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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को धूल चटाने के बाद अब जम्मू कश्मीर के आतंकवाद से निपटेंगे बीवीआर सुब्रमण्यम

'सुरक्षा से जु़ड़ी बैठकों के दौरान श्री सुब्र्रमण्यम ने हमेशा केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के बीच समन्वय और सहयोग पर जोर दिया. नतीजतन, ऑपरेशन के दौरान अच्छे नतीजे सामने आए.'

Updated On: Jun 21, 2018 11:45 AM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को धूल चटाने के बाद अब जम्मू कश्मीर के आतंकवाद से निपटेंगे बीवीआर सुब्रमण्यम

छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) बीवीआर सुब्रमण्यम मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के समय दो बार प्रधानमंत्री कार्यालय में काम कर चुके हैं. राज्य के गृह विभाग में काम करने का उन्हें अनुभव है. इस वजह से ही उन्हें हिंसा से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में भेजा जा रहा है.

माना जा रहा है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर का मुख्य सचिव बनाया जाएगा, जहां मंगलवार को राज्यपाल शासन लगाया गया है.

नौकरशाहों और दोस्तों के बीच उन्हें बीवीआर के नाम से जाना जाता है. वो 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उनकी पृष्ठभूमि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है और उनका नाता अविभाजित आंध्र प्रदेश से है.

छत्तीसगढ़ में काम करते हुए वे माओवादी हिंसा से प्रभावी तरीके से निपटे. इस वजह से ही केंद्र ने उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में की है, जहां इस समय पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के चलते आतंरिक सुरक्षा गंभीर संकट में है.

सुब्रमण्यम की कोशिशों के चलते उग्रवाद में हुई रोक

छत्तीसगढ़ सरकार के सूत्रों के मुताबिक प्रधान सचिव और गृह विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव रहते हुए सुब्रमण्यम ने माओवादियों के गढ़ बस्तर में नक्सली हिंसा पर काबू पाने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के बीच समन्वय में प्रभावी भूमिका निभाई.

बस्तर संभाग के जिले में तैनात एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर फर्स्टपोस्ट को बताया, 'पिछले तीन साल में बस्तर में माओवाद से जुड़ी घटनाओं में कमी आई है. अतीत के विपरीत, बुर्कापाल में हुई एक घटना को छोड़कर,किसी एक माओवादी हमले में मारे गए लोगों की संख्या में कमी आई है. सुब्रमण्यम सर की देखरेख में सभी फैसले हुए और सुरक्षा बलों के साथ उनका संपर्क शानदार था. माओवाद से पीड़ित इस इलाके में चीजें सबसे खराब हो सकती थीं,लेकिन अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के रूप में उनकी सक्रिय भागीदारी, योजना और निष्पादन ने उग्रवाद को रोकने में बहुत मदद की.'

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छत्तीसगढ़ कैडर के इस अधिकारी की अहमियत का पता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को भेजे गए जवाब से मिलता है. दरअसल, रमन सिंह ने सुब्रमण्यम को केंद्र की जिम्मेदारियों से मुक्त करने की अपील की थी, जिससे वो अपने छत्तीसगढ़ कैडर में सेवाएं दे सकें.

एक रिटायर्ड नौकरशाह ने कहा 'मुझे अच्छी तरह से याद है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बीवीआर को केंद्र में जिम्मेदारियों से मुक्त करने के बारे में लिखा था ताकि वो छत्तीसगढ़ कैडर में सेवाएं दे सकें. प्रधानमंत्री ने जवाब दिया था कि उन्हें संवेदनशील मामलों से निपटने के लिए अनुभवी के साथ-साथ एक ऐसे अधिकारी की आवश्यकता है जिसमें प्रधानमंत्री का भरोसा  हो. यही बीवीआर की खासियत है. उन्होंने मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी दोनों के साथ आसानी से काम किया और उनका विश्वास जीता. उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का करीबी माना जाता है.'

वह सी रंगराजन, शिवशंकर मेनन, टीकेए नायर और पुलक चटर्जी जैसे मनमोहन सिंह के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल थे.

विश्व बैंक के वरिष्ठ सलाहकार भी रह चुके हैं

57 साल के सुब्रमण्यम ने यूपीए -1 सरकार के दौरान मनमोहन सिंह के निजी सचिव के रूप में पीएमओ में चार से अधिक साल तक काम किया. साउथ ब्लॉक (पीएमओ) में संयुक्त सचिव के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल मार्च 2012 में शुरू हुआ और मार्च 2015 तक जारी रहा. उन्होंने छत्तीसगढ़ जाने से पहले प्रधानमंत्री मोदी के संयुक्त सचिव के रूप में लगभग एक वर्ष तक काम किया.

सूत्रों ने बताया कि लंदन बिजनेस स्कूल से प्रबंधन की डिग्री हासिल करने वाले सुब्रमण्यम ने इस दौरान वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में भी काम किया.

सुब्रमण्यम को उनके काम के लिए जाना जाता है. उनके पास जेल और ट्रांसपोर्ट विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी थी. उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि किसी खास इलाके में माओवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद रहे.

छत्तीसगढ़ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'उन्होंने इस तरह के खास बचाव उपायों को लागू किया ताकि माओवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान जान-माल के नुकसान से बचा जा सके.'

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केंद्र और राज्य पुलिस के बीच समन्वय बैठाने में अहम भूमिका

माओवाद पीड़ित राज्यों में केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस के बीच समन्वय की कमी को अक्सर ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है.

छत्तीसगढ़ में केंद्रीय सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने फर्स्टपोस्ट को नाम नहीं छापने की शर्त पर बत

राज्य के गृह विभाग के प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाई. यह अतीत की रणनीति के विपरीत, था जब सुरक्षा बल रक्षात्मक रुख अपनाते थे.

सेवानिवृत्त नौकरशाह ने कहा, 'अच्छी प्रतिष्ठा के साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव के अनुभव और क्षमता को ध्यान में रखते हुए, नियुक्ति समिति ने उन्हें जम्मू-कश्मीर में शीर्ष पद के लिए योग्य पाया. राज्यपाल शासन के तहत, सेना और सुरक्षा बलों में समन्वय की अहम भूमिका होती है. छत्तीसगढ़ में संघर्ष वाले इलाके में प्रशासन के उनके अनुभव को देखते हुए हमें यकीन है कि जम्मू-कश्मीर में उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा.'

केंद्र ने सुब्रमण्यम से तत्काल प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में कार्यभार संभालने को कहा है. बार-बार प्रयासों के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

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