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जेसिका लाल मर्डर केस: क्या अब जेल से बाहर आ जाएगा मनु शर्मा?

मनु शर्मा को जो सजा दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी, उसकी न्यूनतम अवधि उसने तिहाड़ जेल में गुजार ली है और इस अवधि में उसका चाल-चलन व्यवहार संतोषजनक रहा है

Updated On: Apr 23, 2018 12:19 PM IST

FP Staff

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जेसिका लाल मर्डर केस: क्या अब जेल से बाहर आ जाएगा मनु शर्मा?

देश के हाई-प्रोफाइल जेसिका लाल मर्डर केस के दोषी मनु शर्मा को रिहा करने की खबरें कई महीनों से चर्चा में हैं लेकिन अब जेसिका लाल की बहन सबरीना लाल ने भी कहा दिया है कि उन्होंने शर्मा को माफ कर दिया है और उन्हें शर्मा की रिहाई से कोई समस्या नहीं हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सबरीना लाल ने कहा कि उन्होंने सुना है कि मनु शर्मा का व्यवहार में जेल काफी अच्छा रहा है और उसने अपने चैरिटी ट्रस्ट के माध्यम से जेल के अंदर और बाहर लोगों की मदद की है. ये सुधार की निशानी है इसलिए उन्हें मनु शर्मा की रिहाई से कोई समस्या नहीं है.

रिहाई की है पहले से चर्चा

पिछले काफी समय से चर्चा है कि मनु शर्मा को जो सजा दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी, उसकी न्यूनतम अवधि उसने तिहाड़ जेल की सलाखों के अंदर गुजार ली है. जेल में बिताई इस अवधि में मनु शर्मा का चाल-चलन व्यवहार संतोषजनक रहा है. जेल के अंदर सजा काटने के दौरान उस पर कभी कोई गंभीर आरोप नहीं लगा है. सिद्धार्थ वशिष्ठ ट्रस्ट के जरिए उसने जेल के बाहर और जेल के अंदर समाज सेवा करके अच्छे काम और जरूरतमंदों की मदद की है.

ट्रस्ट के जरिए उसने जेल में बंद कैदियों और उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पर खासा काम किया है. जेल के भीतर उसका कभी किसी से कोई विवाद भी सामने नहीं आया. इसलिए माना जा रहा है कि अब तक शांतिपूर्ण तरीके से उसने जेल की न्यूनतम (उम्र कैद की सजा में से) सजा काटी है. ऐसे में अब जेल प्रशासन के जरिए यह सजायाफ्ता कैदी रिहाई के लिए दिल्ली सरकार का दरवाजा दोबारा खटखटा सकता है.

सजायाफ्ता कैदी को हमेशा के लिए या बची हुई बाकी सजा माफ कराके उसे जेल से बाहर लाने की सिफारिश करना और न करना राज्य सरकार पर निर्भर करता है. और सूत्रों के हिसाब से कुछ समय पहले मनु शर्मा ने जेल अधिकारियों के जरिए जेल से रिहाई के लिए दिल्ली सरकार के सामने आवेदन किया था.

सिफारिश लौटा चुकी है दिल्ली सरकार, लेकिन अब बदल सकती हैं चीजें

जेल मैनुअल के अनुसार ऐसे कैदी की फाइल उसके जेल में बिताए गए रिकॉर्ड के साथ राज्य सरकार के समक्ष पेश की जाती है. ऐसे मामलों के लिए विशेष समिति चाहे तो जेल प्रशासन की सिफारिश पर सकारात्मक रवैया अपना कर आरोपी (मनु शर्मा) की शेष सजा माफ करके सलाखों से रिहा करवाए जाने की सिफारिश कर सकती है. हालांकि मनु शर्मा की बाकी बची सजा को माफ करके जेल से रिहाई की पहली सिफारिश को दिल्ली सरकार कुछ समय पहले वापस लौटा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक अब मनु शर्मा की फाइल उस स्टेज पर है कि जब भी सरकार उसके आवेदन पर सकारात्मक रवैया अपना लेगी तभी वो जेल से बाहर निकल आएगा.

सूत्रों के अनुसार कुछ मुद्दों पर कानून विशेषज्ञों, जेल प्रशासन और दिल्ली सरकार के गृह विभाग के आला-अफसरों के बीच सहमति नहीं बन सकी. लिहाजा मनु शर्मा को जेल से बाहर लाए जाने के प्रयास विफल हो गए. हालांकि जेल मैनुअल के मुताबिक, जेल प्रशासन की अब यह जिम्मेदारी बनती है कि वो जब-जब दिल्ली सरकार के साथ कैदियों की रिहाई के लिए मीटिंग में शामिल हो, तब-तब मनु शर्मा के जेल में अच्छे चाल-चलन के मद्देनजर उसकी बाकी सजा माफ करने की सिफारिश के साथ सरकार के सामने उसकी रिहाई के लिए प्रस्ताव लेकर पहुंचे.

कब, क्या, कैसे हुआ?

29-30 अप्रैल 1999 के तड़के करीब 2 बजे दक्षिणी दिल्ली में कुतुब मीनार से चंद फर्लांग की दूरी पर स्थित गैर-कानूनी रूप से चलने वाला टेमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में ये हत्या हुई थी. उस रात तक इस रेस्टोरेंट के पास शराब परोसने का लाइसेंस नहीं था.

घटनाक्रम के मुताबिक, अवैध रूप से चल रहे 'बियर-बार' में रात साढ़े बारह बजे तक शराब परोसकर उसे बंद कर दिया गया था. पुलिस फाइलों में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक आधी रात के बाद तीन दोस्तों के साथ वहां मनु शर्मा पहुंचा और मॉडल जेसिका लाल से शराब मांगी. जेसिका के मना करने पर उसे शराब देने के बदले 1000 रुपए का लालच दिया गया.

दोबारा इंकार करने पर जेसिका के सिर में गोली मारकर उसे मौके पर ही ढेर कर डाला गया. जेसिका की हत्या के बाद मनु शर्मा मौके से तीनों दोस्तों के साथ भाग गया. थू-थू होती देख दिल्ली पुलिस ने 4 मई, 1999 को दो आरोपियों को पकड़ लिया. 6 मई को मास्टर माइंड मनु शर्मा भी जैसे-तैसे करके दबोच लिया गया.

15 दिसंबर, 2006 को दिल्ली हाईकोर्ट ने मनु शर्मा को दोषी करार दिया. 20 दिसंबर, 2006 को कोर्ट ने मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुना दी. 19 अप्रैल, 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा.

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