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JEE- मेन परीक्षा में हुआ बड़ा बदलाव, अब ऐसे बनेगी मेरिट लिस्ट

नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) साल में दो बार परीक्षा का आयोजन करेगी, सिर्फ इतना ही नहीं परीक्षा 14 दिनों तक चलेगी और हर दिन में कई सेशन्स होंगे

Updated On: Sep 06, 2018 11:37 AM IST

FP Staff

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JEE- मेन परीक्षा में हुआ बड़ा बदलाव, अब ऐसे बनेगी मेरिट लिस्ट

अगले साल से इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी समेत इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन में दो बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. पहला बदलाव इसकी रैंकिंग से संबंधित है जबकि दूसरा जेईई परीक्षा के फॉर्मेट या पैटर्न से. बता दें कि पहले रैंकिंग के लिए छात्रों द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों से फैसला किया जाता था लेकिन अब पर्सेंटाइल स्कोर पर रैंकिंग तय होगी. वहीं परीक्षा की बात करें तो ये पूरी तरह से कंप्यूटर पर आधारित होगी और नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) साल में दो बार इसका आयोजन करेगी. सिर्फ इतना ही नहीं परीक्षा 14 दिनों तक चलेगी और हर दिन में कई सेशन्स होंगे.

एचआरडी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से जेईई-मेन की परीक्षा कंप्यूटर आधारित हो जाएगी और परीक्षा का आयोजन साल में दो बार जनवरी और अप्रैल महीने में होगा. छात्रों के पास दोनों में से किसी भी एक परीक्षा में बैठने का ऑप्शन होगा. परीक्षा का आयोजन 14 दिनों तक होगा और हर दिन कई सेशन्स होंगे. ऐसा करने के पीछे परीक्षा के दौरान धोखाधड़ी और गड़बड़ी को रोकने का उद्देश्य है.

ऐसा होगा परीक्षा का फॉर्मेट

वहीं परीक्षा के फॉर्मेट के बारे में बताते हुए एचआरडी मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'हर सेशन में छात्रों को सवालों के अलग सेट्स मिलेंगे। कोशिश रहेगी कि सभी सत्रों के पेपर में एक जैसे सवाल पूछे जाएं. हालांकि किसी सत्र का पेपर ज्यादा कठिन तो किसी का थोड़ा आसान हो सकता है. प्रश्नपत्रों में कठिनाई के स्तर से निपटने के लिए नई व्यवस्था की गई है. प्रत्येक सेशन का पर्सेंटाइल स्कोर उस खास सेशन में छात्रों के प्रदर्शन के अनुसार होगा.'

अधिकारी ने बताया कि कठिन प्रश्नों के अलग-अलग स्तर की स्थिति में कुछ छात्रों को ज्यादा मुश्किल सवालों वाले प्रश्नपत्र के सेट्स मिल सकते हैं जिससे उनको कम मार्क्स भी मिल सकते हैं. ऐसे में पर्सेंटाइल स्कोर के आधार पर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि परीक्षा के कठिनाई स्तर की वजह से किसी छात्र के साथ कोई अन्याय न हो.

एचआरडी मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली में अंडरग्रैजुएट-एमबीबीएस टेस्ट के लिए पर्सेंटाइल स्कोर के आधार पर जिस तरह की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है, उसी प्रक्रिया का एनटीए स्कोर तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

रैंकिंग के लिए एनटीए स्कोर की ली जाएगी मदद

जेईई मेन में छात्रों की रैंकिंग के लिए एनटीए स्कोर का सहारा लिया जाएगा. बता दें कि एनटीए स्कोर सभी चरणों में आयोजित परीक्षा के पर्सेंटाइल स्कोर को जोड़कर निकाला जाएगा. पहले सभी सेशन का अलग-अलग पर्सेंटाइल स्कोर निकाला जाएगा, फिर उन पर्सेंटाइल स्कोर को एक साथ मिलाकर ओवरऑल मेरिट लिस्ट या रैंकिंग लिस्ट तैयार की जाएगी. अगर दो या उससे ज्यादा छात्रों का बराबर पर्सेंटाइल हुआ तो जिस छात्र के मैथ, फीजिक्स, केमिस्ट्री सब्जेक्ट्स में ज्यादा पर्सेंटाइल होंगे, उसका पर्सेंटाइल ज्यादा माना जाएगा.

वहीं अगर मैथ्स, फीजिक्स, केमिस्ट्री के पर्सेंटाइल के बाद भी ओवरऑल पर्सेंटाइल बराबर रहा तो जिस छात्र की उम्र ज्यादा होगी, उसका पर्सेंटाइल ज्यादा माना जाएगा. फिर भी पर्सेंटाइल टाई रहा तो ज्वाइंट रैंकिंग दी जाएगी. एचआरडी मिनिस्ट्री के अधिकारी के अनुसार आईआईटीज (रूड़की, कानपुर, दिल्ली, गुवाहाटी), आईआईएम-लखनऊ, एनआईटीज, यूजीसी, आईएएसआरआई (पूसा) और एम्स, दिल्ली के एक्सपर्ट्स का एक कोर ग्रुप बनाया जाएगा. उनको एनटीए स्कोर की गणना की पूरी प्रक्रिया एवं व्यवस्था को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी.

एनटीए अधिकारी के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा. पहले हिस्से में हर सेशन्स में छात्रों को बराबरी में बांटना, अलग अलग सेशन्स का अलग रिजल्ट बनाना और आखिर में एनटीए स्कोर को जोड़कर मेरिट या रेंकिंग लिस्ट बनाना.

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