S M L

SC/ST Act में पत्रकार की गिरफ्तारी पर घिरी राजस्थान सरकार, खड़े हुए ये सवाल!

दुर्ग सिंह ने दावा किया कि जिस दिन पटना में राकेश पासवान के साथ गाली-गलौच का आरोप है, उस दिन वह बाडमेर में एक पुस्तक विमोच कार्यक्रम की कवरेज कर रहे थे

Updated On: Aug 22, 2018 10:12 PM IST

FP Staff

0
SC/ST Act में पत्रकार की गिरफ्तारी पर घिरी राजस्थान सरकार, खड़े हुए ये सवाल!
Loading...

एसी-एसटी एक्ट के तहत पटना में दर्ज केस में बाड़मेर के एक पत्रकार की गिरफ्तारी ने तूल पकड़ लिया है. सर्व समुदाय और पत्रकारों ने बाड़मेर में इस गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया. आरोप लगाया कि पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित को सियासी दबाव में फर्जी केस बनाकर फंसाया गया है. राजस्थान सरकार से उच्च स्तरीय जांच कराने और पत्रकार की तत्काल रिहाई कराने की मांग की. राजस्थान सरकार ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले में साजिश के आरोप की जांच कराने को तैयार है. पत्रकार दुर्ग सिंह का आरोप है कि जिस शख्स ने केस दर्ज कराया, वो उसे जानता ही नहीं. न ही कभी पटना गया.

बाड़मेर में जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर सर्व समुदाय ने पत्रकार दुर्ग सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में रैली निकालकर प्रदर्शन किया. दुर्ग सिंह को सियासी दबाव में फर्जी केस दर्ज कराकर गिरफ्तार कराने का आरोप लगाया. तत्काल रिहाई और साजिश की उच्च स्तरीय जांच की मांग की. बीजेपी के कई विधायक भी पत्रकार को इंसाफ दिलाने के लिए मैदान में कूद गए. हालांकि फंसाने का आरोप भी बाड़मेर के एक बीजेपी नेता पर ही है.

सरकार ने कहा गिरफ्तारी में नहीं है उनका हाथ

बाड़मेर में पत्रकारों ने भी विरोध प्रदर्शन किया और दुर्ग सिंह को एसी-एसटी अधिनियम का दुरुपयोग कर फंसाने का आरोप लगाया. उधर राज्य सरकार ने सफाई दी कि दुर्ग सिंह की गिरफ्तारी में राजस्थान सरकार का हाथ नहीं है. दुर्ग सिंह को पटना की अदालत के वांरट पर गिरफ्तार किया गया. राज्य के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने राजनीतिक दबाब और सियासी साजिश के तहत फंसाने के आरोप को नकारा. लेकिन कटारिया ने कहा सरकार इस आरोप की भी जांच कराने को तैयार है.

राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि पटना की कोर्ट का वारंट था. दुर्ग सिंह को जेल भी कोर्ट ने भेजा है तो कोई तो मामला होगा. फिर भी साजिश का आरोप है, तो जांच करवाएंगे.

पटना की एसी एसटी अदालत में 31 मई 2018 को राकेश पासवान ने एक केस दायर किया. जिसमें आरोप लगाया कि दुर्ग सिंह राजस्थान में गिट्टी का बड़ा कारोबारी है. वह बाड़मेर में उसके यहां मजदूरी कर रहे थे. लेकिन छह महीने बाद पिता की तबीयत खराब होने पर घर आ गया था. तब दुर्ग सिंह पटना आए और उसे वापस चलने के लिए धमकाया. जातिसूचक गालियां दी और मारपीट की. कोर्ट ने इस केस के बाद वारंट जारी किया.

वॉट्सएप पर मिला पुलिस को वारंट

आरोप है कि बाड़मेर एसपी ने वॉट्सएप पर पटना पुलिस से वांरट मिलने का हवाला देकर दुर्ग सिंह को मिलने के लिए दफ्तर बुलाया. एसपी के आदेश पर दुर्ग सिंह को गिरफ्तार कर पटना भिजवा दिया. जहां पटना पुलिस ने कोर्ट मे पेश किया. कोर्ट ने 1 सितबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.

वहीं दुर्ग सिंह ने पूरे केस को ही फर्जी बताया. दुर्ग सिंह ने अपनी सफाई में बताया कि वो केस दर्ज कराने वाले राकेश पासवान को नहीं जानता है. गिरफ्तारी से पहले कभी पटना या बिहार नहीं गए. ऐसे में पटना में गाली-गलौच कैसे कर सकते हैं. दुर्ग सिंह ने दावा किया कि जिस दिन पटना में राकेश पासवान के साथ गाली-गलौच का आरोप है, उस दिन वह बाडमेर में एक पुस्तक विमोच कार्यक्रम की कवरेज कर रहे थे. दुर्ग सिंह ने उसकी रिकार्डिंग होने का दावा किया. साथ ही दुर्ग सिंह ने कहा कि वह गिट्टी का कारोबार नहीं करते हैं.

बाड़मेर पुलिस कटघरे में इसलिए है क्योंकि बिहार पुलिस ने दुर्ग सिंह को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस नहीं भेजी थी. बाड़मेर के एसपी ने वॉट्सएप पर नोटिस का हवाला देकर दुर्ग सिंह को गिरफ्तार कर राजस्थान पुलिस के दो जवानों के साथ एक प्राइवेट टैक्सी में पटना भिजवा दिया. सवाल ये कि बाड़मेर पुलिस को इतनी जल्दी क्यों थी? बिना मामले की पड़ताल के तत्काल गिरफ्तारी क्यों की थी? क्या बाड़मेर पुलिस किसी दबाब में थी?

(न्यूज18 के लिए भवानी सिंह की रिपोर्ट)

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi