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नहीं रिहा होंगे जेसिका लाल-तंदूर हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा और सुशील शर्मा

तिहाड़ जेल के रिव्यू बोर्ड ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे 154 दोषियों की अर्जी पर गौर किया. बोर्ड ने इनमें 25 दोषियों को पहले रिहा करने की सिफारिश कर दी है, जबकि 129 दोषियों की अर्जी ठुकरा दी गई है

FP Staff Updated On: Jul 28, 2018 11:33 AM IST

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नहीं रिहा होंगे जेसिका लाल-तंदूर हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा और सुशील शर्मा

जेसिका लाल और तंदूर हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा और सुशील शर्मा अभी सलाखों के पीछे ही रहेंगे क्योंकि तिहाड़ जेल के रिव्यू बोर्ड ने इन दोनों की रिहाई का आग्रह ठुकरा दिया है.

पू्र्व में कांग्रेस का नेता रहा सुशील शर्मा 1995 में अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या का दोषी है. पत्नी की हत्या कर उसने शव को कई टुकड़ों में काट दिया और फिर उसे एक मशहूर रेस्रां के तंदूर में जलाने की कोशिश की. शुरुआती सुनवाई में एक निचली अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई जिसे बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी यथावत रखा.

हालांकि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया. 20 साल जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद 2015 में सुशील शर्मा को पहली बार पैरोल मिली. शर्मा ने सरकार से कुछ पहले रिहा कर देने की गुहार लगाई है जिसकी अर्जी कई वर्षों से लंबित है.

मनु शर्मा उर्फ सिद्धांत वशिष्ठ पूर्व कांग्रेस नेता विनोद शर्मा का बेटा है जो जेसिका लाल की हत्या का दोषी है और फिलहाल जेल की सजा काट रहा है. 1999 में दक्षिण दिल्ली के एक पब में पार्टी के दौरान जेसिका लाल की हत्या कर दी गई थी. फरवरी 2006 में एक ट्रायल कोर्ट ने मनु शर्मा को बरी कर दिया लेकिन उसी साल हाई कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया. फिर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने मनु शर्मा की सजा को बरकरार रखा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, इस साल मार्च में जेसिका लाल की बहन सबरीना लाल ने तिहाड़ जेल के वेलफेयर अधिकारी को पत्र लिखकर बताया था कि मनु शर्मा की रिहाई पर उन्हें कोई एतराज नहीं है.

तिहाड़ जेल के रिव्यू बोर्ड ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे 154 दोषियों की अर्जी पर गौर किया. बोर्ड ने इनमें 25 दोषियों को पहले रिहा करने की सिफारिश कर दी है, जबकि 129 दोषियों की अर्जी ठुकरा दी गई है.

इस रिव्यू बोर्ड के अध्यक्ष दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन हैं. इस पैनल में तिहाड़ जेल के महानिदेशक, दिल्ली के कानून सचिव, दिल्ली के गृह सचिव, दिल्ली पुलिस के एक संयुक्त आयुक्त, एक सेशन जज और सामाजिक कल्याण विभाग के एक अधिकारी सदस्य के तौर पर शामिल हैं.

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