिचायक है |

शराब विक्री को लेकर मंत्रियों में भी है नाराजगी

Raghubar Das with Saryu Rai

सीएम रघुवर दास के सरयू राय

कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सरकार और अपने मुखिया रघुवर दास की नीतियों का एक बार फिर न केवल समर्थन किया बल्कि पार्टी की सरकार को फुल मार्क्स भी दिया. यह अलग बात है कि सरकार में शामिल कई मंत्री भी मुख्यमंत्री रघुवर दास के इस फैसले का खुलकर विरोध कर चुके हैं. खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सबसे पहले कहा, 'ठीक नहीं है यह. सरकार शराब बेचेगी तो सरकार की साख गिरेगी और समाज का स्वास्थ्य गिरेगा.'

जल संसाधन मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी ने भी अपनी बात रखी, 'सब कुछ सिर्फ फायदा देख कर ही नहीं होता. सरकार से जनता को बड़ी उम्मीदें होती हैं और शराब से किसी समाज का भला नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री महोदय ने बेवजह विपक्ष को मुद्दा दे दिया है.' इतना ही नहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के नगर विकास मंत्री सी.पी सिंह ने भी बयान दिया, 'दारू शराब से विकास नहीं, विनाश होता है. यह समाज के लिए कभी हितकर नहीं रहा. हां, कई लोग शराब के शौकीन हैं लेकिन ऐसे शौक को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए.'

शराब के खिलाफ महिलाओं ने भी खोल रखा है मोर्चा

यह अलग बात है कि झारखंड की संस्कृति में शराब पीने और पिलाने की परंपरा रही है. यहां के आदिवासी और मुलवासी समाज में इसे कभी गलत तरीके से नहीं देखा गया. शादी ब्याह से लेकर सामाजिक रीति रिवाजों में आज भी शराब का प्रचलन बदस्तूर जारी है. हालांकि शराब के कारण नुकसान भी लोगों को उठाना पड़ा है. इसके कई उदाहरण भी समय समय पर सामने आते रहे हैं. फिर भी शराब से हो रहे पारिवारिक और आर्थिक नुकसान का अब विश्लेषण भी होने लगा है खास तौर पर महिलाओं के बीच. यही वजह है कि पड़ोसी राज्य बिहार में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा से उत्साहित होकर झारखंड की आधी आबादी यानि महिलाओं ने भी शराब को लेकर मोर्चा खोल दिया है.

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राज्य के छोटनागपुर और संथाल परगना में कई उदाहरण भी सामने आए हैं. महिलाओं ने समूह में जाकर शराब दुकानों में तोड़-फोड़ की और बंद करवाने के लिए धरना प्रदर्शन भी किया. कई गांव में शराब बेचने और पीने पर पंचायत स्तर पर दंड का प्रावधान किए जाने की बात भी सामने आई है. कुछ एक गांव तो दावा भी करने लगे हैं कि उनका गांव शराब मुक्त हो गया है. इतना ही नहीं गांव की महिलाएं अपने विधायक पर अब यह दबाव बनाने लगी है कि पूर्ण शराबबंदी का कानून सरकार लागू करे.

रघुवर सरकार के लिए गले की फांस बन सकती है शराब बिक्री

Raghubardas

शराब बिक्री को लेकर पूरा विपक्ष और सरकार में शामिल सहयोगी दल आजसु भी शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री रघुवर दास को घेर सकती है. विपक्ष का कहना है कि कई मुद्दे हैं लेकिन शराब बिक्री भी एक प्रमुख मुद्दा है. सरकार में शामिल कई मंत्री और विधायक भी अपनी नाराजगी पहले ही जाहिर कर चुके हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि शराब बिक्री को लेकर सरकार क्या कहती है या फिर झारखंड विधानसभा परिसर में शराब की एक सरकारी दुकान खुल जाती है ?

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