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जम्मू-कश्मीर में मीडिया के OB वैन पर हमला, जान हथेली पर रखकर करनी पड़ रही है पत्रकारिता

अक्सर जब हम किसी खबर को पढ़ते हैं या फिर उस खबर से जुड़ा कोई वीडियो देखते हैं तो हमें इस बात का अहसास तक नहीं होता कि उस खबर को लाने में पत्रकारों ने कितनी मशक्कत की होगी

Updated On: Nov 01, 2018 12:47 PM IST

FP Staff

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जम्मू-कश्मीर में मीडिया के OB वैन पर हमला, जान हथेली पर रखकर करनी पड़ रही है पत्रकारिता
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पिछले कुछ दिनों से जम्मू कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में मुठभेड़ की खबर आ रही है. गुरुवार को भी बडगाम के जगू एरिजल इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठबेड़ की खबर आई, जिसमें दो आतंकी मारे गए. इसके बाद न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो जारी किया, जिसमें इलाके के लोग एएनआई की ओबी वैन पर पत्थर फेंकते हुए नजर आए.

बताया जा रहा है कि आतंकियों की गोली मारकर हत्या करने के बाद इलाके के लोगों ने गाड़ियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. इस दौरान ओबी वैन के अंदर लोग भी मौजूद थे. हालांकि उनमें से किसी को चोट पहुंची है या नहीं, इस बात का पता अभी नहीं चल पाया है लेकिन इस दौरान पत्थरबाजी के चलते वैन का शीशा भी टूट गया.

कश्मीर में पत्रकारिता करना कभी आसान नहीं रहा है. लेकिन पिछले दिनों देश के बाकी हिस्सों में भी मीडिया पर हमले की खबरें आई हैं. इन घटनाओं से पता चलता है कि मीडिया का कामकाज कितना मुश्किल होता जा रहा है. पत्रकारों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है.

मंगलवार को भी पत्रकारों की एक टीम पर हमले की एक खबर सामने आई. छत्तीसगढ़ चुनाव की कवरेज पर गई दूरदर्शन की एक टीम पर नक्सली हमला हो गया था. नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा में हुए इस हमले में दूरदर्शन के एक कैमरामैन की मौत हो गई. जबकि टीम के रिपोर्टर और दो कैमरा असिस्टेंट किसी तरह बच पाए. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो बुधवार को काफी वायरल हो रहा था, जिसे देखकर साफतौर पर समझा जा सकता है कि ऐसे क्षेत्रो में रिपोर्टिंग कितना मुश्किल है.

दरअसल ये वीडियो हमले के दौरान घायल हुए कैमरा असिस्टेंट मयूर शर्मा का है. इस वीडियो में वे मौत को अपने सामने देख भावुक हो गए और अपने परिवार को याद करने लगे. इस वीडियो में वे अपने परिवार को बेहद भावुक संदेश देते नजर आ रहे हैं. शर्मा ने ये वीडियो तब बनाई जब वो घायल अवस्था में पड़े हुए थे और उन्हें लगने लगा कि वो शायद नहीं बच पाएंगे. हालांकि खुशकिस्मती से उनकी जान बच गई.

अक्सर जब हम किसी खबर को पढ़ते हैं या फिर उस खबर से जुड़ा कोई वीडियो देखते हैं तो हमें इस बात का अहसास तक नहीं होता कि उस खबर को लाने में पत्रकारों ने कितनी मशक्कत की होगी. खास कर तब, जब वो खबर किसी आतंकी हमले से जुड़ी हुई हो. आज के दौर में ग्राउंड रिपोर्टिंग कर मामले की तह तक पहुंचना कितना मुश्किल हो गया है, ये बात इस तरह की खबरों से साफ तौर पर समझी जा सकती है, क्योंकि जब भी कहीं कोई हमला होता है तो केवल पुलिस या आर्मी जवान ही आतंकियों का पहला निशाना नहीं बनते बल्कि मौके पर मौजूद पत्रकार भी उस हमले की चपेट में आते हैं, जो ग्राउंड रिपोर्ट कर लोगों को मामले से जुड़ी छोटी से छोटी खबर पहुंचाने में जुटे होते हैं.

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