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उग्रवाद की कमर टूट चुकी है, राजनीतिक पहल के लिए वक्त माकूल: सेना कमांडर

दक्षिण कश्मीर को जम्मू कश्मीर में उग्रवाद का केंद्र माना जाता है और पिछले साल यहां सुरक्षा बलों पर हमले की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई थीं

Bhasha Updated On: Sep 27, 2017 04:46 PM IST

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उग्रवाद की कमर टूट चुकी है, राजनीतिक पहल के लिए वक्त माकूल: सेना कमांडर

उग्रवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित दक्षिण कश्मीर में सेना के कमांडर का मानना है कि कश्मीर में सशस्त्र उग्रवाद की कमर टूट चुकी है और अब बहुत ज्यादा 'राजनीतिक दूरंदेशी' की जरूरत है ताकि दशकों पुरानी अलगाववादी समस्या का स्थायी हल सुनिश्चित किया जा सके.

दक्षिण कश्मीर के पांच जिलों में उग्रवाद के खिलाफ अभियान चलाने वाली विक्टर फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल बी.एस राजू ने एक मुलाकात में कहा, 'अब ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां उग्रवादियों या अलगाववादियों का प्रभाव हो. उग्रवादी अब अपने बचाव में लगे हैं.'

उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि उग्रवादी संगठनों में अब और नई भर्तियां न हों और लोगों को इस बात का विश्वास दिलाया जाए कि सेना वहां उनकी मदद के लिए है. उन्होंने बताया कि इस काम के लिए उनके सैनिकों ने स्कूलों और कालेजों में विभिन्न कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं.

अब तक 73 उग्रवादियों को ढेर कर दिया गया है

श्रीनगर से 33 किलोमीटर के फासले पर अवंतीपुरा स्थित विक्टर फोर्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ राजू ने कहा, 'सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादातर लोग समाधान चाहते हैं. वह हिंसा के इस दुष्चक्र से निकलना चाहते हैं.'

दक्षिण कश्मीर को जम्मू कश्मीर में उग्रवाद का केंद्र माना जाता है और पिछले साल यहां सुरक्षा बलों पर हमले की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई थीं. इस साल तस्वीर बदली है और अकेले इस इलाके में ही अब तक 73 उग्रवादियों को ढेर कर दिया गया है. यह पिछले सालों के औसत आंकड़े से लगभग दुगुना है. यह माना जा रहा है कि तकरीबन 120 सशस्त्र उग्रवादी बचे हैं, ज्यादा से ज्यादा 150 भी हो सकते हैं.

इस साल मार्च में कार्यभार संभालने वाले राजू कहते हैं, 'इन दिनों वह सेना को सीधे निशाना नहीं बना रहे हैं. वह कभी कभार मुखबिर बताकर नागरिकों को निशाना बन रहे हैं.'

राजू कहते हैं, 'हालात अब उस मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां राजनीतिक पहल की शुरूआत की जा सकती है, और यह देखकर अच्छा लग रहा है कि इस दिशा में प्रयास होने लगे हैं.' उन्होंने हाल में केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी के बड़े नेताओं के कश्मीर के सभी पक्षों से बात करने की इच्छा जताने वाले बयानात का जिक्र करते हुए यह बात कही. अलगाववादी नेता मीरवायज उमर फारूक सहित कुछ अन्य ने भी केंद्र व राज्य की इस पहल का स्वागत किया है.

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