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J&K: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने SOP के उल्लंघन की उठाई आवाज, सुरक्षाबलों ने खारिज किए आरोप

एसओपी में इस बात का स्पष्ट जिक्र है कि, गैर-घातक और घातक बल प्रयोग से पहले भीड़ को चेतावनी दी जानी चाहिए

Updated On: Aug 12, 2018 04:19 PM IST

Ishfaq Naseem

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J&K: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने SOP के उल्लंघन की उठाई आवाज, सुरक्षाबलों ने खारिज किए आरोप

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कश्मीर घाटी में सरकारी बलों (सुरक्षाबलों और पुलिस) पर विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोगों को नियंत्रित करने के लिए अत्याधिक सख्ती बरतने के आरोप लगाए हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदर्शनकारी भीड़ पर काबू पाने के लिए सरकारी बल कम घातक साधनों जैसे वाटर कैनन (पानी की बौछार), रबर बुलेट/प्लास्टिक बुलेट के बजाए बुलेट (गोलियों) और पैलेट (छर्रों) का उपयोग कर रहे हैं, जो कि सरासर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपी) यानी मानक संचालन प्रक्रियाओं का उल्लंघन का है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में एसओपी के तहत विभिन्न साधनों और उपायों को सूचीबद्ध किया है, जिनके अनुपालन की आवश्यकता है, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने में उन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. कश्मीर घाटी में एसओपी के उल्लंघन का मामला राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) के नोटिस में भी लाया जा चुका था. इस साल जुलाई में मानवाधिकार कार्यकर्ता और इंटरनेशनल फोरम फॉर जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष मोहम्मद अहसन उंतू ने राज्य मानवाधिकार आयोग से सुरक्षाबलों की शिकायत की थी और उनपर एसओपी के उल्लंघन का आरोप लगाया था.

हालांकि एसओपी को अमल में लाने के मामले को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के नोटिस में भी लाया जा चुका है. जिसे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने उठाया था. लेकिन सरकार ने एसएचआरसी की शिकायत के बावजूद एसओपी के बारे में खुलासा करने से इनकार कर दिया था. संसद में एसओपी के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा था कि, एसओपी के बारे में जानकारियों को साझा और सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वो गोपनीयता के दायरे में आती हैं और उनका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.

Jammu Kashmir

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में अलगाववादियों के बुलाए बंद का एक दृश्य (फोटो: पीटीआई)

'नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है'

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था कि, 'सुरक्षाबलों और पुलिस का उपयोग शांति बहाल करने के उद्देश्य से, हिंसक भीड़ को काबू करने और गैरकानूनी तरीके से किसी जगह पर इकट्ठा हुए लोगों को भगाने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए. ऐसा किसी हादसे को टालने या हताहतों की संख्या कम से कम करने के लिए आवश्यक है. लेकिन इसके लिए लॉ एनफोर्समेंट एलिमेंट्स (कानून प्रवर्तन तत्व) और शांतिप्रिय नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है.'

हंसराज अहीर ने अपने जवाब में आगे कहा था कि, 'बलों के उपयोग के पदानुक्रम के साथ-साथ रबर बुलेट/प्लास्टिक बुलेट का उपयोग भी शामिल है. चूंकि, एसओपी और सुझाए गए सुरक्षा उपायों की सामग्रियों में गोपनीय जानकारी होती है, इसलिए, इस मामले में और जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में प्रकट नहीं की जा सकती है.'

एसओपी के मुताबिक, प्रदर्शनकारी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अधिकारियों को वाटर कैनन और रबड़/प्लास्टिक की गोलियों का इस्तेमाल करना चाहिए. भीड़ पर फायरिंग की आवश्यकता तब होती है, जब भीड़ में शामिल लोगों में से कोई शख्स गोली चला दे. लेकिन इन दिनों ऐसा देखा जा रहा है कि मुठभेड़ वाली जगहों पर फायरिंग में आम लोग मारे जा रहे हैं. विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की गोलीबारी से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है.

एसओपी के तहत भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 7 कदम निर्दिष्ट किए गए हैं. सबसे पहले प्रदर्शनकारियों को हिंसा से परहेज करने की हिदायत दी जाती है. लेकिन फिर भी अगर भीड़ उग्र होकर हंगामा जारी रखती है, तो उसे भगाने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया जाना चाहिए.

तीसरे चरण में, अगर भीड़ अभी भी विरोध और हिंसा पर अड़ी रहती है, तो पुलिस और सुरक्षाबलों को PAVA चिली शैल (मिर्च के गोले) और आंसू गैस के गोले का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया गया है. चौथे चरण में भीड़ को भगाने के लिए लाठीचार्ज किया जाना चाहिए. वहीं पांचवें और छठे चरण में, रबड़ की गोलियों, प्लास्टिक की गोलियों और पैलेट गन्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इन सभी उपायों में असफल होने के बाद और प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षाबलों पर गोलियां चलाने या हथगोले फेंकने के बाद ही उनपर फायरिंग की जानी चाहिए.

Stone Pelting in J&K

कश्मीर घाटी में जुलाई 2016 में आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद पत्थरबाजी की घटनाओं में तेजी आई है

सीधे SOP के सातवें चरण का सहारा लेकर फायरिंग शुरू कर देते हैं

लेकिन इंटरनेशनल फोरम फॉर जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष मोहम्मद अहसन उंतू का कहना है कि, 'वाटर कैनन जैसे अन्य भीड़ नियंत्रक उपाय करने के बजाय सुरक्षाबल सीधे एसओपी के सातवें चरण का सहारा लेकर प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करना शुरू कर देते हैं.'

एसएचआरसी के सामने पुलिस द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक, इन एसओपी का पालन पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) समेत सभी केंद्रीय सशस्त्र बल कर्मियों (सीएएफपी) को करना होगा.

सीआरपीएफ के महानिरीक्षक (आईजी) रविदीप साही ने बताया कि, वो नियमित रूप से एसओपी का पालन कर रहे हैं. साही के मुताबिक, 'हम हमेशा एसओपी का पालन करते हैं. जहां भी कानून और व्यवस्था की स्थिति है, चाहे वह शहर या अन्य जगहों पर हों, हम इन एसओपी का पूरा ख्याल रखते हैं और उनका उचित अनुपालन करते हैं.'

साही ने आगे बताया कि, एसओपी के बारे में सुरक्षाबलों का मूल्यांकन किया जा रहा है. साही का कहना है कि, 'जब घाटी में किसी सुरक्षाकर्मी की तैनाती की जाती है, तब हम उसे 4 हफ्ते की आरंभिक प्रशिक्षण देते हैं. इसके बाद, एक सप्ताह का पीरियोडिक लॉ (आवर्ती नियम-कानून) और व्यवस्था का भी प्रशिक्षण दिया जाता है. इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सीआरपीएफ के जवान और पुलिसकर्मी संयुक्त रूप से हिस्सा लेते हैं.'

हालांकि, पैलेट विक्टिम वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी का कहना है कि, सुरक्षाबलों द्वारा प्रदर्शनकारी भीड़ पर सीधे फायरिंग की जा रही है. इसके अलावा पैलेट का इस्तेमाल भी धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिससे कई युवा अंधे हो जाते हैं. उन्होंने आगे बताया कि, अगस्त 2016 में, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद पुलवामा में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के दौरान उन्हें भी छाती में गोली मार दी गई थी.

मोहम्मद अशरफ वानी ने आगे बताया कि, 31 अक्टूबर, 2016 को, सुरक्षाबलों की एक टुकड़ी ने उनके गांव रोहमू में पैलेट गन्स का अंधाधुंध इस्तेमाल किया था, जिससे उनकी आंखें जख्मी हो गईं थीं. वानी के मुताबिक, 'सुरक्षाबलों के जवान आए और हमारे घरों में घुसकर पैलेट गन्स से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. पैलेट गन्स की उस फायरिंग में गांव के कई लोग जख्मी हुए. उनमें मैं भी शामिल था. सुरक्षाबलों की पैलेट गन्स से निकले कुछ छर्रे मेरी आंखों में भी लगे. बाद में मेरा लंबा इलाज चला. मुझे 7 सर्जरी कराना पड़ीं. आंखों में छर्रे घुसने के बाद से मेरी नजर कमजोर हो गई है. मुझे अब कोई चीज साफ दिखाई नहीं देती है.'

पैलेट गन से घायल एक बच्चा

सुरक्षाबलों के पैलेट गन इस्तेमाल से कश्मीर घाटी में घायल हुआ एक बच्चा

'कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबल अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करने में असफल रहे'

फिजीशियंस फॉर ह्यूमन राइट्स (पीएचआर) नाम के एक अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूह ने कश्मीर पर 2016 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि, कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबल न केवल अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करने में असफल रहे, बल्कि वो सार्वजनिक आंदोलनों से निपटने के लिए गैर-घातक उपायों का पालन करने में भी नाकाम रहे. जबकि प्रदर्शनकारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी) साल 2012 में ही मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की अनुशंसा कर चुकी है.

पीएचआर की रिपोर्ट के मुताबिक, 'पीएचआर ने कश्मीर में धरना-प्रदर्शन में शामिल लगभग प्रत्येक प्रदर्शनकारी और उसके साथियों से बात की. उन्होंने बताया कि, फायरिंग या पैलेट गन्स के इस्तेमाल से पहले सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को कोई चेतावनी नहीं दी. जबकि एसओपी के तहत ऐसा करना आवश्यक है. एसओपी में साफ जिक्र है कि, गैर-घातक और घातक (जहां तक यह व्यावहारिक और जरूरी हो) बल प्रयोग से पहले भीड़ को चेतावनी दी जानी चाहिए.'

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