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'फ्रीडम चाचा' के मुरीद कश्मीरी और विपक्ष

बहुत से राजनेता उनकी इस खूबी से रश्क करते हैं. वहीं आम लोगों के बीच वो ‘कश्मीर के मुरलीवाले’ के तौर पर जाने जाते हैं.

Sameer Yasir Updated On: Jan 04, 2017 07:38 PM IST

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'फ्रीडम चाचा' के मुरीद कश्मीरी और विपक्ष

कश्मीर में इन दिनों 'फ्रीडम चाचा' की बड़ी चर्चा है. वो अपने बोलने के शानदार अंदाज के लिए मशहूर हैं. बहुत से राजनेता उनकी इस खूबी से रश्क करते हैं. वहीं आम लोगों के बीच वो ‘कश्मीर के मुरलीवाले’ के तौर पर जाने जाते हैं.

कश्मीर में पांच महीने के हिंसक दौर में भी 'फ्रीडम चाचा' जहां भी गए उन्हें देखने-सुनने को लोगों का अच्छा खासा मजमा जुटता रहा. नारे लगाने का उनका खास अंदाज लोगों को खूब लुभाता है. बच्चे हों या बुजुर्ग, महिलाएं हो या युवा वर्ग, सब के सब 'फ्रीडम चाचा' के मुरीद हैं.

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यही वजह है कि 'फ्रीडम चाचा' यानी सरजन बरकती पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगा दिया गया. वो दक्षिण कश्मीर के मुस्लिम धर्मगुरू हैं. उन्हें इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि सरकार के मुताबिक सरजन बरकती हिंसा भड़का रहे थे. जिसे काबू करना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा था.

विधानसभा में गूंजा चाचा का तराना

दिलचस्प बात देखिए कि सोमवार को विधानसभा का सत्र शुरू होने पर विपक्षी दलों कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के विधायक वही नारे लगा रहे थे जो नारे लगाने पर 'फ्रीडम चाचा' गिरफ्तार करके जेल भेज दिए गए.

विधानसभा के अंदर विपक्षी दल के विधायक नारे लगा रहे थे: ये पेलेट बुलेट...ना भई ना, ये पावा शावा ना भई ना...पीएसए सरकार, ना भई ना...

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विधानसभा में विपक्ष के हमलों का जवाब देते जम्मू कश्मीर सरकार के मंत्री सज्जाद लोन. फोटो: पीटीआई

पुलिस का कहना है कि सरजन बरकती ने दक्षिण कश्मीर के कई गांवों और कस्बों में भारत विरोधी रैलियों का आयोजन किया. उन्होंने भारत विरोधी नारेबाजी के एक नए तरीके को जन्म दिया और मकबूल बनाया. उनके वीडियो पूरे कश्मीर में वायरल हैं. सोशल मीडिया पर उनके लहजे और तौर तरीकों को लोग खूब पसंद करते हैं.

'फ्रीडम चाचा' को पिछले साल एक अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था. तब से वो जम्मू की कोट बलवल जेल में बंद हैं.

अब उनके मशहूर नारों से विरोधी दलों के विधायक भी फायदा उठाने में जुटे हैं. ताकि विधानसभा के भीतर वो बीजेपी-पीडीपी की सरकार को घेर सकें. इस सरकार के कार्यकाल में हिंसा के चलते सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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राज्य में कांग्रेस के प्रमुख गुलाम अहमद मीर ने बताया कि उन्हें सरजन बरकती के बारे में कुछ नहीं पता. लेकिन उन्होंने ये कहा कि उनके साथियों ने विधानसभा के भीतर जो नारे लगाये वो गलत नहीं थे.

मीर ने कहा कि, 'मौजूदा हालात के लिहाज से ये नारे बिल्कुल सटीक थे. हिंसा में 90 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. 15 हजार से ज्यादा घायल हुए हैं. पांच सौ से ज्यादा लोगों की आंखों की रौशनी चली गई है और हजारों लोग जेल में हैं. हम अभी सरकार से सवाल नहीं पूछेंगे तो कब पूछेंगे'?

मीर ने कहा कि, 'हम विपक्ष में हैं. सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी है. हमारे मुद्दे एकदम साफ हैं, हम जानना चाहते हैं कि हिंसा रोकने के लिए महबूबा मुफ्ती सरकार ने क्या कदम उठाए. विरोध-प्रदर्शन रोकने में सरकार क्यों नाकाम रही'.

महबूबा मुफ्ती का पलटवार

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ताजा हिंसा की जांच के लिए आयोग बनाने की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया है. मुफ्ती ने आरोप लगा कि नेशनल कांफ्रेंस ने नब्बे के दशक में धांधली करके चुनाव जीते, जिसकी वजह से राज्य में उग्रवाद पनपा.

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मुफ्ती ने सदन में कहा कि, 'जिन लोगों ने जनमत संग्रह की मांग उठाकर अलगाववाद का बीज बोया उन्होंने ही 1987 में चुनावों में धांधली की. इसी वजह से राज्य में आतंकवाद पनपा'.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के करीब महीने भर के बजट सत्र की शुरुआत बेहद हंगामेदार रही. राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने जबरदस्त नारेबाजी की, जिसके बाद राज्यपाल अपना अभिभाषण बीच में ही छोड़कर चले गए. उस वक्त सदन में राष्ट्रगान बजाया जा रहा था.

बीजेपी विधायक रविंदर रवि ने राज्यपाल एन एन वोहरा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया है.

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वहीं, नेशनल कांफ्रेंस के विधायक अली मुहम्मद सागर ने कहा कि, 'ये सरकार खुद को जवाबदेही से परे मानती है. ये लोगों की दिक्कतों को भी नहीं समझती. जब सूबे में लोग मर रहे हो तो हम बजट भाषण कैसे सुन सकते हैं. कश्मीर में जुल्म कि इंतेहां हो चुकी है'.

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