S M L

JNU छात्रसंघ चुनाव: चुनाव प्रचार में एकसाथ उतरे तीन मुख्यमंत्री

जेएनयू छात्रसंघ के लिए 14 तारीख को मतदान होगा और उसी रात वोटों की गिनती भी शुरू हो जाएगी. 16 सितंबर तक अंतिम परिणाम आने की उम्मीद है

Updated On: Aug 30, 2018 07:26 AM IST

Jainendra Kumar, Ashima Kumari

0
JNU छात्रसंघ चुनाव: चुनाव प्रचार में एकसाथ उतरे तीन मुख्यमंत्री

इस साल जेएनयू छात्रसंघ चुनाव की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाइए पोस्ट डिनर टॉक में एबीवीपी ने तीन राज्यों के मुख्यमंत्री को एक साथ चुनाव प्रचार में उतार दिया. ठीक उसी समय एनएसयूआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और छात्र आरजेडी ने पूर्व जल संसाधन मंत्री जय प्रकाश यादव को अपने समर्थन में बुलाया. सत्ता से बाहर की सभी पार्टियां अपनी मजबूत दावेदारी देने की कोशिश कर रही है.

चुनाव का बिगुल बज चुका है. सत्ताधारी लेफ्ट जेएनयू के सबसे बड़े स्कूल एसएल में काउंसलर रिपोर्ट पारित करवाने में असफल रही. भले ही रणनीति की गड़बड़ी के कारण यह हार हुई लेकिन इस हार ने विरोधियों के लिए संजीवनी बूटी का काम किया है. वैसे यह भी सच है कि अगर लेफ्ट यूनिटी ने असली  एकता दिखाई तो एक बार फिर से सबको निराश होना पड़ेगा.

बापसा की सनसनी

कैंपस में कुछ साल से बापसा नई सनसनी रही है. उसने लेफ्ट यूनिटी और एबीवीपी के बीच तीसरा कोण बनाया है. कैंपस के पहले सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम के जरिए उसने भी अपने आपको इस मुहिम में शामिल कर लिया है. छात्र राजद पहली बार इस कैंपस में अपनी उपस्थिति दर्ज करने जा रही है. पोस्ट डिनर टॉक के जरिए उसने भी अपनी दावेदारी दे दी है.

कैंपस की राजनीति की यह ख़ासियत रही है कि जिस उम्मीदवार को पार्टी चुनाव लड़ाना चाहती है उसका चेहरा हर कार्यक्रम में आगे किया जाने लगता है. खास तौर पर अध्यक्ष पद पर लड़ने वाले उम्मीदवार. इसी आधार पर एनएसयूआई से विकास यादव, लेफ्ट यूनिटी से बालाजी, एबीवीपी से ललित पाण्डेय. बापसा से प्रवीण थल्लापल्ली और छात्र राजद से जयंत कुमार जिज्ञासु के चुनाव लड़ने की उम्मीद की जा रही है. वैसे इसमें बदलाव की संभावना भी बनी रहती है.

लागू हो चुकी है आचार संहिता

आंशिक आचार संहिता लग चुकी है. वैसे मुख्य चुनाव अधिकारी की अनुमति से अभी भी बाहर से लोग चुनाव प्रचार में आ रहे हैं. भले ही उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई है लेकिन सभी पार्टी अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटी है .

एबीवीपी और बीजेपी इस चुनाव को बहुत गंभीरता से ले रही है. उसका एकमात्र लक्ष्य है जेएनयू में जीत हासिल करना और पूरे देश को एक मैसेज देना कि हमने आखिरी किला भी फतह कर लिया. साथ ही ज्ञान के गढ़ में जीत से वह अपने प्रति एक विश्वसनीयता भी हासिल करना चाहती है.

इसलिए यह पहली बार हो रहा है जब असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानन्द सोनोवाल, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, मणिपुर के मुख्यमंत्री श्री एन. बिरेन सिंह एक साथ जेएनयू आए . तीनों पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्री है और इसका मैसेज भी साफ है.

क्या है मकसद?

एबीवीपी नार्थ ईस्ट का कार्ड खेल चुकी है. जेएनयू छात्रसंघ का चुनाव खुद जेएनयू के छात्र करवाते हैं. इसमें प्रशासन की भूमिका लगभग नहीं होती है. इस बार चुनाव समिति के सदस्यों ने हिमांशु कुलश्रेष्ठ को मुख्य निर्वाचन अधिकारी चुना है. चुनाव समिति ने अपना नोटिस बोर्ड कैंपस के महत्वपूर्ण जगहों पर लगा दिया है जहां चुनाव आयोग से जुड़ी हर सूचना चस्पा की जानी है.

चुनाव आयोग ने सर्वदलीय बैठक के बाद चुनाव की पूरी रूपरेखा जारी कर दी है. 14 सितंबर को चुनाव होगा जबकि नामांकन 4 सितंबर से भरे जाएंगे. 5 सितंबर को ही अलग-अलग समय में योग्य प्रत्याशी की लिस्ट, नाम वापसी और फाइनल सूची जारी होगी.

6, 7 और 10 सितंबर को स्कूल का जीबीएम (जनरल बॉडी मीटिंग)  होगा. 11 सितंबर को यूजीबीएम (यूनिवर्सिटी जनरल बॉडी मीटिंग) होगा जिसे आप एक तरह से प्रेसिडेंटशियल डिबेट का रिहर्सल कह सकते हैं. इसमें उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी छात्र के सामने अपना एजेंडा रखते हैं.

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण प्रेजिडेंशियल डिबेट 12 सितंबर को रात 9 बजे से झेलम लॉन में होगा. यह रात भर चलने वाला कार्यक्रम होता है इसलिए अगला दिन आराम का होता है  इसे 'नो कैम्पेन डे ' कहते हैं. 14 तारीख को मतदान होगा और उसी रात वोटों की गिनती भी शुरू हो जाएगी. 16 सितंबर तक अंतिम परिणाम आने की उम्मीद है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi