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जेसिका लाल मर्डर: मुख्य आरोपी के जेल से बाहर आने की खबरों से मचा हड़कंप!

सुगबुगाहट है कि जेसिका लाल को गोली मारने वाला मुख्य आरोपी सजायाफ्ता कैदी सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा कभी भी जेल से बाहर आ सकता है

Updated On: Jan 04, 2018 08:28 AM IST

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan

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जेसिका लाल मर्डर: मुख्य आरोपी के जेल से बाहर आने की खबरों से मचा हड़कंप!

दिल्ली पुलिस के कई आला-अफसरों को अप्रैल 1999 में पसीना ला देने वाला हाई-प्रोफाइल मॉडल जेसिका लाल मर्डर केस को लेकर देश में एक बार चर्चाओं का बाजार फिर से गरम है. अब सुगबुगाहट है कि जेसिका लाल को गोली मारने वाला मुख्य आरोपी सजायाफ्ता कैदी सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा कभी भी जेल से बाहर आ सकता है. हालांकि मनु शर्मा के सलाखों से बाहर लाए जाने के पक्ष में फिलहाल दिल्ली सरकार का रुख अभी साफ नहीं है.

रिहाई में सिवाय सरकार के और कोई नहीं बाधा

चर्चा है कि जो सजा उसे दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी, उसकी न्यूनतम अवधि उसने तिहाड़ जेल की सलाखों के अंदर गुजार ली है. जेल में बिताई इस अवधि में मनु शर्मा का चाल-चलन व्यवहार संतोषजनक रहा है. जेल के अंदर सजा काटने के दौरान उस पर कभी कोई गंभीर आरोप नहीं लगा है. सिद्धार्थ वशिष्ठ ट्रस्ट के जरिए उसने जेल के बाहर और जेल के अंदर समाज सेवा करके अच्छे काम और जरूरतमंदों की मदद की है.

ट्रस्ट के जरिए उसने जेल में बंद कैदियों और उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पर खासा काम किया है. जेल के भीतर उसका कभी किसी से कोई विवाद भी सामने नहीं आया. इन्हीं तमाम बिंदुओं के मद्देनजर माना जा रहा है कि अब तक शांतिपूर्ण तरीके से उसने जेल की न्यूनतम (उम्र कैद की सजा में से) सजा काटी है. ऐसे में अब जेल प्रशासन के जरिए यह सजायाफ्ता कैदी रिहाई के लिए दिल्ली सरकार का दरवाजा दोबारा खटखटा सकता है.

सलाखों से कब होगा बाहर, सिर्फ सरकार को पता

कानूनी जानकारों के मुताबिक, कोई भी सजायाफ्ता कैदी तय सजा की न्यूनतम अवधि अगर बिना किसी विवाद के पूरी कर लेता है तो वह जेल मैनुअल के मुताबिक राज्य सरकार से खुद की जेल से नियमित रिहाई और शेष बची सजा माफ करने की फरियाद कर सकता है.

सजायाफ्ता कैदी को हमेशा के लिए या बची हुई बाकी सजा माफ कराके उसे जेल से बाहर लाने की सिफारिश करना और न करना राज्य सरकार पर निर्भर करता है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक कुछ समय पहले मनु शर्मा ने जेल अधिकारियों के जरिए जेल से रिहाई के लिए दिल्ली सरकार के सामने आवेदन किया था.

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सूत्रों के अनुसार कुछ मुद्दों पर कानून विशेषज्ञों, जेल प्रशासन और दिल्ली सरकार के गृह विभाग के आला-अफसरों के बीच सहमति नहीं बन सकी. लिहाजा मनु शर्मा को जेल से बाहर लाए जाने के प्रयास विफल हो गए. हालांकि जेल मैनुअल के मुताबिक, जेल प्रशासन की अब यह जिम्मेदारी बनती है कि वो जब-जब दिल्ली सरकार के साथ कैदियों की रिहाई के लिए मीटिंग में शामिल हो, तब-तब मनु शर्मा के जेल में अच्छे चाल-चलन के मद्देनजर उसकी बाकी सजा माफ करने की सिफारिश के साथ सरकार के सामने उसकी रिहाई के लिए प्रस्ताव लेकर पहुंचे.

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मॉडल जेसिका लाल मर्डर की वो रात

29-30 अप्रैल 1999 के तड़के करीब 2 बजे की वो रात थी. जगह थी दक्षिणी दिल्ली में कुतुब मीनार से चंद फर्लांग की दूरी पर स्थित गैर-कानूनी रूप से चलने वाला टेमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट. गैर-कानूनी इसलिए क्योंकि जेसिका लाल के मर्डर वाली रात तक रेस्टोरेंट के पास शराब परोसने का लाइसेंस ही नहीं था. जबकि, जिस रात मशहूर मॉडल जेसिका लाल की मनु शर्मा ने गोली मार कर हत्या की. उस रात शराब और शबाब की महफिल में कुछ आला-पुलिस अफसरों की वहां मौजूदगी को लेकर भी खासा बवाल मचा था.

घटनाक्रम के मुताबिक अवैध रूप से चल रहे 'बियर-बार' में रात साढ़े बारह बजे तक शराब परोसकर उसे बंद कर दिया गया था. पुलिस फाइलों में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक आधी रात के बाद तीन दोस्तों के साथ वहां मनु शर्मा पहुंचा और मॉडल जेसिका लाल से शराब मांगी. जेसिका के मना करने पर उसे शराब देने के बदले 1000 रुपए का लालच दिया गया.

दोबारा इंकार करने पर जेसिका के सिर में गोली मार कर उसे मौके पर ही ढेर कर डाला गया. जेसिका की हत्या के बाद मनु शर्मा मौके से तीनों दोस्तों के साथ भाग गया. थू-थू होती देख दिल्ली पुलिस ने अपनी खाल बचाने के लिए 4 मई 1999 को दो आरोपियों को पकड़ लिया. 6 मई को मास्टर माइंड मनु शर्मा भी जैसे-तैसे करके दबोच लिया.

कोर्ट में दिल्ली पुलिस की थकाने वाली सुस्त कवायद

3 अगस्त 1999 को दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज हत्याकांड की पहली चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की. सुनवाई के दौरान 32 गवाह मुकर गए. जबकि 21 फरवरी 2006 को ट्रायल कोर्ट ने 12 में से 9 आरोपियों को बरी कर दिया. इस नाकारापन के लिए अदालत ने दिल्ली पुलिस की खूब फजीहत की. दिल्ली पुलिस के सुस्त रवैये से अदालत ने साफ कहा कि पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियार तक बरामद नहीं कर सकी. साथ ही घटनाक्रम की कड़ियों को क्रमवार जोड़ पाने में दिल्ली पुलिस पूरी तरह विफल रही.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

जब पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी आहत होकर कराह उठे

अदालत से आरोपियों की लंबी फौज के बरी होने और तमाम गवाहों के मुकर जाने से भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वीएन खरे भी खुद को आहत होने से नहीं बचा पाए. श्री खरे ने अदालत और जांच एजेंसी (दिल्ली पुलिस) को खुले शब्दों में आड़े हाथ ले लिया. उनका कहना था कि जब जांच एजेंसी, वकील, सबूत, गवाह फेल हो जाएं, तो फिर अदालत को कानून के हिसाब से जो नजर आए, उसे देखकर उस पर अमल करना चाहिए. अदालत को सच तक पहुंचने की खुद कोशिश करनी चाहिए. न कि अदालत को सिर्फ गवाह, सबूत और जांच एजेंसी पर आश्रित हो जाना चाहिए. जैसा कि इस केस में (जेसिका लाल मर्डर) हुआ है.

ऐसे पलटा केस और हाईकोर्ट का फैसला बना नजीर

पूर्व मुख्य न्यायाधीश की तल्ख टिप्पणी और पब्लिक की विरोधी आवाज ने एक लम्हे में पूरे मामले को ही पलट दिया. 9 सितंबर 2006 को एक मशहूर मैगजीन ने गवाहों और मामले से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कुछ लोगों का ‘स्टिंग- ऑपरेशन’ कर डाला. ऑपरेशन में साबित हो गया कि केस की मिट्टी पलीद कराने के लिए गवाहों की खरीद-फरोख्त की गई. इस भंडाफोड़ के चलते मुख्य आरोपी मास्टर माइंड मनु शर्मा के पिता को उस वक्त हरियाणा सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ गया.

15 दिसंबर 2006 को दिल्ली हाईकोर्ट ने मनु शर्मा को दोषी करार दिया. लोअर कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) से खफा हाईकोर्ट ने निचली अदालत और उसके जज एस एल भयाना पर कठोर टिप्पणी भी की. 20 दिसंबर 2006 को दिल्ली हाईकोर्ट ने मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुना दी. 19 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा.

एक गोली से उड़ाई, दूसरी मॉडल से शादी रचाई

उम्र कैद की सजा काटने के दौरान मनु शर्मा फिर से सुर्खियों में आ गया. वजह थी एक मॉडल (जेसिका लाल) को गोली से उड़ाने के आरोपी का दूसरी मॉडल से शादी की खबरें. यह दूसरी मॉडल मुंबई बेस्ड बताई गई. अप्रैल 2015 में छिपते-छिपाते परोल पर जेल से बाहर आकर मनु शर्मा ने 10 साल पुरानी दोस्त से शादी कर ली.

काट रहा था उम्रकैद की सजा,पकड़ा गया 'पब' में

पुरानी मॉडल दोस्त से शादी करके ही मनु शर्मा को जमाने भर की खुशियां नसीब नहीं हो गईं. दुश्वारियां उसका कदम-कदम पर पीछा करती रहीं. या यूं कहूं कि, आगे-आगे दुश्वारियां और पीछे-पीछे मनु शर्मा, तो गलत नहीं होगा. नवंबर 2009 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार ने मनु शर्मा को परोल पर जेल से रिहा किया. परोल के दौरान ही पता चला कि, सजायाफ्ता मनु शर्मा एक आला पुलिस अफसर (पुलिस कमिश्नर स्तर के आईपीएस) के बिगड़ैल बेटे के साथ प्रधानमंत्री निवास के पास स्थित एक होटल के पब में नाच-गा रहा था. पुलिस अफसर और शीला सरकार की छीछालेदर हुई तो परोल बीच में ही खत्म करके मनु को दोबारा तिहाड़ जेल भेज दिया गया.

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ऐसे आ सकता है जेल से बाहर, बशर्ते सरकार माने तो

सूत्रों की मानें तो मनु शर्मा अब कभी भी जेल से बाहर आ सकता है. कानूनी विशेषज्ञों की राय के मुताबिक मनु शर्मा को जो उम्रकैद की सजा हुई, उसकी न्यूनतम अवधि (14 साल) वह सलाखों के अंदर काट चुका है. तिहाड़ की चहारदीवारी के अंदर भी उसने कोई वो काम नहीं किया, जिससे वो बिगड़ैल कैदी साबित हुआ हो.

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जेल मैनुअल के अनुसार ऐसे कैदी की फाइल उसके जेल में बिताए गए रिकॉर्ड के साथ राज्य सरकार के समक्ष पेश की जाती है. ऐसे मामलों के लिए विशेष समिति चाहे तो जेल प्रशासन की सिफारिश पर सकारात्मक रवैया अपना कर आरोपी (मनु शर्मा) की शेष सजा माफ करके सलाखों से रिहा करवाए जाने की सिफारिश कर सकती है. हालांकि मनु शर्मा की बाकी बची सजा को माफ करके जेल से रिहाई की पहली सिफारिश को दिल्ली सरकार कुछ समय पहले वापस लौटा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक अब मनु शर्मा की फाइल उस स्टेज पर है कि जब भी सरकार उसके आवेदन पर सकारात्मक रवैया अपना लेगी तभी वो जेल से बाहर निकल आएगा.

...तो पूछूंगी तुझे गलती का एहसास हुआ या नहीं?

बहन का ह्त्यारा उम्रकैद की सजा काटकर कभी भी जेल से बाहर आ सकता है. उसकी रिहाई की अटकलों का बाजार गर्म है. अगर मनु शर्मा सामने आएगा तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी? जेहन में क्या कुछ सवाल कौंधेंगे? पूछने पर जेसिका लाल की छोटी बहन सबरीना लाल की मुठ्ठियां भिंच जाती हैं.

कुछ रुककर बोलती हैं- क्या पूछूंगी? पहले नौजवान बहन (जेसिका लाल) गंवा दी. फिर मां (मे लाल मृत्यु 2002) और 2006 में पिता अजीत कुमार लाल को खो दिया. रही सही कसर कोर्ट कचहरी थाने-चौकी के चक्करों ने पूरी कर दी. सोना (जेसिका लाल को घर में इसी नाम से पुकारते थे) के हत्यारे (सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मुन शर्मा) को उम्रकैद की सजा दिलाने की कसम खाई थी. उम्रकैद कराके ही सांस ली. पहली बात तो मैं उसका इस जिंदगी में मुंह भला देखना ही क्यों चाहूंगी? फिर भी बदकिस्मती से अगर कभी सामने पड़ गया तो बस यही पूछूंगी कि तुझे (मनु शर्मा) उम्रकैद की सजा काटने के बाद गलती का एहसास हुआ या नहीं?

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