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'रेपिस्तान' वाले ट्वीट पर कश्मीर के पहले IAS टॉपर के खिलाफ नोटिस जारी

नोटिस मिलने के बाद ट्वीट करते हुए फैसल ने लिखा है , दक्षिण एशिया में बलात्कार के चलन के खिलाफ मेरे व्यंग्यात्मक ट्वीट के एवज में मुझे मेरे बॉस से प्रेम पत्र (नोटिस) मिला

FP Staff Updated On: Jul 11, 2018 10:04 AM IST

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'रेपिस्तान' वाले ट्वीट पर कश्मीर के पहले IAS टॉपर के खिलाफ नोटिस जारी

तेजी से बढ़ते बलात्कार की घटनाओं के संबंध में ट्वीट करने वाले कश्मीर के पहले IAS टॉपर शाह फैसल के खिलाफ जम्मू - कश्मीर सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है. शाह फैसल 2010 बैच के आईएएस परीक्षा के टॉपर हैं.

फैसल को भेजे गए एक नोटिस में सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है, आप कथित रूप से आधिकारिक कर्तव्य निभाने के दौरान पूर्ण ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करने में असफल रहे हैं, जो एक लोक सेवक के लिए उचित व्यवहार नहीं है. बताया जा रहा है  कि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर सरकार को फैसल के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.

सूत्रों के अनुसार , विभाग ने केंद्र के पर्सनल और ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के अनुरोध पर फैसल के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है.

क्या था फैसल का ट्वीट

फैसल ने ट्वीट किया था , जनसंख्या + पितृसत्ता + निरक्षरता + शराब + पॉर्न + तकनीक + अराजकता = रेपिस्तान.

यह पोस्ट  पर्सनल और ट्रेनिंग डिपार्टमेंट  को नागवार गुजरा.

नोटिस मिलने के बाद ट्वीट करते हुए फैसल ने लिखा है , दक्षिण एशिया में बलात्कार के चलन के खिलाफ मेरे व्यंग्यात्मक ट्वीट के एवज में मुझे मेरे बॉस से प्रेम पत्र (नोटिस) मिला.

नोटिस मिलने के बाद फैसल ने क्या कहा?

नोटिस मिलने के बाद न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में फैसल ने कहा 'मेरी नौकरी खोना इस बहस की तुलना में एक छोटा सा जोखिम है जिसे मैं करने की कोशिश कर रहा हूं. हां, मैं अपनी नौकरी खो सकता हूं, लेकिन फिर दुनिया संभावनाओं से भरी है.

फैसल कहते हैं कि सरकारी अधिकारी की एक छवि है. 'वो गुमनाम है, उसे बहस नहीं करना है, उसके चारों ओर जो कुछ भी हो रहा है वो उसे देख कर अपनी आंखें बंद कर ले. लेकिन इसे अब बदलने की जरूरत है.'

फैसल ने कहा  मेरा उद्देश्य सरकारी अधिकारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कमी को उजागर करना था.

सरकारी कर्मचारी समाज का एक बड़ा वर्ग हैं, लेकिन हम आमतौर पर उनके बारे में बात नहीं करते. सामान्य तौर पर सरकार और कर्मचारियों के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है, और कर्मचारी को सिर्फ लेख का पालन करना है.

मैं इस ट्वीट के माध्यम से बहस करने का प्रयास कर रहा हूं कि कर्मचारी भी इस समाज के सदस्य हैं. वह बड़े नैतिक मुद्दों से अलग नहीं रह सकते. मेरा मानना है कि, मैंने उचित सावधानी के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार उपयोग किया है. उदाहरण के लिए, मानदंडों को ध्यान में रखते हुए मैंने कभी भी सरकारी नीति की आलोचना नहीं की है.

35 साल के फैसल राज्य पर्यटन विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं. वो फिलहाल मास्टर डिग्री के लिए अमेरिका में हैं.

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